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Death

ट्रंप ने ओबामा पर निशाना साधते हुए कहा, 'ईरान के पास तीन साल पहले ही परमाणु हथियार होता'

✍️ Admin 📅 03 March, 2026 ⏰ 09:02 AM 👁 48 views

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान परमाणु समझौते से बाहर निकलने के अपने फै़सले का बचाव किया. उन्होंने कहा कि इस क़दम से तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका गया. ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, "अगर मैंने ओबामा का ईरान परमाणु समझौता (जेसीपीओए) ख़त्म नहीं किया होता, तो ईरान के पास तीन साल पहले ही परमाणु हथियार होता." यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका-इसराइल ने ईरान के साथ युद्ध शुरू कर दिया है. जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ़ एक्शन यानी जेसीपीओए को पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के समय तैयार किया गया था. इसके तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सीमाएं लगाई गई थीं और बदले में प्रतिबंधों में राहत दी गई थी. ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में इस समझौते से अमेरिका को बाहर कर लिया था. ट्रंप ने अपने हालिए पोस्ट में इस समझौते को 'अब तक का सबसे ख़तरनाक समझौता' बताया. उन्होंने कहा कि अगर यह लागू रहता, तो आज दुनिया पूरी तरह अलग होती. उन्होंने लिखा, "आप इसके लिए बराक ओबामा और 'स्लीपी जो' जो बाइडन को ज़िम्मेदार ठहरा सकते हैं." ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा कि अमेरिका और इसराइल के हमले 'मानवीय सिद्धांतों का खुला उल्लंघन' हैं. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "अस्पतालों पर हमले ज़िंदगी पर हमला हैं. स्कूलों पर हमले किसी देश के भविष्य को निशाना बनाते हैं. मरीजों और बच्चों को निशाना बनाना मानवीय सिद्धांतों का साफ़ उल्लंघन है." पेज़ेश्कियान ने कहा, "दुनिया को इसकी निंदा करनी चाहिए. मैं अपने शोक में डूबे देश के साथ खड़ा हूं. ईरान इन अपराधों पर चुप नहीं रहेगा और न ही झुकेगा." ईरानी अधिकारियों के मुताबिक़, ईरान में एक स्कूल पर हुए हवाई हमले में कई बच्चों समेत 153 लोग मारे गए हैं. अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने मध्य पूर्व के कई देशों में रह रहे अपने नागरिकों के लिए एक बयान जारी किया है. इसमें मंत्रालय ने कहा है कि वे हमले के ख़तरे के कारण जितनी जल्दी हो सके वहां से निकल जाएं. इन देशों में बहरीन, मिस्र, ईरान, इराक़, इसराइल, वेस्ट बैंक, ग़ज़ा, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, ओमान, क़तर, सऊदी अरब, सीरिया, संयुक्त अरब अमीरात और यमन शामिल हैं. अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से ये बयान ऐसे समय में जारी किया गया है जब ईरान मध्य पूर्व देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य बेस को निशाना बना रहा है. इसराइल और अमेरिका ने शनिवार को ईरान पर हमला किया था, जिसके बाद से ईरान और इसराइल का एक दूसरे पर हमला जारी है. ओमान की खाड़ी में एक तेल टैंकर पर बम से लैस ड्रोन ने हमला किया. इस हमले में जहाज पर मौजूद एक भारतीय नाविक की मौत हो गई. इस पर मस्कट स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक बयान जारी किया है. भारत के दूतावास ने एमकेडी व्योम जहाज पर भारतीय नागरिक की मौत पर गहरा दुख जताया है. दूतावास ने कहा है कि वह ओमान के स्थानीय अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है, ताकि जहाज पर मौजूद भारतीयों की सुरक्षित और जल्द वापसी सुनिश्चित की जा सके. सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास पर दो ड्रोन से हमला किया गया. दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि इस हमले से हल्की आग लगी और इमारत को मामूली नुक़सान हुआ है. सऊदी अरब में अमेरिकी मिशन ने जेद्दा, रियाद और धहरान में रहने वालों को 'घर में ही सुरक्षित रहने' की सलाह दी है. इससे पहले सोमवार को कुवैत में अमेरिकी दूतावास से या उसके पास से धुआं उठता देखा गया था. इसके बाद दूतावास ने लोगों से कहा कि वे दूतावास न आएं और अपने घर में सुरक्षित रहें. इसराइल और अमेरिका ने शनिवार को ईरान पर हमला किया था, जिसके बाद से ईरान और इसराइल का एक दूसरे पर हमला जारी है. वहीं ईरान मध्य पूर्व देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य बेस को निशाना बना रहा है. बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लाइव पेज पर आपका स्वागत है. मैं बीबीसी संवाददाता इफ़्तेख़ार अली अब से दोपहर दो बजे तक आप तक अहम ख़बरें पहुंचाऊंगा. कल के लाइव पेज की ख़बरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. हमारे पेज पर मौजूद कुछ अहम ख़बरों को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें. - अली रज़ा आराफ़ी कौन हैं जिन्हें ख़ामेनेई की मौत के बाद माना जा रहा है अगला सुप्रीम लीडर - ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कितने ताक़तवर, सेना से कैसे हैं अलग? - होर्मुज़ स्ट्रेट की वजह से क्यों हो रहा है तेल और गैस की क़ीमतों में उछाल, कब तक रहेगा ऐसा - कुवैत में अमेरिका के तीन लड़ाकू विमान किसकी ग़लती से हुए क्रैश?

स्रोत: BBC Hindi

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