सिर्फ रमजान और बकरीद को ही नमाज की इजाजत क्यों? तमिलनाडु का थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी विवाद SC पहुंचा
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के मदुरै स्थित थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी से जुड़े विवाद में दखल देने से इनकार कर दिया है. सोमवार (9 फरवरी, 2026) को याचिकाकर्ता एम इमाम हुसैनी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा. हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार यहां के नल्लिथोप्पू क्षेत्र में मुस्लिम समुदाय को सिर्फ रमजान और बकरीद पर ही नमाज अदा करने की इजाजत है. साथ ही यहां कुर्बानी देने पर भी रोक है. हाईकोर्ट के इस फैसले को एम इमाम हुसैन ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.
आईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि मद्रास हाईकोर्ट का आदेश संतुलित प्रतीत होता है और इसमें दखल देने की कोई जरूरत नहीं है. याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण कोर्ट में पेश हुए. उन्होंने तर्क दिया कि ट्रायल कोर्ट और प्रिवी काउंसिल यह मान चुके हैं कि नल्लिथोप्पू की करीब 33 सेंट भूमि मुस्लिम समुदाय की है, फिर भी हाईकोर्ट ने नमाज की अनुमति सिर्फ रमजान और बकरीद पर ही दी है. उन्होंने इसे समुदाय के धार्मिक अधिकारों पर अनुचित प्रतिबंध करार देते हुए गलत बताया है.
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले में दखल देने से इनकार कर दिया और कहा कि मद्रास हाईकोर्ट का आदेश विभिन्न पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित तरीके से दिया गया है.
तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर दरगाह में होने वाली प्रथाओं से संबंधित एक कानूनी मुद्दा सामने आया था. यहां अनुष्ठानों के दौरान पशुओं की कुर्बानी और मांसाहारी भोजन परोसने के आरोपों के बीच मणिकमूर्ति की ओर से याचिका दायर की गई थी, जिस पर 2 जनवरी को एक सिंगल जज ने अंतरिम निर्देश जारी किए थे. कोर्ट ने आदेश में दरगाह प्रशासन को कुर्बानी देने, मांस परोसने या पहाड़ी की तलहटी से पहाड़ी की चोटी तक मांस ले जाने पर रोक लगा दी थी. अब यहां त्योहार के दौरान कुर्बानी और मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध लागू हैं. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी के नल्लिथोप्पू इलाके में नमाज की अनुमति सिर्फ दो त्योहारों रमजान और बकरीद तक सीमित कर दी थी.
स्रोत: ABP Hindi