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तालिबान सरकार का दावा- अफ़ग़ानिस्तान में पाकिस्तान के हमले में कई महिलाओं और बच्चों की मौत

✍️ Admin 📅 22 February, 2026 ⏰ 09:02 AM 👁 53 views

अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान सरकार के प्रवक्ता ज़बिहुल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तानी सेना पर अफ़ग़ानिस्तान की सीमा के उल्लंघन का आरोप लगाया है. तालिबान सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तानी सेना के हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित दर्जनों लोग मारे गए हैं और घायल हुए हैं. ज़बिहुल्लाह मुजाहिद ने एक बयान में कहा, "बीती रात पाकिस्तानी सेना ने नांगरहार और पक्तिका प्रांतों में हमारे निर्दोष नागरिकों पर बमबारी की, जिसकी वजह से महिलाओं और बच्चों सहित दर्जनों लोग मारे गए और घायल हुए." उन्होंने कहा, "पाकिस्तानी जनरल अपने देश की सुरक्षा संबंधी कमज़ोरियों की भरपाई ऐसे अपराधों के ज़रिए कर रहे हैं." पाकिस्तान ने कहा है कि उसने ख़ुफ़िया जानकारी के आधार पर पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान सीमा क्षेत्र में 'सात आतंकवादी ठिकानों और शिविरों को निशाना बनाया' है. पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के मुताबिक़, ये हमले फ़ितना अल ख़्वारिज (एफ़एके) से जुड़े पाकिस्तानी तालिबान और उसके सहयोगी संगठनों और इस्लामिक स्टेट ऑफ़ ख़ोरासान प्रांत (आईएसकेपी) के 'आतंकवादी ठिकानों और शिविरों' पर हुए हैं. पाकिस्तान का कहना है कि यह कार्रवाई हाल ही में उसके देश में हुए आत्मघाती हमलों के जवाब में की गई है. एक बयान में कहा गया, "पाकिस्तान के पास पुख़्ता सबूत हैं कि ये आतंकवादी हमले ख़्वारिज ने अपने अफ़ग़ानिस्तान स्थित लीडरशिप और हैंडलर्स के निर्देश पर किए. इन हमलों की ज़िम्मेदारी अफ़ग़ानिस्तान स्थित पाकिस्तानी तालिबान, जो फ़ितना अल ख़्वारिज से जुड़े हैं, उनके सहयोगी संगठनों और इस्लामिक स्टेट ऑफ़ ख़ोरासान प्रांत ने भी ली है." पाकिस्तान ने कहा कि उसने कई बार अफ़ग़ान तालिबान सरकार से कोई ठोस क़दम उठाने की मांग की लेकिन इन समूहों के ख़िलाफ़ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. इसके साथ ही पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान सरकार से मांग की कि वह अपने देश की ज़मीन का इस्तेमाल 'पाकिस्तान के ख़िलाफ़ ख़्वारिज और अन्य आतंकवादियों' को करने से रोके. इमेज स्रोत, Kevin Dietsch/Getty इसराइल में अमेरिका के राजदूत माइक हकाबी ने इसराइल के 'मध्य-पूर्व पर क़ब्ज़े' से जुड़े अपने बयान पर अब सफ़ाई दी है. माइक हकाबी ने दक्षिणपंथी राजनीतिक कार्यकर्ता और टिप्पणीकार टकर कार्लसन को एक इंटरव्यू में कहा था कि इसराइल को 'बाइबल के मुताबिक़ मध्य-पूर्व के बड़े हिस्सों पर क़ब्ज़ा करने का अधिकार है.' उनके इस बयान पर सऊदी अरब, क़तर, जॉर्डन और इस्लामी देशों के संगठन ऑर्गेनाइजे़शन ऑफ़ इस्लामिक को-ऑपरेशन समेत कई देशों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. अब माइक हकाबी ने अपनी सफ़ाई में कहा है कि उन्हें यह उम्मीद नहीं थी कि टकर कार्लसन उनसे ऐसे लंबे सवाल पूछेंगे, जिनमें वह यह संकेत देते नज़र आ रहे थे कि 'आज के यहूदी वास्तव में बाइबल के यहूदियों जैसे नहीं हैं.' उन्होंने कहा, "अश्कनाज़ी यहूदियों के परिवार सदियों तक यूरोप में रहे. ये इसराइल की यहूदी आबादी का अल्पसंख्यक हिस्सा हैं, शायद केवल 35 से 40 प्रतिशत. इसराइल के भीतर सेफ़ारदी और मिज़राही यहूदियों की संख्या कहीं ज़्यादा है." माइक हकाबी ने कहा कि टकर एक ऐसी 'कॉन्सपिरेसी थ्योरी' को आगे बढ़ा रहे थे, जो इंटरनेट और सोशल मीडिया से आया है. हकाबी ने दावा किया कि उन्होंने इस थ्योरी के बारे में कभी नहीं सुना. उन्होंने कहा कि 'बहुत बुरे लोगों ने यहूदियों को अवैध ठहराने' और उनसे उनका इतिहास छीनने के लिए इस थ्योरी का इस्तेमाल हथियार की तरह किया. उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता कि टकर इस विषय पर इतने केंद्रित क्यों थे और मैं यह बिल्कुल नहीं कह रहा कि उन्हें इस 'कॉन्पिरेसी थ्योरी' की उत्पत्ति के बारे में जानकारी थी. मुझे नहीं पता कि उनके मन में क्या है या वह क्या सोच रहे थे." "लेकिन मैं इतना जानता हूं कि यह सोच यहूदियों को बदनाम करने के लिए है और यह पूरी तरह निराधार है." अमेरिकी राजदूत ने कहा कि इस 'कॉन्सपिरेसी थ्योरी' को सोशल मीडिया में उन इस्लामी अकाउंट्स के ज़रिए बढ़ावा दिया जाता है जो 'पाकिस्तान और तुर्की जैसे देशों से संचालित' होते हैं. माइक हकाबी ने यह भी कहा कि जेनेटिक्स यानी आनुवंशिकी के ज़रिए यहूदी अपने वंशजों का पता लगा सकते हैं कि वे कहां-कहां रहते थे. उन्होंने कहा, "आनुवंशिकी और लिखित साहित्य से हमें पता है कि आज के यहूदी अपने वंश को हज़ारों साल पीछे बाइबल के इसराइल और यहूदी समुदाय को खोज सकते हैं." "वे आपस में उतने ही जुड़े हुए हैं, जितना आनुवंशिकी हमें बताती है कि प्राचीन ख़ज़ार साम्राज्य आज के तुर्की में रहने वाले लोगों से जुड़ा है." अमेरिकी राजदूत ने कहा कि अगर टकर कार्लसन इसराइल की उनकी अगली यात्रा में बेन-गुरियन हवाई अड्डे से आगे जाना चाहें, तो उन्हें उन स्थानों को दिखाने में खुशी होगी, जहां 'यहूदी यीशु मसीह के समय से और उससे भी पहले से रहते' आए हैं. संबंधित कहानी: इसराइल में अमेरिकी राजदूत ने मध्य-पूर्व पर ऐसा क्या कहा कि इस्लामी देशों ने जताया विरोध बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लाइव पेज पर आपका स्वागत है. मैं बीबीसी संवाददाता सुमंत सिंह अब से दोपहर दो बजे तक आप तक अहम ख़बरें पहुंचाऊंगा. कल के लाइव पेज की ख़बरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. हमारे पेज पर मौजूद कुछ अहम ख़बरों को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें. - इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट से क्या हुआ हासिल और किन वजहों से याद रखा जाएगा - ट्रंप ने नए टैरिफ़ को 10 से बढ़ाकर 15 फ़ीसदी करने का किया एलान, भारत को कितना देना होगा? - इसराइल में अमेरिकी राजदूत ने मध्य-पूर्व पर ऐसा क्या कहा कि इस्लामी देशों ने जताया विरोध - नामी उद्योगपति नहीं, भारत में आम लोग हर साल करते हैं करोड़ों रुपये दान - युवाओं की एक टोली ने पूर्वांचल के गांवों से क्यों निकाली एक महीने की साइकिल यात्रा?

स्रोत: BBC Hindi

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