पूर्ण संस्करण देखें
⚡ AMP पेज | पूर्ण वेबसाइट देखें
Death

ट्रंप प्रशासन के काउंटरटेररिज़्म सेंटर के पूर्व निदेशक जो केंट ने कहा, 'ईरानी सुप्रीम लीडर को नहीं मारना चाहिए था'

✍️ Admin 📅 19 March, 2026 ⏰ 09:01 AM 👁 53 views

अंग्रेज़ी अख़बार वॉशिंगटन पोस्ट की ख़बर के मुताबिक़ अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन ने राष्ट्रपति भवन से ईरान युद्ध के लिए बड़ी रकम की मांग की है. वॉशिंगटन पोस्ट ने एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के हवाले से बताया है कि पेंटागन ने व्हाइट हाउस से ईरान में युद्ध की वजह से 200 अरब अमेरिकी डॉलर से ज़्यादा की मंज़ूरी देने को कहा है. अख़बार का कहना है कि यह रकम अब तक ईरान में हुए अभियान की लागत से कहीं ज़्यादा होगी, और इसका मक़सद ख़र्च हो चुके ज़रूरी हथियारों का उत्पादन "फौरन" बढ़ाना है. पिछले दो हफ़्तों में पेंटागन की तरफ़ से फंडिंग के लिए कई अलग-अलग अनुरोध "पेश" किए गए हैं. वॉशिंगटन पोस्ट का मानना ​​है कि सबसे ताज़ा अनुरोध "कांग्रेस में एक बड़ी राजनीतिक लड़ाई की वजह बन सकता है." रिपोर्ट लिखे जाने के समय, अमेरिकी रक्षा विभाग और व्हाइट हाउस दोनों ने ही इस मुद्दे पर अख़बार की तरफ से टिप्पणी के अनुरोध को ठुकरा दिया था. इमेज स्रोत, CQ-Roll Call, Inc via Getty Images ट्रंप प्रशासन के काउंटरटेररिज़्म सेंटर के पूर्व निदेशक जो केंट ने कहा है कि ईरान के सुप्रीम लीडर को नहीं मारा जाना चाहिए था. जो केंट ने इसी हफ़्ते ईरान युद्ध को लेकर अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. उन्होंने कंज़र्वेटिव राजनीतिक टिप्पणीकार टकर कार्लसन के साथ इंटरव्यू में यह बात कही है. जो केंट का कहना है कि अमेरिका-इसराइल का वह ऑपरेशन जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अली ख़ामेनेई मारे गए थे, "वह सबसे आख़िरी चीज़ थी, जो हमें करनी चाहिए थी." केंट ने कहा, "अगर आप उन्हें हटा देते हैं, अगर आप उन्हें आक्रामक तरीके से मार देते हैं, तो लोग शासन और अगले आयतुल्लाह के इर्द-गिर्द एकजुट हो जाएँगे, और मुझे लगता है कि हमारे पास मौजूद सभी आंकड़ों के हिसाब से उनके बेटे (मोजतबा ख़ामेनेई) के मामले में भी यही हो रहा है." केंट ने कहा, "ख़ामेनेई की देखरेख में ईरान का परमाणु कार्यक्रम चल रहा था. वो ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोक रहे थे." इससे पहले काउंटरटेररिज्म सेंटर के निदेशक जो केंट ने अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट किए गए एक पत्र में कहा था कि ईरान अमेरिका के लिए तत्काल "कोई ख़तरा" नहीं था. उन्होंने दावा किया कि ट्रंप प्रशासन ने "इसराइल और उसकी शक्तिशाली अमेरिकी लॉबी के दबाव के कारण यह युद्ध शुरू किया." ट्रंप के वरिष्ठ सहयोगी ने ईरान युद्ध के मुद्दे पर छोड़ा पद, राष्ट्रपति बोले- उनका जाना अच्छा है दुनिया के सबसे बड़े ग़ैस फ़ील्ड में शुमार ईरान के साउथ पार्स पर हमले को लेकर अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रतिक्रिया दी है. इस हमले के जवाब में ईरान ने बुधवार रात क़तर के सबसे बड़े एनर्जी क्षेत्र रास लाफ़ान पर हमला किया जिसमें काफ़ी नुक़सान की ख़बरें हैं. ट्रंप ने अपने सोशल ट्रुथ अकाउंट पर लिखा, "मध्य पूर्व में हुई घटनाओं को लेकर ग़ुस्से में इसराइल ने ईरान के साउथ पार्स गैस फ़ील्ड नामक एक बड़े ठिकाने पर हमला किया. पूरे क्षेत्र का केवल एक छोटा हिस्सा ही प्रभावित हुआ है. अमेरिका को इस ख़ास हमले की कोई जानकारी नहीं थी और क़तर का इससे किसी भी तरह का कोई लेना देना नहीं था, न ही उसे इस हमले की पहले से कोई जानकारी थी." "दुर्भाग्य से, ईरान को इन तथ्यों की जानकारी नहीं थी और उसने बिना उचित कारण के क़तर के एलएनजी गैस ठिकाने के एक हिस्से पर हमला कर दिया. अब इस बेहद अहम और क़ीमती साउथ पार्स फ़ील्ड पर इसराइल की ओर से कोई और हमला नहीं किया जाएगा, जब तक कि ईरान कोई अविवेकपूर्ण क़दम उठाते हुए एक निर्दोष देश क़तर पर हमला नहीं करता." ट्रंप ने लिखा, "ऐसी स्थिति में, अमेरिका, इसराइल की मदद या सहमति के साथ या बिना उसके भी, साउथ पार्स गैस फ़ील्ड को पूरी ताक़त के साथ नष्ट कर देगा, ऐसी ताक़त के साथ जिसे ईरान ने पहले कभी नहीं देखा होगा." मैं इस स्तर की हिंसा और तबाही को मंजूरी नहीं देना चाहता, क्योंकि इसके ईरान के भविष्य पर लंबे समय तक असर होंगे. लेकिन अगर क़तर के एलएनजी ठिकाने पर फिर हमला होता है, तो मैं ऐसा करने में हिचकिचाऊंगा नहीं." फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने वाले हमलों पर "रोक" लगनी चाहिए. उन्होंने ईरान और क़तर में गैस उत्पादन वाले इलाक़ों पर कई हमलों की ख़बर आने के बाद ऐसा कहा. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में, मैक्रों ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और क़तर के अमीर से बात की. उन्होंने कहा, “यह साझा हित में है कि हमलों को बिना किसी देरी के रोका जाए, ख़ासकर ऊर्जा और पानी की सप्लाई वाली सुविधाओं पर." उन्होंने कहा, "नागरिक आबादी और उनकी बुनियादी ज़रूरतें, साथ ही ऊर्जा सप्लाई की सुरक्षा को सैन्य संघर्ष से बचाया जाना चाहिए." इससे पहले क़तर ने ईरान को इलाक़े के लिए प्रत्यक्ष ख़तरा बताया. क़तर का कहना है कि रास लफ़ान औद्योगिक शहर पर हुए मिसाइल हमले देश की सुरक्षा और क्षेत्र की स्थिरता के लिए ख़तरा है. क़तर की पेट्रोलियम कंपनी ने कहा है कि मिसाइल हमलों से उसे काफ़ी नुक़सान हुआ है. इमेज स्रोत, Bill Clark/CQ-Roll Call, Inc via Getty Images अमेरिकी ख़ुफ़िया विभाग की प्रमुख तुलसी गबार्ड ने कहा है कि ख़ुफ़िया व्यवस्था से जुड़े लोगों के आकलन के मुताबिक़ रूस, चीन, नॉर्थ कोरिया, ईरान और पाकिस्तान कई तरह के नए, एडवांस या पारंपरिक मिसाइल डिलीवरी सिस्टम पर रिसर्च और डेवलपमेंट कर रहे हैं. गबार्ड ने कहा, "इन मिसाइलों में न्यूक्लियर और पारंपरिक पेलोड लगे होते हैं, जो हमारे देश को अपनी ज़द में ले सकते हैं. ख़ुफ़िया तंत्र का आकलन है कि इससे देश के लिए ख़तरा सामूहिक रूप से बढ़ेगा और साल 2035 तक ऐसी मिसाइलों की संख्या मौजूदा अनुमानित 3 हज़ार से बढ़कर 16 हज़ार से ज़्यादा तक पहुँच जाएगी." तुलसी गबार्ड ने अमेरिकी सीनेट की सिलेक्ट इंटेलीजेंस कमेटी में सुनवाई के दौरान ये बयान दिया. उन्होंने आगे कहा, "पाकिस्तान की लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल डेवलपमेंट में संभावित रूप से ऐसी आईसीबीएम भी शामिल हो सकती है, जिसकी मारक क्षमता हमारे देश (अमेरिका) तक भी हो सकती है." उन्होंने कहा, "ईरान ने पहले भी स्पेस लॉन्च और दूसरी ऐसी तकनीक का प्रदर्शन किया है, जिसका इस्तेमाल करके वह साल 2035 से पहले एक सैन्य रूप से सक्षम आईसीबीएम बनाना शुरू कर सकता है. बशर्ते वह इस दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश करे." तुलसी गबार्ड ने भारत में ऐसा क्या कहा कि बांग्लादेश हुआ ख़फ़ा बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लाइव पेज पर आपका स्वागत है. मैं बीबीसी संवाददाता चंदन कुमार जजवाड़े अब से दोपहर दो बजे तक आप तक अहम ख़बरें पहुंचाऊंगा. कल के लाइव पेज की ख़बरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. हमारे पेज पर मौजूद कुछ अहम ख़बरों को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें. ईरान ने की इंटेलिजेंस मिनिस्टर इस्माइल ख़ातिब की मौत की पुष्टि, राष्ट्रपति बोले-'कायराना हत्या' अली लारिजानी की मौत से गहराया ईरान में लीडरशिप का संकट 'पढ़ाई पूरी करके वापस आने वाला था': मध्य प्रदेश के गुरकीरत की कनाडा में हुई हत्या

स्रोत: BBC Hindi

📤 शेयर करें: