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अगर अमेरिका नेटो से हटा तो तुर्की को यह फ़ायदा होगा

✍️ Admin 📅 03 April, 2026 ⏰ 04:45 PM 👁 46 views

इमेज स्रोत, Omar Marques/Getty Images अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल में कुछ ऐसे बयान दिए थे, जिनमें अमेरिका के नेटो से निकलने की बात की गई थी. ट्रंप के इन बयानों की तुर्की में ख़ासी चर्चा छेड़ दी है. कई विश्लेषकों का मानना है कि अगर नेटो के लिए अमेरिका की प्रतिबद्धता कमज़ोर होती है तो इससे तुर्की को गठबंधन में अपनी भूमिका मज़बूत करने का मौका मिल सकता है. तुर्की की सत्तारूढ़ जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी (एकेपी) के पूर्व सांसद एमिन सिरीन सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, ''अगर अमेरिका बाहर निकलता है, तो यह तुर्की के लिए अपनी दिशा बदलने का ऐतिहासिक अवसर होगा. उनके मुताबिक़, तुर्की यूरोपीय सुरक्षा का एक प्रमुख स्तंभ बन सकता है.'' सरकार समर्थक सीएनएन तुर्क ने 1 अप्रैल को सवाल उठाया कि अगर अमेरिका नेटो से हटता है, तो क्या इस गठबंधन का पुनर्गठन होगा और इससे किसे फ़ायदा होगा. कुछ रिपोर्टों में 7–8 जुलाई को अंकारा में होने वाले नेटो शिखर सम्मेलन को बेहद अहम बताया गया है. यह संगठन के भविष्य और उसमें तुर्की की भूमिका तय कर सकता है. इमेज स्रोत, Roberto Schmidt/Getty Images सरकार समर्थक अख़बार हुर्रियेत ने 2 अप्रैल की अपनी प्रमुख हेडलाइन में कहा कि यह शिखर सम्मेलन नेटो की किस्मत तय करेगा. अख़बार के मुताबिक़, यह मंच नेटो में तुर्की की स्थिति को फिर से मजबूत करने का मौका देगा और मेजबान होने के कारण तुर्की की भूमिका ब्लैक सी, भूमध्य सागर और मध्य पूर्व की सुरक्षा में और बढ़ सकती है. वहीं, सीएनएन तुर्की की वेबसाइट ने 2 अप्रैल को सवाल किया, "क्या संकट का समाधान अंकारा में होगा?" दूसरी ओर, विपक्ष समर्थक अख़बार सोज़कु ने चेतावनी दी कि ट्रंप जुलाई शिखर सम्मेलन में नेताओं के ख़िलाफ़ 'कड़ी भाषा' का इस्तेमाल करके नेटो को "ऐसे रास्ते पर ले जा सकते हैं, जहां से वापसी शायद मुश्किल हो." ट्रंप की हालिया टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब तुर्की और नेटो के बीच नई सहयोग योजनाओं की ख़बरें सामने आई हैं. इनमें एक बहुराष्ट्रीय नेटो (एमएनसी-टीयूआर) की स्थापना भी शामिल है. इनमें नेटो की तुर्की में एक नई मल्टीनेशनल कोर की स्थापना की बात है जिसे एमएनसी-टीयूआर कहा जा रहा है. सरकार समर्थक तुर्की मीडिया ने इन योजनाओं को नेटो में तुर्की के असर को बढ़ाने के तौर पर पेश किया है. अंतरराष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक सिहान गुनयेल 1 अप्रैल को सीएनएस तुर्क से कहा, ''हम मध्य पूर्व में तुर्की के बढ़ते क्षेत्रीय प्रभाव को देख रहे हैं. यह यूरोपीय सुरक्षा ढांचे में नेटो का एक अहम सुरक्षा तत्व बन चुका है." उन्होंने एमएनसी-टीयूआर योजना का स्वागत किया. मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ. हुर्रियेत की पत्रकार हांदे फिरात ने कहा कि एमएनसी-टीयूआर की स्थापना इस बात का संकेत है कि संकट के समय तुर्की 'सिर्फ़ मेजबान देश ही नहीं, बल्कि नेटो की जमीनी सेनाओं का कमांडर" भी बन सकता है.' उन्होंने दो अप्रैल को लिखा, "तुर्की नेटो में रहकर उसकी दिशा को प्रभावित कर सकता है. ब्लैक सी की रक्षा करना, लेकिन क्षेत्रीय नेतृत्व भी बनाए रखना, यह सब तुर्की की जियो-पॉलिटिकल इच्छा शक्ति की घोषणा है." सरकार समर्थक तुर्की के कॉलमिस्ट युसेल कोक ने भी कहा कि नेटो अभ्यास में तुर्की ने 'अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन' किया है. उन्होंने लिखा, "सच्चाई यह है कि जैसे यूरोप और नेटो को तुर्की की जरूरत है, वैसे ही तुर्की को भी नेटो या ऐसे मज़बूत गठबंधनों की ज़रूरत है. ख़ासकर ऐसे समय में जब दुनिया एक बड़े युद्ध की ओर बढ़ती दिख रही है." दूसरी ओर, विपक्ष समर्थक कमहुरियेत के कॉलमिस्ट बरिस तर्कोग्लू ने तर्क दिया कि एमएनसी-टीयूआर योजना को रूस के ख़िलाफ़ 'आक्रामक कदम' के रूप में देखा जा सकता है. उनके मुताबिक़, यह संकेत है कि तुर्की नेटो के साथ 'अपने रिश्तों को फिर से मजबूत' कर रहा है. उन्होंने 2 अप्रैल को लिखा, ''कुछ समय तक नेटो सहयोगियों से दूरी बनाने के बाद, तुर्की अब जानबूझकर 'न्यू ओल्ड एक्सिस' की ओर बढ़ रहा है, जहां वह अपनी ज़मीन एक ऐसे बहुराष्ट्रीय कोर के लिए खोल रहा है जो रूस को दुश्मन मानता है." इमेज स्रोत, Dursun Aydemir/Anadolu via Getty Images हाल के हफ़्तों में नेटो में तुर्की की भूमिका और भी चर्चा में आई है, ख़ासकर तब जब नेटो की रक्षा प्रणालियों ने उन बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया, जिनके बारे में बताया जा रहा है वे ईरान से दागी गई थीं. मार्च में रिसर्च कंपनी मेट्रोपोल के एक सर्वे के मुताबिक़, तुर्की में 61 फ़ीसदी लोगों का मानना है कि देश की सुरक्षा में नेटो की भूमिका 'अहम' है जबकि 27 फ़ीसदी से ज्यादा लोगों ने इसे 'महत्वपूर्ण नहीं' बताया है. पिछले महीने ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा था, "उम्मीद है कि चीन, फ़्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और दूसरे देश जहाज़ भेजेंगे ताकि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को ऐसे देश से ख़तरा न हो, जो पूरी तरह ख़त्म हो चुका है." ट्रंप ने चेतावनी दी थी, "अगर दूसरे देशों से कोई जवाब नहीं आता है तो यह नेटो के भविष्य के लिए बहुत बुरा हो सकता है क्योंकि यूरोपीय सहयोगियों के प्रति अमेरिका बहुत नरम रहा है." अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे कहा, "हमें यूक्रेन की मदद करना ज़रूरी नहीं था. यूक्रेन हमसे हज़ारों मील दूर है... लेकिन हमने उनकी मदद की. अब हम देखेंगे कि क्या वे हमारी मदद करते हैं. क्योंकि मैं लंबे समय से कहता आया हूं कि हम उनके लिए खड़े रहेंगे, लेकिन वे हमारे लिए खड़े नहीं रहेंगे. और मुझे यक़ीन नहीं है कि वे खड़े होंगे." ट्रंप ने कहा कि दो हफ़्ते पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री अपने दो विमानवाहक पोत होर्मुज़ भेजने से हिचकिचा रहे थे. बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हॉट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

स्रोत: BBC Hindi

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