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एंटी करप्शन टीम ने नगर पालिका के लिपिक को रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोचा हड़कंप

✍️ Admin 📅 10 January, 2026 ⏰ 10:02 PM 👁 127 views


   लखनऊ। यूपी के प्रतापगढ़ जिले की बेल्हा नगर पालिका परिषद में शुक्रवार शाम उस समय हड़कंप मच गया, जब प्रयागराज से आई एंटी करप्शन यूनिट की 14 सदस्यीय टीम ने लिपिक प्रशांत सिंह को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई नगर पालिका कार्यालय परिसर में की गई, जिससे पूरे दफ्तर में अफरा-तफरी मच गई।

लिपिक की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही नगर पालिका कार्यालय में हड़कंप मच गया। कई कर्मचारी कार्यालय छोड़कर भाग गए, जबकि कुछ ने अपने मोबाइल फोन तक स्विच ऑफ कर लिए। अचानक हुई इस कार्रवाई से कर्मचारी सहमे नजर आए। एंटी करप्शन टीम ने मौके पर ही रिश्वत की पूरी रकम बरामद करके लिपिक को हिरासत में ले लिया।

मामले की शुरुआत झूँसी प्रयागराज निवासी ठेकेदार प्रवीण रामपाल की शिकायत से हुई। ठेकेदार ने 6 जनवरी को एंटी करप्शन यूनिट प्रयागराज में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि नगर पंचायत ढकवा के अधिशासी अधिकारी (ईओ) अभिनव यादव और बेल्हा नगर पालिका परिषद के लिपिक प्रशांत सिंह उनकी फर्म को आवंटित कार्यों की साइट विजिट और स्वीकृति के बदले 85 रुपये से अधिक की रिश्वत मांग रहे हैं।

शिकायत की सत्यता की जांच के बाद एंटी करप्शन यूनिट प्रयागराज की निरीक्षक अंजलि यादव के नेतृत्व में 14 सदस्यीय टीम ने जाल बिछाया। शुक्रवार शाम करीब 3 बजे टीम प्रतापगढ़ पहुंची। योजना के तहत शाम करीब 4:30 बजे ठेकेदार नगर पालिका परिषद बेल्हा कार्यालय पहुंचा। जैसे ही उसने लिपिक प्रशांत सिंह को रिश्वत की रकम सौंपी, पहले से तैनात एंटी करप्शन टीम ने तत्काल उसे रंगे हाथ पकड़ लिया।

पूछताछ के दौरान गिरफ्तार लिपिक प्रशांत सिंह ने स्वीकार किया कि उसने यह रकम नगर पंचायत ढकवा के ईओ अभिनव यादव के कहने पर ली थी। इसके बाद एंटी करप्शन टीम ने प्रशांत सिंह और ईओ अभिनव यादव दोनों के खिलाफ संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई। टीम अब इस बात की भी जांच कर रही है कि इससे पहले भी कितनी बार और किन-किन कार्यों के लिए इस तरह की अवैध वसूली की गई।

बताया जाता है कि गिरफ्तार लिपिक प्रशांत सिंह को पहले ही बीते 12 सितंबर को नगर पालिका कार्यालय में फर्जी दस्तावेज तैयार करने के आरोप में निलंबित किया जा चुका था। उसके खिलाफ जांच समिति भी गठित की गई थी। इसके बावजूद वह नियमित रूप से कार्यालय आता-जाता रहा और काम करता रहा, जो प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।

गिरफ्तारी के बाद शनिवार की सुबह एंटी करप्शन टीम प्रशांत सिंह को अपने साथ प्रयागराज ले गई। अब पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है। इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है, वहीं नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।

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