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देश के 'सबसे साफ़' शहर इंदौर में भीषण जल संकट, कांग्रेस के साथ-साथ बीजेपी के स्थानीय नेता भी नाराज़

✍️ Admin 📅 26 May, 2026 ⏰ 11:29 AM 👁 59 views

इंदौर को देश का 'सबसे साफ़' शहर माना जाता है. सरकार के स्वच्छता सर्वेक्षण में यह शहर लगातार सात बार नंबर वन पर रहा है. लेकिन देश के सबसे साफ़ शहर का दूसरा पहलू यह है कि दूषित पानी की वजह से कुछ महीने पहले यहां कई लोगों की मौत हो गई थी. और अब भीषण गर्मी के समय करीब 30 लाख की आबादी वाले शहर के कई इलाके भीषण जलसंकट से जूझ रहे हैं. पानी को लेकर विपक्षी दल के साथ-साथ सत्ता पक्ष के नेता भी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. स्थानीय प्रशासन का कहना है कि भूजल स्तर गिरने से चार हज़ार से ज़्यादा बोरिंग सूख गए हैं. हालांकि यह भी दावा किया गया कि सभी इलाक़ों में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है, टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है. इंदौर शहर के 85 वार्डों में से ज़्यादातर पानी की कमी से जूझ रहे हैं. भीषण गर्मी के चलते भूजल स्तर तेज़ी से नीचे गया है और बोरिंग सूख गए हैं. पूरे शहर में नर्मदा नदी का जल वितरण एक दिन छोड़कर हो रहा है, जिससे कई जगह पानी की कमी महसूस की जा रही है. पानी की सबसे ज़्यादा किल्लत सुखलिया एमआईजी, नेहरू नगर, माली मोहल्ला, पालदा, तीन इमली, खजराना, आज़ाद नगर, चंदन नगर, भागीरथपुरा में देखी जा रही है. सावित्री बाई शहर के वार्ड 64 की एटीएम वाली गली में रहती हैं. वह कहती हैं, "गली में 15 से 20 मकान हैं. चार से पांच दिन में एक टैंकर आता है. पानी कैसे पूरा पड़ेगा. इसीलिए आंदोलन करने आए हैं." चंदन नगर के लाबरियाभेरू इलाक़े के रहने वाले विक्की ऑटो चालक हैं. वह अपने ऑटो में पानी की केन से पानी भरकर ले जा रहे हैं. वह कहते हैं, "पानी की काफ़ी समस्या है. दो से तीन दिन पानी नहीं आ रहा है. टैंकर भी नहीं आते. दूर-दूर से पानी लाना पड़ रहा है." इंदौर के नेहरू नगर वार्ड 45 की लक्ष्मी बाई आरोप लगाती हैं, "पड़ोस वाले वार्ड के भाजपा पार्षद ने मोटी पानी की लाइन डाल दी है और इसलिए पानी नहीं आ रहा है. इसी समस्या के लिए अपनी वार्ड पार्षद सोनीला मिमरोट के साथ आंदोलन करने आए हैं." वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं. सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक आदमी पुलिस अधिकारी के पैर छूकर अपनी समस्या बताता नज़र आता है. वह वीडियो इंदौर के वार्ड 75 का है. कांग्रेस पार्षद कुणाल चौधरी ने अपने वार्ड में पानी की समस्या को लेकर पालदा चौराहे पर धरना दिया था और चक्का जाम कर दिया था. वायरल वीडियो में दिखता है कि पुलिस अधिकारी एसीपी विजय चौधरी ने जब जाम खुलवाने की कोशिश की तो कांग्रेस पार्षद जमीन पर रेंगते हुए उनके पैर पकड़ने की कोशिश कर रहे थे. चौधरी आरोप लगाते हैं कि उनके वार्ड में पर्याप्त पानी सप्लाई नहीं किया जा रहा है, "कांग्रेस पार्षदों को पानी के टैंकर भी कम दिए जा रहे हैं. भाजपा पार्षदों को पानी के टैंकर ज़्यादा दिए जा रहे हैं." भारतीय जनता पार्टी के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बीबीसी न्यूज हिन्दी से कांग्रेस के इस आरोप पर कहा, "आगे चुनाव (निकाय चुनाव) है, इसलिए कांग्रेस के पार्षद आरोप लगा रहे हैं. जल संकट के समय मिलकर काम करना चाहिए ना कि आरोप लगाने चाहिए. जितने टैंकर मांगे गए थे उतने दिए जा रहे हैं. नर्मदा जल स्काडा (आधिकारिक रूप) से निगरानी की जाती है. सभी को बराबर पानी की आपूर्ति हो रही है." वायरल वीडियो में नज़र आए एसीपी विजय चौधरी ने स्थानीय मीडिया को बताया था कि नेमावर रोड पर जल संकट को लेकर यह प्रदर्शन किया गया था. उन्होंने कहा, "नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि पानी के टैंकर तीन से बढ़कर 6 कर दिए गए हैं. सड़क जाम करने वालों को बताया गया था कि अगर आप नहीं माने तो वैधानिक कार्रवाई की जाएगी." इंदौर के एडिशनल पुलिस कमिश्नर अमरेंद्र सिंह ने स्थानीय मीडिया को बताया कि भवरकुआ पुलिस थाने के पालदा चौराहे पर चक्का जाम करने पर एफ़आईआर दर्ज कर ली गई है. इंदौर में बिना अनुमति के आंदोलन पर पहले से रोक लगी हुई है. भाजपा के पार्षद लाल बहादुर वर्मा बड़ी संख्या में वार्ड वासियों को लेकर इंदौर शहर के क्षेत्र क्रमांक 2 के भाजपा विधायक रमेश मेंदोला के घर पहुंच गए. उन्होंने नगर निगम द्वारा पानी नहीं दिए जाने की शिकायत करते हुए कहा, "8,500 रुपये देकर वार्ड के लोगों ने नर्मदा का कनेक्शन लिया लेकिन फिर भी पानी नहीं आ रहा है." कुछ दिन पहले इंदौर के क्षेत्र क्रमांक 5 के भाजपा विधायक महेंद्र हार्डिया भी अपने क्षेत्र में पानी की समस्या पर नाराज़गी ज़ाहिर कर चुके हैं. इंदौर के जल संकट को लेकर नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने महापौर को ज़िम्मेदार ठहराया. वह कहते हैं, "इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए. वह जितने भी दावे कर रहे हैं वह सब नाकाफ़ी हैं. इंदौर शहर का हर क्षेत्र जल संकट से जूझ रहा है." उन्होंने कहा, "पिछले 30 साल से इंदौर में पानी को लेकर इतना आंदोलन कभी नहीं हुआ जितना इस बार हुआ. भागीरथपुरा में भी दूषित जल के चलते कई लोगों की जान जा चुकी है." इस बीच इंदौर नगर निगम दावा कर रहा है कि वह रोज़ाना ही प्रति व्यक्ति 250 लीटर पानी मुहैया करा रहा है. नर्मदा से तीन चरण में पानी इंदौर लाया जा चुका है. इसी नदी से इंदौर शहर में पानी पहुंचता है और इसी के माध्यम से अलग-अलग इलाकों में पानी की टंकियां भरी जाती हैं. नगर निगम का दावा है कि रोज़ 15 से 16 लाख लोगों तक पानी पहुंचाया जा रहा है. इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि चार हज़ार से ज़्यादा बोरिंग सूख गए हैं. वह कहते हैं, "नई कॉलोनी बढ़ी हैं. शहर में जनसंख्या बढ़ी है. पिछले साल पानी की 7 नई टंकियां बनाई गई थीं. अब जल्द पानी पहुंचाने का एकमात्र साधन पानी के टैंकर हैं, इसलिए पानी के टैंकर बढ़ाए गए हैं. इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि जल संकट दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं. बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित. 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स्रोत: BBC Hindi

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