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टी20 वर्ल्ड कप में भारत-पाकिस्तान मैच से पहले सलमान खुर्शीद क्या बोले

✍️ Admin 📅 15 February, 2026 ⏰ 09:01 AM 👁 40 views

टी20 वर्ल्ड कप में भारत-पाकिस्तान के बीच रविवार को होने वाले मैच से पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता सलमान ख़ुर्शीद ने खेल में सियासत पर टिप्पणी की है. सलमान ख़ुर्शीद ने कहा, "देश की भावना का सम्मान होना चाहिए. इस पर कोई दो राय नहीं है. लेकिन देश की भावना का सम्मान आंखें बंद कर, आंखें मूंद कर और दिमाग़ का इस्तेमाल न करके नहीं किया जाता है." उन्होंने कहा, "लीडरशिप का काम यह होता है कि आप सही रास्ता दिखाएं भी. लीडरशिप का काम सिर्फ़ यह नहीं होता कि आपको अवाम रास्ता दिखाए. अवाम का सम्मान हमेशा होना चाहिए. यह लोकतंत्र की ज़िम्मेदारी है." "लेकिन लोकतंत्र में आपका यह भी दायित्व बनता है कि आप रास्ता बताएं. सही रास्ता क्या है वो दिखाएं और उस सही रास्ते पर चलने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करें." टी20 वर्ल्ड कप में रविवार को भारत और पाकिस्तान के बीच कोलंबो में मैच होना है. यह मैच शाम सात बजे शुरू होगा. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने यूरोपीय नेताओं को आश्वस्त किया है कि अमेरिका ट्रांसअटलांटिक गठबंधन को छोड़ने की योजना नहीं बना रहा है. उन्होंने कहा कि यूरोप के साथ इसकी तक़दीर 'हमेशा जुड़ी रहेगी'. अमेरिकी विदेश मंत्री ने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में कहा, "हम अलग होने की कोशिश नहीं कर रहे हैं, बल्कि एक पुरानी दोस्ती को फिर से जीवित और मानव इतिहास की सबसे महान सभ्यता को ताज़ा करना चाहते हैं." उन्होंने यूरोप की इमिग्रेशन, व्यापार और जलवायु नीतियों की आलोचना की, लेकिन उनका भाषण पिछले साल इसी कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति जेडी वांस के भाषण से काफ़ी अलग था. उस दौरान जेडी वांस ने यूरोपीय नेताओं को फटकार लगाई थी. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फ़ॉन डेयेर लेयेन ने कहा कि वह रुबियो की टिप्पणियों से "काफ़ी आश्वस्त" हैं. रुबियो ने कहा कि ट्रांसअटलांटिक साझेदारी को समाप्त करना "न तो हमारा लक्ष्य है और न ही हमारी इच्छा". उन्होंने कहा, "हम अमेरिकी लोगों के लिए हमारा घर भले ही वेस्टर्न हेमिस्फियर (पश्चिमी गोलार्द) में है, लेकिन हम हमेशा यूरोप की संतान रहेंगे." इमेज स्रोत, RAMIL SITDIKOV/POOL/AFP via Getty भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ़्रेंस में शामिल होने के लिए जर्मनी गए हुए हैं, जहां एक चर्चा के दौरान उनसे भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और रूसी तेल ख़रीद से जुड़ा सवाल किया गया. जयशंकर से पूछा गया कि 'हाल में अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते को लेकर कहा गया कि भारत को रूस से तेल नहीं ख़रीदने पर मजबूर किया जा रहा है. क्या इससे आपकी रणनीतिक स्वायत्तता पर असर नहीं पड़ रहा?' इस पर एस जयशंकर ने कहा, "मुझे लगता है कि हम अपनी रणनीतिक स्वायत्तता के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं क्योंकि यह हमारे इतिहास और हमारे विकास की प्रक्रिया का अहम हिस्सा रही है." उन्होंने कहा, "जहां तक ऊर्जा (तेल) से जुड़े मुद्दों की बात है, आज के दौर में बाज़ार काफ़ी जटिल है. जैसा कि यूरोप और शायद दुनिया के अन्य हिस्सों में है, भारत में तेल कंपनियां उपलब्धता को देखती हैं, लागत को देखती हैं, जोखिम को परखती हैं और फिर वही फ़ैसले लेती हैं जिन्हें वे सबसे ज़्यादा अपने हित में मानती हैं." भारतीय विदेश मंत्री ने दुनिया के बदलते परिदृश्य पर भी बात की और कहा कि बहुत सी चीज़ें बदल रही हैं और सब अपना आकलन लगा रहे हैं. उन्होंने कहा, "ज़रूरी नहीं कि हम हर बात पर सहमत हों, लेकिन मेरा मानना है कि अगर साझा हित और समानताएं तलाशने की इच्छा हो तो वह संभव है." जयशंकर ने कहा, "लेकिन अगर आपका सवाल यह है कि क्या मैं स्वतंत्र सोच बनाए रखूंगा और अपने फ़ैसले खुद लूंगा? और क्या मैं ऐसे विकल्प चुनूंगा जो कभी-कभी आपकी सोच या किसी और की सोच से मेल न खाएं, तो हां, ऐसा हो सकता है." हाल ही में भारत और अमेरिका ने व्यापार समझौते पर सहमति का एलान किया. दोनों देशों ने एक फ्रेमवर्क पर सहमति जताई है. इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि भारत ने रूसी तेल ख़रीद रोकने पर सहमति दी है. हालाँकि, भारत की ओर से अब तक इस पर कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है. भारत का कहना है कि वह सारे फ़ैसले अपने हितों को ध्यान में रखते हुए लेता है. बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लाइव पेज पर आपका स्वागत है. मैं बीबीसी संवाददाता सुमंत सिंह अब से दोपहर दो बजे तक आप तक अहम ख़बरें पहुंचाऊंगा. कल के लाइव पेज की ख़बरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. हमारे पेज पर मौजूद कुछ अहम ख़बरों को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें. - बांग्लादेश में बीएनपी की जीत क्या पाकिस्तान के लिए अच्छी ख़बर है? - बांग्लादेश में न संसद है और न स्पीकर, फिर नई सरकार को शपथ कौन दिलाएगा? - मणिपुर में बीजेपी की 'लोकप्रिय सरकार' के बहाल होने से क्यों नाराज़ है कुकी जनजाति? - क्या आप कभी अपने 'एक्स' के साथ दोस्त बन सकते हैं - काबा को ढकने वाले पवित्र 'किसवा' का टुकड़ा क्या जेफ़्री एपस्टीन को भेजा गया था?

स्रोत: BBC Hindi

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