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LPG Gas Crisis: अमेरिका-ईरान युद्ध ने बढ़ाया सिरदर्द! LPG नहीं मिली तो केरोसिन के चूल्हे पर खाना बनवा रहे ढाबा मालिक

✍️ Admin 📅 29 March, 2026 ⏰ 02:51 PM 👁 37 views

US-Iran जंग ने Strait of Hormuz की राह रोक दी और विश्व के साथ भारत के भी कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई को तरह ठप कर दिया है. सरकार के सख्त निर्देशों के बाद घरेलू सिलेंडर किसी तरह प्राथमिकता में हैं, लेकिन होटल-ढाबों वाले जो 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं सबसे ज्यादा परेशानियां उनको हो रही हैं. 

कनॉट प्लेस की हलचल भरी शंकर मार्केट में एक साधारण ढाबा अब पुराने जमाने के केरोसिन वाले चूल्हे पर खाना पका रहा है. ढाबे के मालिक विशाल ने एबीपी न्यूज से बात करते हुए कहा, हम किसी तरह गुजारा कर रहे हैं. दो मजदूर हैं, उनका परिवार भी इसी दुकान से चलता है और हमारा भी. बीते दिनों गैस न मिलने से पूरी दुकान एक हफ्ते तक बंद रही थी. अब जाकर मजबूरी में केरोसिन का चूल्हा लाया हूं.

केरोसिन के चूल्हे को लेकर क्या बताया
विशाल ने केरोसिन से चलने वाले चूल्हा की जानकारी देते हुए बताया कि इस चूल्हे को दो किस्म के केरोसिन से चलाया जा सकता है दो सफेद और नीला. नीला वाला ज्यादा देर चलता है लेकिन ये महंगा आता है. सफेद वाला सस्ता आता तो जरूर है मगर ये बहुत जल्दी खत्म हो जाता है. अगर मैंने महंगा वाला केरोसिन ले लिया तो खाने के दाम इतने बढ़ जाएंगे कि जो थोड़ा-बहुत बिक रहा है वो भी बिकना बंद हो जाएगा क्यों कि कोई खरीदेगा नहीं इतना महंगा. इसलिए सफेद वाला केरोसिन से ही काम चला रहे हैं. उन्होंने बताया कि सफेद वाला केरोसिन पहले 100-120 रुपये लीटर में आसानी से मिल जाता था, अब उसके भी दाम बढ़ गए हैं. अब ये डेढ़ सौ के पार पहुंच गया है. केरोसिन से चलने वाले चूल्हे भी महंगे हो चुके है, पहले ये चूल्हे दो-ढाई हजार में आसानी से मिल जाते थे.

4 घंटे से भी ज्यादा लग रहा समय
उन्होंने आगे बताया कि केरोसिन से चलने वाले चूल्हे ले तो लिए हैं लेकिन हमारी समस्या अभी भी कम नहीं हुई है क्योंकि इन पर खाना पकाने में काफी समय लगता है और इसकी वजह से हमने अपना मेन्यू भी आधा कर दिया. हमने ढाबे पर रोटी-परांठे तो बंद कर दिए हैं, अब सिर्फ राजमा-चावल, कढ़ी-चावल और छोले-चावल बेच रहे हैं. पहले गैस सिलेंडर पर खाना दो-ढाई घंटे में तैयार हो जाता था लेकिन अब सुबह 4 बजे उठना पड़ता है और दोपहर 12-1 बजे तक माल बनता रहता है, अब कुल 4 घंटे से ज्यादा का समय लग रहा है.

डीजल वाला चूल्हा क्यों नहीं लिया
डीजल से चलने वाले चूल्हे पर बात करते हुए विशाल ने बताया कि डीजल वाला चूल्हा उन्होंने इसलिए नहीं लिया क्यों कि इस समय डीजल वाले चूल्हे की कीमत आसान छू रही है. विशाल ने बोला कि उसकी कीमत 22,000 से शुरू होकर 80,000 तक जा रही है. इतना महंगा कैसे लूं? इतनी हमारी कमाई भी नहीं है. इसके साथ ही एलपीजी गैस सिलेंडर पर विशाल ने कहा कि अभी तक तो मुझे गैस सिलेंडर मिलने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है.

स्रोत: ABP Hindi

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