Budget 2026 Reaction Live: बजट से पहले ममता सरकार का मोदी सरकार पर भेदभाव का आरोप, जानिए मल्लिकार्जुन खरगे से लेकर रेखा गुप्ता तक ने क्या कहा
आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में वित्त वर्ष 2026-2027 के लिए आम बजट पेश करेंगी. ये उनका लगातार 9वां बजट होगा. देश की अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने वाले बजट पर आज किसानों से लेकर मिडिल क्लास तक की नजरें हैं. टैक्सपेयर्स को भी राहत की उम्मीद है. ये भी देखना होगा कि सरकार वित्तीय संतुलन और ग्रोथ के बीच कैसे तालमेल बैठाती है. वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट ऐसे समय आ रहा है जब पूरी दुनिया में उथल-पुथल का माहौल है. अमेरिका की टैरिफ नीतियों को देखते हुए बजट में घरेलू बफर और एक्सपोर्ट मजबूत करने पर जोर दिया जा सकता है. सरकार MGNREGA को विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन में बदलने को लेकर सोच रही है, इसके फ्रेमवर्क में अनुमान है कि करीब 95 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे. सरकार पर रोजगार सृजन, पूंजीगत बढ़ाने और घरेलू स्तर पर उपभोग को बढ़ावा देने का दबाव है. जीएसटी और आयकर में कटौती, भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से ब्याज दरों में कटौती आदि से ट्रंप के टैरिफ का सामना करने में भारतीय अर्थव्यवस्था को मदद मिली है. अब वित्त मंत्री के सामने चुनौती ऐसे उपायों को खोजने की होगी, जो इन बाधाओं के बीच भारत के विकास को गति दे सके. निर्मला सीतारमण भारत की पहली वित्त मंत्री हैं, जो लगातार 9वीं बार बजट पेश करेंगी. बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री और पूर्व वित्त मंत्री मोरारजी देसाई ने 10 बार और पी चिदंबरम ने 9 बार बजट पेश किया, लेकिन दोनों ने लगातार ऐसा नहीं किया बल्कि अलग-अलग कार्यकाल में किया. सरकार का लक्ष्य रेल बुकिंग में वेटिंग लिस्ट को खत्म करना है, इसके लिए रेलवे ट्रैक को मॉडर्नाइज़ करना और नई ट्रेनें जोड़ना जरुरी है. सरकार 300 से ज्यादा नई अमृत भारत और वंदे भारत ट्रेनों की घोषणा कर सकती है. यूनियन बजट 2026-27 से उम्मीदें कंप्लायंस को आसान बनाने, लिक्विडिटी में सुधार करने और ज़्यादा टैक्स निश्चितता देने पर टिकी हैं. MSME को जीएसटी में भी राहत की उम्मीद है. बजट पर केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा, "पिछले 11 सालों में, प्रधानमंत्री के नेतृत्व में पेश किए गए बजट ने लोगों की आकांक्षाओं को दिखाया है और देश को आगे ले जाने का लक्ष्य रखा है. आज पेश किया जा रहा बजट 2047 तक 'विकसित भारत' के विजन के साथ जुड़ा हुआ है. कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर नीति निर्धारण में समन्वय की कमी का आरोप लगाते हुए शनिवार को सवाल किया कि क्या बजट के आंकड़ें पेश किए जाने के तुरंत बाद उनमें संशोधन किया जाएगा क्योंकि बजट के कुछ ही दिन बाद सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) की नयी शृंखला जारी की जानी है. ग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘ राज्य सरकारें आशंकाग्रस्त होकर प्रतीक्षा कर रही होंगी कि उनके लिए इसमें क्या है क्योंकि वित्त मंत्री 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें लागू करने की घोषणा करने वाली हैं.’ न्होंने कहा कि वित्त आयोग एक ऐसा निकाय है जिसकी स्थापना संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत हर पांच वर्षों में (या उससे पहले) की जाती है ताकि वह केंद्र द्वारा एकत्र किए गए कर राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी, इस हिस्सेदारी का राज्यों के बीच वितरण और पांच वर्षों की अवधि के लिए विशेष अनुदानों की सिफारिश कर सके. न्होंने कहा कि 16वां वित्त आयोग 2026-27 से 2030-31 तक की अवधि से संबंधित है. रमेश ने कहा, ‘‘लेकिन इसके अलावा दो और चिंताएं भी हैं. पहली-बजट के कई आंकड़े जीडीपी के प्रतिशत के रूप में प्रस्तुत किए जाएंगे. हालांकि ठीक 26 दिन बाद 27 फरवरी 2026 को 2022-23 को आधार वर्ष मानकर नयी और अद्यतन जीडीपी शृंखला जारी होने वाली है.’’
स्रोत: ABP Hindi