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Death

पेड़ गिरने से 11 साल के बच्चे की मौत का मामला, क्या चेतावनियों को किया गया नज़रअंदाज़?

✍️ Admin 📅 03 July, 2026 ⏰ 11:20 AM 👁 13 views

सुबह स्कूल के लिए निकले मुंबई के 11 वर्षीय विहान श्रीवास्तव की मां शाम को उनका इंतज़ार कर रही थीं. लेकिन चेंबूर में उनकी स्कूल बस पर पीपल का पेड़ गिर गया और उस हादसे ने उनके परिवार को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया. सबका लाड़ला विहान अब कभी वापस नहीं लौटेगा. अब अधिकारियों को भेजे गए पत्रों के सामने आने से सवाल उठ रहा है कि क्या उनकी मौत टाली जा सकती थी. विहान की मौत महज़ एक हादसा थी या फिर उन्हें दूसरों की लापरवाही की कीमत चुकानी पड़ी, यह सवाल अब बेचैन करने वाला बन गया है. अब इस मामले में एक महत्वपूर्ण बात सामने आई है. बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के उद्यान विभाग ने सड़क विभाग को कम से कम दो बार पत्रों के ज़रिए चेतावनी दी थी, ऐसा बीएमसी के आंतरिक आधिकारिक पत्राचार से सामने आया है. इन पत्रों में पेड़ों की जड़ों के पास चल रही खुदाई और उससे जुड़े काम को लेकर गंभीर चिंता जताई गई थी. चेतावनी दी गई थी कि इस खुदाई से पेड़ों की जड़ें क्षतिग्रस्त हो रही हैं और इससे बारिश के मौसम में पेड़ों के गिरने का खतरा पैदा हो सकता है. हालांकि, इन चेतावनियों के बावजूद जरूरी कदम क्यों नहीं उठाए गए, यह सवाल अब उठ रहा है. आम मुंबईकरों के साथ-साथ विपक्षी दलों के नगरसेवक भी संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. इस दुर्घटना की जांच के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने एक जांच समिति का गठन किया है. मामले में बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने की बात कहते हुए तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया है. इनमें एम/पश्चिम विभाग के डिप्टी इंजीनियर (सड़क) अरुण मुंडे, सहायक उद्यान अधीक्षक जगदीश भोईर और असिस्टेंट इंजीनियर योगेश पार्टे शामिल हैं. प्राथमिक और विभागीय जांच पूरी होने तक तीनों को निलंबित किया गया है. साथ ही, पालिका ने स्पष्ट किया है कि इस दुर्घटना के मामले में संबंधित ठेकेदार के खिलाफ भी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इस बीच, इस दुर्घटना में जान गंवाने वाले विहान के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. घटना के कई घंटे बीत जाने के बाद भी विहान की मां सदमे से उबर नहीं पाई हैं. चेंबूर (पश्चिम) स्थित हरिताज प्रीतम इमारत, रोड क्रमांक 11, डायमंड गार्डन के पास से 30 जून 2026 को लगभग 2.30 बजे 'यूनिवर्सल हाई स्कूल' की बस गुजर रही थी, तभी पीपल का पेड़ जड़ से उखड़कर बस पर गिर गया. इस घटना में बस के अंदर कुल 13 बच्चे फंस गए थे. इनमें से 12 बच्चों को मुंबई फ़ायर ब्रिगेड, बस कंडक्टर और स्थानीय नागरिकों की मदद से सुरक्षित निकालकर एंबुलेंस के जरिए नजदीकी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया. पालिका की प्रेस रिलीज़ के अनुसार, बस में फंसे छात्रों में से 4 छात्र मामूली रूप से घायल हुए थे. जबकि 11 वर्षीय विहान श्रीवास्तव गंभीर रूप से घायल हुए थे. उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया. लेकिन इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. विहान अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था. उनकी मां अस्पताल में काम करती हैं, जबकि पिता एक पेट्रोलियम कंपनी में कार्यरत हैं. तीन साल पहले यह परिवार दिल्ली से मुंबई की कुकरेजा सोसाइटी में रहने के लिए आया था. विहान को क्रिकेट का विशेष शौक था, जिसके कारण वह सोसाइटी के कई लोगों के बीच बेहद पॉपुलर था. इस घटना पर बोलते हुए श्रीवास्तव परिवार के पड़ोसी और स्थानीय विधायक तुकाराम काते ने कहा, "यह बेहद दुखद घटना है. मुझे और पूरी कुकरेजा सोसाइटी परिवार को इसका गहरा दुख है. एक अच्छा खेलने वाला बच्चा हमारे बीच से चला गया. मुंबई महानगरपालिका की लापरवाही के कारण यह दुर्घटना हुई है. इस मामले को मैंने सदन में भी उठाया है. हमारी मांग है कि जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए." तुकाराम काते ने आगे कहा, "घटना के कई घंटे बीत जाने के बाद भी विहान की मां उसके इंतज़ार में बैठी हैं. उनके हाथ में उसकी स्कूल बैग और क्रिकेट बैट है. माता-पिता जब काम पर गए थे तो बच्चा बिल्कुल ठीक था, लेकिन जब वे घर लौटे तो वह अब नहीं रहा." इस मामले में बृहन्मुंबई महानगरपालिका के आंतरिक आधिकारिक पत्राचार से एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है. नगर निगम के उद्यान विभाग ने सड़क विभाग को कम से कम दो बार लिखित चेतावनी देते हुए कहा था कि सड़क और बारिश के पानी की निकासी के काम के दौरान पेड़ों की जड़ों के पास हो रही खुदाई से जड़ें क्षतिग्रस्त हो रही हैं. इससे बारिश के मौसम में पेड़ों के गिरने का खतरा पैदा हो सकता है. 27 जनवरी 2026 का पहला पत्र 24 जनवरी को जूनियर ट्री ऑफ़िसर (कनिष्ठ वृक्ष अधिकारी) के किए गए निरीक्षण के बाद जारी किया गया था. इस निरीक्षण में चेंबूर (पूर्व) स्थित रोड क्रमांक 11 और रोड क्रमांक 14 पर चल रहे सड़क कार्यों के दौरान ठेकेदारों के पेड़ों के तने के पास खुदाई किए जाने से जड़ों को नुकसान होने की बात दर्ज की गई थी. इस पत्र में स्पष्ट शब्दों में कहा गया था कि पेड़ों की जड़ों के पास किए गए खुदाई कार्य के कारण बारिश के मौसम में इन पेड़ों के गिरने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. साथ ही, इसमें यह भी उल्लेख था कि स्थानीय नागरिकों ने इस संबंध में शिकायतें दर्ज कराई थीं. ठेकेदार की लापरवाही के कारण नगर निगम की छवि धूमिल होने की बात भी पत्र में दर्ज की गई थी. उद्यान विभाग ने सड़क विभाग को तत्काल पेड़ों की जड़ों के पास चल रही खुदाई को रोकने, पेड़ों के तने के आसपास जमा निर्माण मलबा हटाने और हर पेड़ के चारों ओर कम से कम 1 मीटर × 1 मीटर आकार का गड्ढा बनाकर उसमें लाल मिट्टी भरने के निर्देश दिए थे, ताकि पेड़ों की जड़ों का उचित विकास हो सके. पहले चेतावनी के बाद भी सड़क विभाग ने ज़रूरी कदम नहीं उठाए. जिसके 4 महीने बाद फिर से पत्र भेजा गया, यह जानकारी बीबीसी को अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर दी. उद्यान विभाग ने सड़क विभाग को भेजे गए दूसरे पत्र में कहा था कि पहले दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया गया है. रोड क्रमांक 11, रोड क्रमांक 21, सिंधी सोसाइटी क्षेत्र और कलेक्टर कॉलोनी क्षेत्र में फिर से निरीक्षण किया गया. इस निरीक्षण में भी पाया गया कि सड़क कार्यों के कारण पेड़ों की जड़ों को नुकसान हो रहा है. पत्र में यह भी चेतावनी दी गई थी कि यदि इनमें से कोई पेड़ गिरता है तो संबंधित विभाग और संबंधित ठेकेदार जिम्मेदार होंगे. नगर निगम के आंतरिक विभागों के बीच पत्राचार होने के बावजूद उस पर ध्यान न दिए जाने का आरोप लगाते हुए विपक्षी उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट के नेता और नगरसेवक सचिन पडवल ने संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार पर कड़ी कार्रवाई की मांग की. बीबीसी मराठी से बात करते हुए सचिन पडवल ने कहा, "उद्यान विभाग की दी गई लिखित चेतावनियों के बाद सड़क विभाग ने कौन से कदम उठाए? पेड़ों की जड़ों के पास खुदाई रोकने के निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया गया? और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि समय पर आवश्यक कदम उठाए गए होते, तो क्या यह दुर्घटना टाली जा सकती थी? इसकी भी जांच होनी चाहिए. साथ ही आगे जब सीमेंट-कंक्रीट की सड़कें बनाई जाएं, तो पेड़ों को लेकर अलग से जांच की जानी चाहिए." कांग्रेस नेता अशरफ आज़मी ने बीबीसी मराठी से बात करते हुए कहा, "मुंबई में केवल 33 लाख पेड़ हैं. जनसंख्या की तुलना में यह संख्या कम है. कंक्रीट की सड़कें बनाते समय बाकी बचे पेड़ भी खतरे में आ रहे हैं. पेड़ों का नष्ट होना गंभीर बात है ही, लेकिन ऐसी दुर्घटनाओं में लोगों की मौत होना और भी चिंताजनक है. इसलिए मुंबई के पेड़ों का स्वतंत्र ऑडिट होना चाहिए. सीमेंट-कंक्रीट की सड़कें बनाते समय विभिन्न प्राधिकरणों के निर्देशों का पालन होना चाहिए, यह हमारी मांग है." इस घटना के बारे में मुंबई पुलिस के उपायुक्त समीर शेख ने कहा, "दिनांक 30 जून को लगभग 2.30 बजे चेंबूर स्थित रोड क्रमांक 11 पर यूनिवर्सल स्कूल की बस पर पेड़ गिरने से हादसा हुआ. इस दुर्घटना में एक छात्र की दुखद मृत्यु हो गई. इस मामले में अकस्मात मृत्यु की रिपोर्ट दर्ज की गई है और आगे की जांच जारी है." नगर निगम की प्रेस रिलीज़ के अनुसार, चेंबूर में हुई इस दुर्घटना को गंभीरता से लेते हुए महापालिका आयुक्त अश्विनी भिडे ने इस घटना की जांच के लिए दो उप-आयुक्तों की समिति नियुक्त की है और उसे 8 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं. इस मामले में बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने की बात कहते हुए दो अधिकारियों को निलंबित किया है. इनमें डिप्टी इंजीनियर (सड़क) अरुण मुंडे और सहायक उद्यान अधीक्षक जगदीश भोईर शामिल हैं. प्राथमिक और विभागीय जांच पूरी होने तक दोनों को निलंबित किया गया है, और इस दुर्घटना के मामले में संबंधित ठेकेदार के खिलाफ भी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. साथ ही, इस जांच में विशेषज्ञों की सलाह लेकर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ज़रूरी सिफ़ारिशें करने के निर्देश भी दिए गए हैं. नगर निगम ने यह भी दावा किया है कि इस पेड़ को लेकर पहले कोई आधिकारिक सार्वजनिक शिकायत लोगों की तरफ़ से नहीं मिली थी, और 12 मई 2026 को किए गए सर्वेक्षण में ये पेड़ सुरक्षित पाया गया था और मानसून से पहले 29 मई 2026 को इसकी छंटाई भी की गई थी. हालांकि, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए खतरनाक पेड़ों का पुनः निरीक्षण, समयबद्ध जांच और आवश्यक छंटाई करने के निर्देश आयुक्त ने दिए हैं, यह भी प्रेस रिलीज़ में कहा गया है. बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

स्रोत: BBC Hindi

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