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पश्चिम बंगाल में OBC आरक्षण पर बड़ा बदलाव, विधानसभा से पास हुए दो अहम बिल

✍️ Admin 📅 29 June, 2026 ⏰ 03:48 PM 👁 9 views

पश्चिम बंगाल विधानसभा ने सोमवार को दो संशोधन बिल पास किए. इनका मकसद औपचारिक रूप से अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण कानूनों में औपचारिक रूप से बदलाव करना है. इसके अलावा मई 2024 में कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देश को पालन करना था, साथ ही लिस्ट से मुस्लिम समुदाय को हटाना था.  बिल के पक्ष में 186 विधायकों ने मतदान किया. जबकि 17 ने विरोध किया. छह सदस्य मतदान से दूर रहे. नए कानूनों के लागू होने के साथ राज्य में OBC आरक्षण की व्यवस्था में बड़ा बदलाव होगा. अब आरक्षण का ढांचा 17 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया है. OBC श्रेणियों का भी पुनर्गठन किया गया है. किन मुस्लिम कैटेगिरी को हटाया, किन्हें रहने दियानई ओबीसी लिस्ट में विशिष्ट मुस्लिम कम्युनिटी में जोलाह (अंसारी मोमिन), फकीर, पहाड़िया मुस्लिम, हज्जाम (मुस्लिम), और चौदुली (मुस्लिम) शामिल है. इन हटाए गए 77 कम्युनिटी में मुस्लिम नेहरिया, मुस्लिम हलदर, मुस्लिम सानपुई, मुस्लिम माली, घोसी (मुस्लिम), मुस्लिम दर्जी, ओस्तागर, इदरीसी, मुस्लिम राजमिस्त्री, मुस्लिम बटियारा, मुस्लिम मोल्ला, धाली(मुस्लिम) और कई अन्य लोग शामिल हैं.  हमने फील्ड सर्वे में शामिल 113 कैटेगिरी को हटा दिया है: गौरिशंकर घोष गौरिशंकर घोष ने सदन में कहा, "हमने पहले बिना किसी फील्ड सर्वे के शामिल की गई 113 श्रेणियों को हटा दिया है, जबकि विभिन्न सर्वेक्षणों के आधार पर शामिल की गई 66 उप-श्रेणियों को बरकरार रखा है." उन्होंने आगे कहा, "बैकवर्ड क्लासेज आयोग जांच करेगा और यदि उसे लगेगा कि किसी समुदाय को शामिल किया जाना चाहिए, तो वह राज्य सरकार को सिफारिश करेगा. पिछली सरकार ने आयोग को दरकिनार किया था, इसी वजह से हाईकोर्ट ने पूरी प्रक्रिया को खारिज कर दिया." संशोधित कानून के तहत अब राज्य सरकार, पिछड़ा वर्ग आयोग से परामर्श के बाद अलग-अलग OBC श्रेणियों के लिए आरक्षण प्रतिशत तय कर सकेगी. दूसरे संशोधन में आयोग की संरचना, अधिकार और जिम्मेदारियों को भी स्पष्ट किया गया है. खामेनेई की अंतिम सलामी: भारत की ओर से शामिल होंगे बिहार के राज्यपाल और विदेश राज्यमंत्री फैसले का देखने को मिला विरोध, विपक्ष ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल हालांकि, इस फैसले का विरोध भी देखने को मिला. आईएसएफ विधायक नवशाद सिद्दीकी ने कहा, "सरकार जो संशोधन लाई है, उससे ऐसा लगता है कि एक खास समुदाय को अलग-थलग करने की कोशिश की जा रही है. हम इसका विरोध करते हैं. चाहे हिंदू समुदाय हो, ईसाई समुदाय हो या कोई अन्य, सभी के लिए वैज्ञानिक तरीके से सर्वे होना चाहिए और उसी के आधार पर फैसला लिया जाना चाहिए." उन्होंने यह भी कहा, "सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार आरक्षण सीमा में किसी भी बदलाव के लिए ठोस आंकड़े या वैज्ञानिक आकलन जरूरी है. लेकिन राज्य सरकार बिना पर्याप्त आंकड़ों के OBC आरक्षण कम करने की दिशा में बढ़ रही है और इस मुद्दे का समाधान विधेयक में नहीं किया गया है." आसमान नहीं टूट पड़ेगा... राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग पर क्यों ऐसा बोला सुप्रीम कोर्ट? मयंक प्रताप सिंह एक वरिष्ठ पत्रकार और डिजिटल न्यूज़ प्रोफेशनल हैं, जिनके पास इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में 18 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उन्होंने देश के प्रमुख मीडिया संगठनों के साथ काम करते हुए ब्रेकिंग न्यूज़, पॉलिटिकल कवरेज, ग्राउंड रिपोर्टिंग और डिजिटल कंटेंट स्ट्रेटेजी के क्षेत्र में मजबूत पहचान बनाई है. अपने करियर की शुरुआत से ही मयंक ने न्यूज़रूम की बदलती जरूरतों के अनुरूप टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म दोनों पर कंटेंट डेवलपमेंट और न्यूज़ मैनेजमेंट में विशेषज्ञता हासिल की. उन्होंने इंडिया टुडे ग्रुप में लंबे समय तक कार्य करते हुए राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख खबरों, विशेष श्रृंखलाओं और डिजिटल न्यूज़ पैकेजिंग पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसके बाद उन्होंने GNT (Good News Today) में इनपुट लीड के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़रूम ऑपरेशन, स्टोरी प्लानिंग, रिपोर्टर कोऑर्डिनेशन और कंटेंट क्वालिटी कंट्रोल की जिम्मेदारियाँ संभालीं. ज़ी न्यूज़ में रहते हुए उन्होंने मल्टी-प्लेटफॉर्म न्यूज़ प्रोडक्शन, डिजिटल एंगल स्टोरीज़ और स्पेशल प्रोजेक्ट्स पर काम किया. IBN7 (वर्तमान News18 India) में इनपुट टीम का हिस्सा रहते हुए मयंक ने पॉलिटिकल, सोशल और नेशनल इश्यूज़ पर कई महत्वपूर्ण कवरेज को लीड किया. वर्तमान में मयंक सिंह ABP News में न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं, जहाँ वे डिजिटल न्यूज़ वेबसाइट के लिए कंटेंट स्ट्रेटेजी, ब्रेकिंग न्यूज़ मैनेजमेंट, एक्सप्लेनेर और इन-डेप्थ वेब कॉपीज़ पर विशेष ध्यान देते हैं. वे SEO-फ्रेंडली न्यूज़ लेखन, डेटा-ड्रिवन स्टोरीज़, ग्राउंड-आधारित रिपोर्टिंग और रियल-टाइम डिजिटल पब्लिशिंग में दक्ष हैं. मयंक की पत्रकारिता का फोकस राजनीति, चुनाव, सामाजिक मुद्दे, पब्लिक पॉलिसी और ग्राउंड रियलिटी आधारित रिपोर्टिंग रहा है. वे न्यूज़रूम में स्पीड, एक्युरेसी और एनालिटिकल अप्रोच के लिए जाने जाते हैं. उनका उद्देश्य डिजिटल युग में पाठकों को विश्वसनीय, तथ्यपरक और प्रभावशाली पत्रकारिता उपलब्ध कराना है.

स्रोत: ABP Hindi

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