बंगाल में 15 साल की ममता सरकार का सूरज अस्त... इन 5 फैक्टर्स के चलते गंगासागर में डूबा TMC का जहाज
Five Factors that Collapse TMC Govt in West Bengal: ममता बनर्जी की 15 साल की राजनीति बंगाल में ढह गई है. उनका किला बीजेपी ने थराशाही किया है. 4 मई 2026 यानी सोमवार को आए बंगाल समेत देश के अन्य राज्यों से विधानसभा चुनाव के नतीजों ने अब तस्वीर साफ कर दी है. बंगाल में बीजेपी और टीएमसी के बीच कांटे की टक्कर थी. इस दौरान खुद पीएम मोदी, अमित शाह समेत कई पार्टी के बड़े नेता राज्य में सरकार बनाने के लिए जोरशोर से चुनावी प्रचार में जुटे थे. बंगाल चुनाव में पिछड़ी टीएमसी की हार के कई फैक्टर रहे हैं. इनमें जो सबसे बड़ा फैक्टर उभर कर आया है, उसमें आरजीकर घटनाक्रम के बाद महिला सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवाल सबसे अहम रहा.
(ये पांच बड़े फैक्टर ले डूबे टीएमस को...)
आरजीकर मामले ने पूरे देश के सामने ममता सरकार को बैकफुट पर लाया
ममता सरकार पूरे देश के सामने उस समय बैकफुट पर आई, जब आरजीकर मेडिकल कॉलेज घटनाक्रम ने सभी को हिला कर रख दिया. यहां कोलकाता के एक सरकारी अस्पताल में 9 अप्रैल 2024 को एक महिला ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप और हत्या कर दी गई. इस दौरान राज्य में डॉक्टरों की सुरक्षा से लेकर महिला सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा.
घटना 9 अगस्त 2024 की रात को हुई थी, और 31 साल की महिला डॉक्टर का शव मिला था. इस मामले में पोस्टमार्टम में यौन शोषण और हत्या की पुष्टी हुई. आरोपी अस्पताल में नियुक्त संजय रॉय निकला, जो अस्पताल में पुलिस की सहायता के लिए तैनात था. इस केस की संवेदनशीलता को देखते हुए कोलकाता हाईकोर्ट ने मामला सीबीआई को सौंप दिया. आरोपी को सियालदाह कोर्ट ने 18 जनवरी 2025 को दोषी करार दिया. साथ ही आजीवन कारावास की सजा सुनाई. इस घटनाक्रम के दौरान ममता सरकार पर अपराधी को बचाने के आरोप भी लगे. बीजेपी ने जमकर इस मुद्दे को उठाया और साथ ही पीड़िता की मां को उनके निवेदन पर बीजेपी ने पानीहाटी विधानसभा से चुनावी उम्मीदवार बनाया है.
चुनाव में नजर आया SIR का असर ?
बंगाल में चुनाव आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया को अंजाम दिया. इस दौरान सूची से कई मतदाताओं के नाम काट दिए. इसकी वजह उनके नाम दो जगह दर्ज थे, या वो राज्य के वोटर नहीं थे. साथ ही मृत मतदाताओं के नाम भी हटाए गए. इसका ममता बनर्जी ने विरोध किया. सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया. इस दौरान पूरे राज्य से 90 लाख वोटरों के नाम काटे गए. बांग्लादेशी लोग भी बंगाल चुनाव में वापस अपने घर लौट गए. बड़ी संख्या में बांग्लादेश और भारत बॉर्डर पर देखे भी गए थे. इनके पास अपनी नागरिकता साबित करने का कोई ठोस दस्तावेज नहीं था.
बंगाल में हिंदू वोट बंट गया
इस बार बंगाल चुनाव में हिंदू वोटर्स ने बीजेपी को समर्थन दिया. जिसने ममता सरकार को इस चुनाव में पटखनी देने में अहम भूमिका निभाई. पिछले कुछ सालों में राज्य से हिंदू महिलाओं के साथ अभद्रता का मुद्दा गरमाए रहा था. हिंदुओं में एक डर का माहौल भी राज्य में देखा गया. ममता सरकार इन सभी चीजों को रोक नहीं पाई, और बीजेपी को हिंदू वोटर्स ने इस बार एकजुटता से वोट दिया. इस बार बीजेपी ने हिंदुत्व का मुद्दा राज्य में जोर शोर से उठाया.
स्रोत: ABP Hindi