पूर्ण संस्करण देखें
⚡ AMP पेज | पूर्ण वेबसाइट देखें
Death

अमेरिका की नज़र ईरान के खार्ग द्वीप पर क्यों है?

✍️ Admin 📅 27 March, 2026 ⏰ 07:20 PM 👁 47 views

इमेज स्रोत, Gallo Images/Orbital Horizon/Copernicus Sentinel Data 2024/Getty अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खार्ग द्वीप पर आगे भी सैन्य कार्रवाई करने की चेतावनी दी है. यह छोटा द्वीप ईरान के तट के नज़दीक स्थित है, जहां बड़े तेल भंडार हैं. खार्ग को आर्थिक तौर पर ईरान की जीवनरेखा भी माना जाता है. 13 मार्च को ऐसी ख़बरें आईं कि अमेरिकी सेना ने खार्ग द्वीप पर बमबारी की. उस समय ट्रंप ने कहा था कि वहां के सैन्य ठिकाने "पूरी तरह नष्ट" कर दिए गए हैं, हालांकि अमेरिकी सेना ने खार्ग के तेल ठिकानों को निशाना बनाने से परहेज़ किया था. अमेरिकी न्यूज़ आउटलेट एक्ज़िओस ने शुक्रवार को इस मामले की जानकारी रखने वाले चार सूत्रों के हवाले से बताया कि ट्रंप प्रशासन खार्ग पर क़ब्ज़ा करने या उसकी नाकाबंदी करने की योजना पर विचार कर रहा है. इसका मक़सद ईरान पर दबाव बनाना है, जिससे कि वह होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोल दे. बीबीसी हिन्दी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें होर्मुज़ दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जो ईरान के तट के दक्षिण में स्थित है. व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बीबीसी से कहा, "अमेरिकी सेना किसी भी समय खार्ग द्वीप को अपने क़ब्ज़े में ले सकती है." उन्होंने यह भी जोड़ा कि ट्रंप का कहीं भी सैनिक भेजने का कोई इरादा नहीं है, लेकिन "कमांडर-इन-चीफ़ के तौर पर उनके पास सभी विकल्प खुले हैं." ट्रंप पहले भी चेतावनी दे चुके हैं कि अगर ईरान या कोई अन्य पक्ष होर्मुज़ से जहाज़ों के सुरक्षित गुज़रने में दख़ल देता है, तो वह खार्ग द्वीप के तेल ठिकानों को निशाना न बनाने के फ़ैसले पर दोबारा विचार करेंगे. इसके बाद से ईरान ने होर्मुज़ से गुजरने की कोशिश करने वाले कुछ जहाज़ों पर हमला करने की धमकी जारी रखी है. स्कूल ऑफ़ वॉर पॉडकास्ट के होस्ट और सीबीएस के राष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषक एरन मैकलीन ने कहा कि अमेरिका की सोच यह हो सकती है कि खार्ग पर क़ब्ज़ा कर उसका इस्तेमाल ईरान को होर्मुज़ स्ट्रेट खुला रखने के लिए "दबाव बनाने के लिए" किया जा सके. ईरान की सेना ने कहा है कि अगर खार्ग के तेल ठिकानों पर हमला हुआ, तो अमेरिका के साथ काम करने वाली कंपनियों के तेल और ऊर्जा इन्फ़्रास्ट्रक्चर को "तुरंत तबाह" कर दिया जाएगा. इमेज स्रोत, Chip Somodevilla/Getty मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ. कुछ समय से यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या अमेरिकी सेना किसी स्थिति में खार्ग द्वीप पर क़ब्ज़ा करने की कोशिश करेगी. खार्ग पर क़ब्ज़ा न केवल ईरान के तेल निर्यात को रोक सकता है, बल्कि यह उसकी मुख्य ज़मीन पर हमला करने के लिए एक प्लेटफॉर्म भी बन सकता है. बीबीसी के अमेरिकी मीडिया पार्टनर सीबीएस न्यूज़ को सूत्रों ने बताया कि पेंटागन के अधिकारियों ने ईरान में ज़मीनी बल तैनात करने की विस्तार से तैयारी कर रखी है. इन अटकलों को और बल देते हुए, रॉयटर्स समाचार एजेंसी ने बताया कि अमेरिकी सेना क़रीब 2,500 मरीन सैनिकों और युद्धपोत को क्षेत्र में तैनात करने की तैयारी कर रही है. पेंटागन और व्हाइट हाउस, दोनों ने सैनिकों की विशेष तैनाती या ऐसी संभावित योजनाओं पर टिप्पणी करने से इनकार किया है. हालांकि बार-बार यह स्पष्ट किया गया है कि ये विकल्प खुले हुए हैं. बीबीसी की सिक्योरिटी ब्रीफ़ से जुड़े सुरक्षा विश्लेषक मिकी के का कहना है कि खार्ग द्वीप पर क़ब्ज़ा करने से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) की आर्थिक जीवनरेखा कट जाएगी, जिससे उसकी युद्ध लड़ने की क्षमता प्रभावित होगी. मैकलीन के मुताबिक़, द्वीप पर क़ब्ज़ा करने का कोई भी अमेरिकी ऑपरेशन अपेक्षाकृत छोटा होगा, लेकिन चुनौतीपूर्ण रहेगा. अमेरिकी लैंडिंग फ़ोर्स को लंबी दूरी तय करनी होगी, चाहे वह नौसैनिक जहाज़ों के जरिए हो या हवाई अभियान के तहत. बुधवार को ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाग़ेर ग़ालिबाफ़ ने चेतावनी दी कि किसी भी हमले का जवाब "लगातार और बिना रुके हमलों" से दिया जाएगा. इन हमलों में मध्य-पूर्व के उन देशों के "महत्वपूर्ण ठिकानों" को निशाना बनाया जाएगा जो अमेरिकी अभियान में मदद करेंगे. इससे पहले, एक ईरानी सैन्य अधिकारी ने स्थानीय मीडिया से कहा था कि ज़मीनी हमले की स्थिति में लाल सागर में जहाज़ों को निशाना बनाया जाएगा. सीएनएन के मुताबिक़, हाल के हफ़्तों में ईरान ने खार्ग द्वीप पर अपनी सुरक्षा मज़बूत की है, जिसमें अतिरिक्त सैन्य बल और एयर डिफ़ेंस सिस्टम तैनात करना शामिल है. वेबसाइट ने "अमेरिकी ख़ुफ़िया विभाग से परिचित कुछ लोगों" के हवाले से बताया कि ईरान ने खार्ग पर कंधे से दागी जाने वाली और ज़मीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलें भी भेजी हैं और इसके आसपास के जलक्षेत्र में एंटी-पर्सनल और एंटी-आर्मर माइन्स भी बिछाई हैं. खार्ग द्वीप ईरान के तट से महज़ 15 नॉटिकल मील (24 किलोमीटर) दूर एक छोटा पथरीला द्वीप है. अपने छोटे आकार के बावजूद, यह ईरान के ऊर्जा इन्फ़्रास्ट्रक्चर का सबसे अहम हिस्सा है. उत्तरी खाड़ी में स्थित इस छोटे लेकिन अहम द्वीप पर अमेरिका का हमला करना ईरान की अर्थव्यवस्था की मुख्य नस पर चोट करने जैसा है. ईरान के कच्चे तेल का 90 फ़ीसद हिस्सा इसी द्वीप पर स्थित टर्मिनल से आता है. इस तेल को मुख्य भूमि से पाइपलाइन के जरिए लाया जाता है. ट्रंप ने ख़ास तौर पर इन पाइपलाइनों को निशाना बनाने की संभावना का ज़िक्र किया है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि अब तक उन्होंने ऐसा करने से परहेज़ किया है, जिससे कि ईरान की अर्थव्यवस्था को लंबे समय के लिए नुक़सान न पहुंचे. 16 मार्च को ट्रंप ने कहा, "हम इसे पांच मिनट के नोटिस पर कर सकते हैं और यह नष्ट हो जाएगा." उन्होंने कहा, "सिर्फ़ मुझे कहना है और पाइपलाइन भी ख़त्म हो जाएंगी. लेकिन उन्हें दोबारा बनाने में लंबा समय लगेगा." खार्ग द्वीप के घाटों में 8.5 करोड़ गैलन तक की क्षमता वाले बहुत बड़े टैंकर आ सकते हैं और यहां तेल लोड कर सकते हैं. इसका तट गहरे पानी के क़रीब है, जो कि मुख्य भूमि के उथले तट से अलग है. यहां लोड होने के बाद ये टैंकर खाड़ी से होकर वापस आते हैं और होर्मुज़ स्ट्रेट के ज़रिए बाहर निकलते हैं. यहां से वे चीन जाते हैं, जो कि ईरानी तेल का मुख्य ख़रीदार है. ईरानी तेल के निर्यात का केंद्र होने के कारण यह द्वीप इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के लिए आमदनी का बड़ा स्रोत है. इमेज स्रोत, Ali Mohammadi/Bloomberg via Getty 13 मार्च को ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने "मध्य-पूर्व के इतिहास की सबसे ताक़तवर बमबारी में से एक को अंजाम दिया और ईरान के सबसे अहम ठिकाने खार्ग द्वीप पर स्थित हर सैन्य लक्ष्य को पूरी तरह नष्ट कर दिया." ट्रंप ने यह भी कहा कि "शालीनता के कारण" उन्होंने द्वीप के तेल ठिकानों को नष्ट नहीं करने का विकल्प चुना. सेंटकॉम ने कहा कि अमेरिकी सेना ने "खार्ग द्वीप पर 90 से ज़्यादा ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जबकि तेल से जुड़े इन्फ़्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित रखा." सेंटकॉम ने कहा कि उसने नौसैनिक माइन स्टोरेज, मिसाइल स्टोरेज बंकरों और कई अन्य सैन्य ठिकानों को नष्ट कर दिया. ईरान के सरकारी मीडिया ने कहा कि द्वीप की तेल सुविधाओं को कोई नुक़सान नहीं पहुंचा. ईरान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी फ़ार्स ने बताया कि अमेरिकी हमलों में एयर डिफ़ेंसेस, एक नौसैनिक अड्डा, एक एयरपोर्ट के कंट्रोल टावर और हेलीकॉप्टर हैंगर को निशाना बनाया गया. दक्षिणी ईरान के बुशहर प्रांत के गवर्नर के राजनीतिक उप प्रमुख एहसान जहानियान ने कहा कि खार्ग से तेल निर्यात की प्रक्रिया "पूरी तरह जारी" है और "बिना किसी रुकावट के चल रही है." यह जानकारी आईआरजीसी से जुड़ी तस्नीम समाचार एजेंसी की रिपोर्ट में दी गई. हमलों के बाद, देश की सेना ने चेतावनी दी कि अगर उसके ऊर्जा इन्फ़्रास्ट्रक्चर पर हमला हुआ तो अमेरिका के साथ काम करने वाली कंपनियों के तेल और ऊर्जा इन्फ़्रास्ट्रक्चर को "तुरंत नष्ट कर राख में बदल दिया जाएगा." खार्ग द्वीप के इन्फ़्रास्ट्रक्चर को नष्ट करने की सैन्य कार्रवाई ईरान के लिए बेहद नुक़सानदेय होगी. इससे वैश्विक तेल की क़ीमतें और तेज़ी से बढ़ सकती हैं और ईरान को मध्य-पूर्व में और ज़्यादा ऊर्जा इन्फ़्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने के लिए उकसा सकती हैं. युद्ध के तीन हफ़्ते बाद भी ईरान के पास कम लागत वाले और बड़ा विस्फ़ोट करने वाले ड्रोन्स को बड़ी संख्या में लॉन्च करने की क्षमता है, जिन्हें वह खाड़ी के अरब पड़ोसियों और समुद्री जहाज़ों के ख़िलाफ़ इस्तेमाल कर सकता है. संभव है कि ईरान अपने हमलों का दायरा बढ़ा सकता है और लाखों लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराने वाले डिसैलिनेशन प्लांट्स से जुड़े महत्वपूर्ण इन्फ़्रास्ट्रक्चर को नुक़सान पहुंचा सकता है. बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित. (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हॉट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

स्रोत: BBC Hindi

📤 शेयर करें: