ईरान ने इन देशों से की युद्ध में हुए नुक़सान की भरपाई की मांग
इमेज स्रोत, CHARLY TRIBALLEAU / AFP via Getty Images ईरान ने अपने पड़ोसी देशों सऊदी अरब, यूएई, क़तर, बहरीन और कुवैत से जंग में हुए नुक़सान की भरपाई की मांग की गई है. ईरान के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत अमीर सईद इरवानी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को एक पत्र भेजा है. इस पत्र में कहा गया है कि इन पांच देशों ने अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन किया और अब इन्हें ईरान को हुए नुक़सान की पूरी भरपाई करनी चाहिए. बीबीसी फ़ारसी के मुताबिक़, ईरानी राजदूत अमीर सईद इरवानी के लिखे गए पत्र को न्यूज़ एजेंसी आईआरएनए ने प्रकाशित किया है. पत्र में लिखा है, "इन पांच देशों ने अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन किया है और ईरान के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियों को पूरा नहीं किया है. इसलिए अब उनकी अंतरराष्ट्रीय ज़िम्मेदारी तय हो चुकी है." "इन्हें ईरान को हुए सभी नुक़सान की पूरी भरपाई करनी चाहिए, जिसमें भौतिक और मानसिक दोनों तरह के नुक़सान शामिल हैं." यह पहली दफ़ा नहीं है जब ईरान ने इस तरह की मांग की है. इससे पहले ईरान ने अमेरिका से भी युद्ध में हुए नुक़सान का मुआवज़ा मांगा था. इमेज स्रोत, Lintao Zhang/Getty Images पाकिस्तान का कहना है कि ईरान और अमेरिका के बीच जल्द ही बातचीत का अगला दौर शुरू हो सकता है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने कहा है कि युद्धविराम जारी रहने और सकारात्मक हालात को देखते हुए ईरान और अमेरिका के बीच अगली बातचीत जल्द होने की उम्मीद है. बीबीसी फ़ारसी के मुताबिक़, सोमवार को इस्लामाबाद में संसद भवन के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए आसिफ़ ने कहा, "हाल की बातचीत के बाद संतोषजनक माहौल है और अब तक कोई नकारात्मक स्थिति सामने नहीं आई है." उन्होंने आगे कहा, "सामान्य हालात ही देखे गए हैं और इसे इस बात का संकेत माना जाए कि कूटनीतिक कोशिशें सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं." इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कहा था कि दोनों पक्षों के बीच हुए युद्धविराम ने आगे बढ़ने की उम्मीदें जगाई है. गौरतलब है कि बातचीत का पहला दौर पाकिस्तान के इस्लामाबाद में रखा गया था, इसमें ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधि शामिल हुए, लेकिन यह बेनतीजा रही थी. इमेज स्रोत, Burak Kara/Getty Images ईरान और अमेरिका के बीच दूसरे दौर की बातचीत को लेकर कयास जारी हैं. इसी बीच ईरान ने पांच साल तक यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) रोकने का प्रस्ताव दिया है, लेकिन अमेरिका ने इसे ठुकरा दिया और 20 साल तक रोकने की मांग की है. यह जानकारी न्यूयॉर्क टाइम्स ने ईरानी और अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में हुई बातचीत के दौरान अमेरिका और ईरान ने परमाणु गतिविधियों को रोकने के अलग-अलग प्रस्ताव दिए, लेकिन दोनों के बीच समझौते पर सहमति नहीं बन सकी. हालांकि, चर्चा से यह संकेत मिलता है कि शांति समझौते की संभावना अब भी बनी हुई है और दूसरे दौर की बातचीत हो सकती है. बीबीसी ने इस पर टिप्पणी के लिए व्हाइट हाउस से संपर्क किया है. अमेरिका मानता रहा है कि ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाएं इस विवाद का बड़ा कारण रही हैं. रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी दोहराया कि अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके. इमेज स्रोत, Jonathan Ernst-Pool/Getty Images अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि ईरानी शासन 'आर्थिक आतंकवाद' कर रहा है, क्योंकि उसने होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रने वाले जहाज़ों को रोक दिया है. जेडी वेंस ने फ़ॉक्स न्यूज़ से कहा, "राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिखा दिया है कि ये खेल दोनों तरफ़ से खेला जा सकता है." उन्होंने कहा, "अगर ईरान आर्थिक आतंकवाद करेगा तो अमेरिका इस सिद्धांत पर चलेगा कि कोई भी ईरानी जहाज़ बाहर नहीं जा पाएगा." जेडी वेंस ने इस्लामाबाद में ईरान से हुई बातचीत के बाद कहा है, "काफ़ी प्रगति हुई है, अब गेंद ईरान के पाले में है." वेंस ने कहा, "ईरान को फ़्लेक्सिबल होना होगा और अमेरिका की ज़रूरी मांगों को मानना होगा. ईरान के संवर्धित यूरेनियम पर अमेरिका का नियंत्रण होना चाहिए. साथ ही एक जांच व्यवस्था हो जो यह सुनिश्चित करे कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके." गौरतलब है कि जेडी वेंस उस बातचीत का भी हिस्सा रहे थे जो पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ईरान से हुई थी. हालांकि, यह बेनतीजा रही और दोनों देशों ने बाद में एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए. संबंधित कहानी: अमेरिका होर्मुज़ की नाकाबंदी को तैयार, ट्रंप की धमकी- ईरानी जहाज़ों को ख़त्म कर देंगे इमेज स्रोत, Will Oliver/EPA/Bloomberg via Getty Images अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में मंगलवार को लेबनान और इसराइल के राजदूतों की बैठक होनी है. इस बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो शामिल होंगे. इसराइल के अमेरिका में राजदूत येचिएल लीटर और लेबनान की अमेरिका में राजदूत नदा हमादेह मोवाद, रुबियो के साथ विदेश मंत्रालय में बातचीत करेंगे. इस बातचीत का मक़सद दक्षिणी लेबनान में चल रहे संघर्ष को ख़त्म करना है. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इन हमलों से लाखों लोग घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं. 2,000 से ज़्यादा लोग मारे गए और 6,500 से ज़्यादा घायल हुए हैं. दूसरी ओर, सोमवार को हिज़्बुल्लाह नेता नाइम क़ासिम ने लेबनान से इसराइल के साथ होने वाली इस बैठक को रद्द करने की अपील की. हिज़्बुल्लाह इसराइल के साथ सीधे बातचीत के विचार को ख़ारिज करता है. बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लाइव पेज पर आपका स्वागत है. मैं बीबीसी संवाददाता रौनक भैड़ा अब से दोपहर दो बजे तक आप तक अहम ख़बरें पहुंचाऊंगा. कल के लाइव पेज की ख़बरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. - अमेरिका होर्मुज़ की नाकाबंदी को तैयार, ट्रंप की धमकी- ईरानी जहाज़ों को ख़त्म कर देंगे - होर्मुज़ स्ट्रेट की नाकाबंदी कर देने से ईरान पर क्या कोई असर पड़ेगा - ट्रंप की होर्मुज़ स्ट्रेट को बंद करने की धमकी से क्या भारत की मुश्किलें बढ़ेंगी? - फ़ारस की खाड़ी जितना तेल और गैस दुनिया में कहीं और क्यों नहीं है - नोएडा की सड़कों पर श्रमिकों के उतरने के बाद तोड़फोड़, प्रशासन का मांगें पूरी करने का वादा
स्रोत: BBC Hindi