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Death

नितंबों का आकार बढ़ाने की प्रक्रिया कितनी ख़तरनाक? ट्रीटमेंट के 24 घंटे के भीतर हुई मौत से उठे सवाल

✍️ Admin 📅 31 July, 2026 ⏰ 08:19 AM 👁 41 views

सितंबर 2024 की एक सुबह एलिस वेब एक किराए के ब्यूटी सैलून में बनी अस्थायी क्लिनिक में पहुँची थीं. वह बिना सर्जरी वाली ब्राज़ीलियन बट लिफ्ट यानी बीबीएल प्रक्रिया करवाना चाहती थीं. इस प्रक्रिया में नितंबों में बड़ी मात्रा में डर्मल फ़िलर इंजेक्ट किए जाते हैं. एलिस को उम्मीद थी कि दोपहर तक उनका इलाज़ पूरा हो जाएगा. वह बच्चों को स्कूल से लेने भी जा सकेंगी. लेकिन 33 वर्षीय एलिस कभी घर नहीं लौट सकीं. पाँच बच्चों की माँ एलिस की इस उपचार के 24 घंटे के भीतर ही मौत हो गई. वह बिना सर्जरी वाली बीबीएल प्रक्रिया के बाद मौत होने के मामले में ब्रिटेन की पहली व्यक्ति बन गईं. उनकी मौत की वजह का पता लगाने के लिए औपचारिक जांच की जाएगी. एलिस का मामला अब ब्रिटेन के तेज़ी से बढ़ रहे सौंदर्य उद्योग पर बहस का केंद्र बन गया है. शरीर की बनावट बदलने वाले कॉस्मेटिक इंजेक्शन अब बहुत आसानी से उपलब्ध हैं. ये सेवाएँ बड़े बाज़ारों के ब्यूटी सैलून से लेकर किराए के दफ़्तरों और होटल के कमरों तक दी जा रही हैं. पिछले दो साल से हम इस उद्योग की जाँच कर रहे हैं. मैंने अपनी पहचान छिपाकर यह जानने की कोशिश की कि आख़िर ऐसे क्लिनिकों के बंद दरवाज़ों के पीछे क्या हो रहा है? मुझे ऐसे लोग मिले जो अस्थायी उपचार कक्षों में मेरे शरीर में सैकड़ों मिलीलीटर फ़िलर भरने के लिए तैयार थे. कुछ लोगों ने बिना उचित मेडिकल सलाह के मुझे ऐसी दवाएँ देने की पेशकश की, जो केवल डॉक्टर के पर्चे पर मिलनी चाहिए. इतना ही नहीं, मुझे सोशल मीडिया के ज़रिए बिना लेबल वाले वज़न घटाने के इंजेक्शन भी बेचने की कोशिश की गई. देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां. मैंने दर्जनों महिलाओं से बात की. उन्होंने बताया कि जिन कॉस्मेटिक इंजेक्शनों को कम जोखिम वाला और लगभग दर्दरहित बताया गया था, उनके कारण उन्हें गंभीर पीड़ा झेलनी पड़ी. कुछ महिलाओं को संक्रमण हो गया. इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. कॉस्मेटिक उपचारों को मान्यता देने वाली संस्था 'सेव फ़ेस' का कहना है कि उसके सामने गंभीर नुक़सान के कई मामले आए हैं. इनमें एक ऐसी मरीज़ भी शामिल है जिसकी पलक की सर्जरी ग़लत तरीके से हुई. उसके बाद वह अपनी आँखें पूरी तरह बंद नहीं कर पाती हैं. एक अन्य मामले में लिपोसक्शन यानी शरीर की अतिरिक्त चर्बी हटाने की कॉस्मेटिक सर्ज़री के दौरान मरीज़ की आंत में छेद हो गया. 'सेव फ़ेस' की निदेशक एश्टन कॉलिन्स कहती हैं, "यह सब किसी डरावनी फ़िल्म की कहानी जैसा लगता है." उनका कहना है कि ऐसी प्रक्रियाएँ मुख्य बाज़ारों में खुलेआम की जा रही हैं. कॉस्मेटिक इंजेक्शन के मामले में ब्रिटेन यूरोप के सबसे कम रेग्युलेटेड बाज़ारों में शामिल है. यूरोप के कई देशों के मुक़ाबले ब्रिटेन में नियम काफ़ी ढीले हैं. वहाँ कोई भी व्यक्ति प्रशिक्षण लेकर क़ानूनी रूप से डर्मल फ़िलर के इंजेक्शन देना शुरू कर सकता है. इसके बाद वह आम लोगों को यह उपचार दे सकता है. स्कॉटलैंड और इंग्लैंड की सरकारों का कहना है कि वे इस अरबों पाउंड के उद्योग पर नियमों को और सख़्त बना रही हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या ये क़दम काफ़ी साबित होंगे? विशेषज्ञ एक दशक से ज़्यादा समय से डर्मल फ़िलर से जुड़े संभावित संकट की चेतावनी दे रहे हैं. फिर भी आज तक लोग ऐसे नुक़सान का शिकार क्यों हो रहे हैं, जिसे टाला जा सकता था? बता दें कि डर्मल फिलर्स ऐसे इंजेक्शन होते हैं जो झुर्रियों को कम करते हैं और चेहरे की ढीली त्वचा में वॉल्यूम वापस लाते हैं. यह घटना एलिस की मौत से पहले की है. साल 2024 के जून में जोआन नाम की एक महिला एसेक्स के एक फ़्लैट में बने अस्थायी क्लीनिक में बिना सर्जरी वाली बीबीएल प्रक्रिया करवाने गई थीं. जोआन सिर्फ़ अपना पहला नाम ही सार्वजनिक करना चाहती हैं. तब उन्हें लगा था कि तुर्की जाकर सर्जरी के ज़रिए बीबीएल करवाने के मुक़ाबले यह तरीका कम जोखिम भरा होगा. दक्षिण वेल्स में रहने वाली दो बच्चों की माँ जोआन कहती हैं, "मैं सिर्फ़ अपने नितंबों को अधिक उभरा हुआ आकार देना चाहती थी." वह कहती हैं, "मुझे वहाँ से तुरंत लौट जाना चाहिए था." इलाज के दौरान उनके शरीर में एक लीटर फ़िलर इंजेक्ट किया गया. बाद में उन्हें सेप्सिस हो गया. उनकी हालत इतनी गंभीर हो गई कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. जोआन कहती हैं कि दो साल बाद भी इस उपचार के निशान उनकी जाँघों और नितंबों पर मौजूद हैं. एक समय ऐसा था जब कॉस्मेटिक इंजेक्शनों को मुख्य रूप से संपन्न और मध्यम आयु के लोगों से जोड़ा जाता था. लोग बढ़ती उम्र के असर को कम दिखाने के लिए इनका इस्तेमाल करते थे. लेकिन पिछले एक दशक में इस उद्योग में बड़ा बदलाव आया है. डर्मल फ़िलर एक तरह की जैल होती है. इसे इंजेक्शन के ज़रिए शरीर के किसी हिस्से को अधिक उभरा हुआ आकार देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. यह आमतौर पर हायलूरोनिक एसिड से बनाई जाती है. अब डर्मल फ़िलर और बोटॉक्स जैसी प्रक्रियाओं का प्रचार युवा ग्राहकों को ध्यान में रखकर किया जाता है. इन्हें अक्सर चिकित्सकीय प्रक्रिया के बजाय सामान्य सौंदर्य उपचार के रूप में पेश किया जाता है. 'सेव फ़ेस' की एश्टन कॉलिन्स का मानना है कि इस बदलाव में सोशल मीडिया और रियलिटी टीवी की बड़ी भूमिका रही है. वह कहती हैं, "कार्दाशियन्स, लव आइलैंड और सोशल मीडिया ने युवा महिलाओं के बीच भरे हुए होंठ, उभरे हुए गाल और हमेशा जवान दिखने वाले चेहरे का चलन बढ़ाया है." यहां बता दें कि कर्डाशियन्स, अमेरिका का एक बेहद लोकप्रिय और प्रभावशाली परिवार है, जिसने अपने रियलिटी टीवी शो, फैशन ब्रांड्स और सोशल मीडिया के जरिए दुनिया भर में प्रसिद्धि हासिल की है. इस परिवार की मुखिया क्रिस जेनर हैं और उनके बच्चों को 'कार्दाशियन्स-जेनर्स' के रूप में जाना जाता है. वहीं, लव आइलैंड एक लोकप्रिय टेलीविज़न डेटिंग रियलिटी शो है, जिसकी शुरुआत मुख्य रूप से ब्रिटेन में हुई थी. इस शो में आकर्षक और अविवाहित युवक-युवतियां एक विला में एक साथ रहते हैं, जिन्हें आपस में जोड़े बनाने होते हैं. कॉलिन्स का कहना है कि इंजेक्शन आधारित उपचार पहले के मुक़ाबले कहीं ज़्यादा आसानी से उपलब्ध हो गए हैं. इनमें से कई सेवाएँ अब ब्यूटी सैलून में भी दी जाती हैं. कॉलिन्स का कहना है कि इससे लोगों को यह लग सकता है कि ये भी दूसरी सौंदर्य सेवाओं जैसी ही हैं. वह कहती हैं, "लोग नाखून या भौहें सँवारने वाली सेवाओं की तरह इन्हें भी सामान्य सौंदर्य उपचार समझने लगते हैं." उनका कहना है कि 35 वर्ष से कम उम्र के लोगों के बीच यह सोच और अधिक दिखाई देती है. वे इन प्रक्रियाओं को मेडिकल उपचार नहीं, बल्कि ब्यूटी सर्विस के रूप में देखते हैं. कॉलिन्स के मुताबिक़, इसका नतीजा यह होता है कि ग्राहक सुरक्षा और योग्यताओं के बजाय सुविधा, लोकप्रियता और कम क़ीमत को ज़्यादा अहमियत देने लगते हैं. वह कहती हैं, "बहुत से लोगों को यह तक पता नहीं होता कि बोटॉक्स ऐसी दवा है, जिसे केवल डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर दिया जाना चाहिए." "उन्हें यह भी नहीं मालूम होता कि इस तरह का उपचार शुरू होने से पहले किसी हेल्थ एक्सपर्ट की ओर से उनकी उचित जाँच की जानी चाहिए." कॉलिन्स का कहना है कि इन सभी वजहों से यह उद्योग बहुत तेज़ी से बढ़ा है. लेकिन इसके साथ ही असुरक्षित तरीक़े से उपचार देने वालों के लिए भी अवसर बढ़ गए हैं. वह कहती हैं, "सोशल मीडिया पर इन उपचारों को जिस तरह पेश किया जाता है, उससे लोगों को इनके जोखिम कम दिखाई देते हैं." "नतीजा यह होता है कि लोग इनके संभावित ख़तरों को गंभीरता से नहीं लेते." इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की कोई केंद्रीय व्यवस्था नहीं है. साथ ही, इस उद्योग की बढ़ोतरी पर नज़र रखने वाला कोई आधिकारिक डेटाबेस भी मौजूद नहीं है. इसी वजह से इस बाज़ार का वास्तविक आकार अब भी साफ़ नहीं है. ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) के प्लास्टिक सर्जन और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के शोधकर्ता डॉ. एलेक्ज़ेंडर ज़रगरान ने इस बाज़ार के एक बड़े हिस्से, यानी बोटॉक्स क्षेत्र का आकार समझने की कोशिश की. उनके विश्लेषण में पता चला कि 2025 में पूरे ब्रिटेन में क़रीब 20 हज़ार लोग यह काम कर रहे थे. वहीं, 2023 में ऐसे लोगों की संख्या साढ़े तीन हज़ार से कुछ ज़्यादा थी. डॉ. ज़रगरान कहते हैं, "हम जानते हैं कि यह उद्योग लगातार बढ़ रहा है." हालाँकि इसकी एक वजह यह भी हो सकती है कि अब ऑनलाइन और सोशल मीडिया पर विज्ञापन देने वालों की पहचान पहले के मुक़ाबले ज़्यादा व्यवस्थित ढंग से की जा रही है. फिर भी, सिर्फ़ दो साल में दर्ज़ की गई यह बढ़ोतरी काफ़ी बड़ी है. शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि बोटॉक्स जैसी सेवाएँ सबसे ज़्यादा पिछड़े इलाक़ों में ज़्यादा उपलब्ध हैं. डॉ. ज़रगरान के अनुसार, इस क्षेत्र के विस्तार की एक वजह यह भी है कि इसमें बिना चिकित्सकीय योग्यता वाले लोग भी बड़ी संख्या में काम करने लगे हैं. अध्ययन के मुताबिक़, 2023 से 2025 के बीच मेडिकल योग्यता के बिना सौंदर्य उपचार देने वाले लोगों का अनुपात 12 फ़ीसदी से बढ़कर 24.8 फ़ीसदी हो गया. यानी यह संख्या लगभग दोगुनी हो गई. अध्ययन में यह भी पाया गया कि सबसे अधिक वंचित समुदायों में बोटॉक्स की सेवाएँ ज़्यादा आसानी से उपलब्ध थीं. सबसे कम पिछड़े इलाक़ों की तुलना में सबसे अधिक पिछड़े इलाक़ों में उपचार देने वालों की संख्या छह गुना से भी ज़्यादा थी. लेकिन इसके साथ एक दूसरी समस्या भी सामने आई. सबसे अधिक पिछड़े इलाक़ों में रहने वाले लोगों को मेडिकल योग्यता रखने वाले विशेषज्ञों की सेवाएँ अपेक्षाकृत कम उपलब्ध थीं. यह स्थिति एक बड़े सवाल को जन्म देती है. अगर आज पूरे ब्रिटेन में हज़ारों लोग कॉस्मेटिक इंजेक्शन दे रहे हैं, तो क्या इस क्षेत्र के नियमन की ज़िम्मेदारी किसी संस्था या सरकारी निकाय के पास नहीं होनी चाहिए? ब्रिटेन में मौजूदा क़ानून के तहत कोई भी व्यक्ति प्रशिक्षण लेकर क़ानूनी तौर पर डर्मल फ़िलर का इस्तेमाल कर सकता है. वह इन उत्पादों को ख़रीद सकता है. और आम लोगों को यह उपचार दे सकता है. जबकि डॉक्टरों, नर्सों और डेंटल की निगरानी पेशेवर नियामक संस्थाएँ करती हैं. इन संस्थाओं को शिकायतों की जाँच करने का अधिकार होता है. वे ज़रूरत पड़ने पर कार्रवाई भी कर सकती हैं. लेकिन सौंदर्य उपचार देने वाले ऐसे लोगों के लिए कोई समान वैधानिक नियामक संस्था नहीं है, जिनके पास चिकित्सकीय योग्यता नहीं है. दूसरी ओर, ऑस्ट्रिया में बोटुलिनम टॉक्सिन और डर्मल फ़िलर को चिकित्सकीय प्रक्रिया माना जाता है. आम तौर पर केवल डॉक्टरों को ही यह उपचार करने की अनुमति होती है. फ़्रांस में बिना चिकित्सकीय योग्यता वाले लोगों को इंजेक्शन आधारित कॉस्मेटिक उपचार देने की अनुमति नहीं है. ज्वॉइंट काउंसिल फ़ॉर कॉस्मेटिक प्रैक्टिशनर्स के मुख्य कार्यकारी एंड्रयू रैंकिन कहते हैं कि ब्रिटेन का अपेक्षाकृत हल्का नियामक ढाँचा वहाँ की व्यापक नियामक संस्कृति को दर्शाता है. उनके मुताबिक़, ब्रिटेन में लंबे समय से उपभोक्ता की पसंद और आर्थिक विकास को अहमियत दी जाती रही है. वे कहते हैं, "हमारी सोच ऐसी रही है जिसमें सरकार सार्वजनिक सुरक्षा और आर्थिक गतिविधियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती है." साल 2023 में इंग्लैंड में लाइसेंस आधारित व्यवस्था लागू करने के प्रस्ताव पर सरकार ने लोगों और संबंधित पक्षों से राय मांगी थी. उस समय कुछ लोगों ने चेतावनी दी थी कि नए नियम संतुलित होने चाहिए. सुरक्षा बढ़ाने के क़दमों को व्यापक समर्थन मिला था. लेकिन छोटे व्यवसायों पर उसके असर को लेकर भी चिंता जताई गई थी. कुछ लोगों का कहना था कि बहुत सख़्त नियम ग्राहकों की पसंद को सीमित कर सकते हैं. इससे उद्योग का कुछ हिस्सा भूमिगत तरीक़े से भी काम करने लग सकता है. लेकिन डॉ. एलेक्ज़ेंडर ज़रगरान का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में ग्राहकों के लिए यह समझना मुश्किल हो सकता है कि उपचार देने वाले की योग्यता क्या है. कई बार यह जानना भी आसान नहीं होता कि उसने किस तरह का प्रशिक्षण लिया है. यह भी स्पष्ट नहीं होता कि अगर उपचार के दौरान कोई समस्या हो जाए तो मदद कहाँ से मिलेगी. डॉ. ज़रगरान कहते हैं, "अगर आप चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े हैं तो आपने विशेष प्रशिक्षण लिया होगा." "उसमें मरीज़ की सहमति लेना, उपचार करना, निगरानी रखना और जटिल परिस्थितियों की पहचान करना जैसी अहम बातें शामिल होती हैं." एक दशक से भी ज़्यादा पहले पीआईपी ब्रेस्ट इम्प्लांट घोटाले के बाद सरकार ने कॉस्मेटिक उपचार उद्योग की स्वतंत्र समीक्षा कराई थी. इस घोटाले में हज़ारों महिलाओं को ऐसे सिलिकॉन इम्प्लांट लगाए गए थे जिन्हें चिकित्सकीय इस्तेमाल की मंज़ूरी नहीं मिली थी. तत्कालीन एनएचएस मेडिकल डायरेक्टर प्रोफ़ेसर सर ब्रूस कीओ के नेतृत्व में यह समीक्षा की गई थी. इसमें डर्मल फ़िलर, बोटॉक्स और दूसरी गैर-सर्जिकल कॉस्मेटिक प्रक्रियाओं की भी जाँच की गई थी. समीक्षा में चेतावनी दी गई थी कि गैर-सर्जिकल कॉस्मेटिक उपचार कराने वाले लोगों को विशेष सुरक्षा नहीं मिलती. रिपोर्ट में कहा गया था कि उनकी स्थिति कई मामलों में किसी आम उपभोक्ता जैसी है. समीक्षा का निष्कर्ष था, "हमारे विचार में डर्मल फ़िलर एक ऐसा संकट है, जो किसी भी समय पैदा हो सकता है." रिपोर्ट में सिफ़ारिश की गई थी कि कॉस्मेटिक उपचार करने वालों के लिए लाइसेंस अनिवार्य होना चाहिए. प्रशिक्षण के कड़े मानक तय किए जाने चाहिए. और यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि ऐसी प्रक्रियाएँ करने की अनुमति किन लोगों को मिले. कीओ समीक्षा के बाद सरकार ने स्वैच्छिक स्व-नियमन का मॉडल अपनाया था. इसी उद्देश्य से जेसीसीपी जैसी संस्थाएँ बनाई गईं. इनका मक़सद उपचार के मानक तय करना और उपचार देने वालों को मान्यता प्राप्त रजिस्टर में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करना था. लेकिन एंड्रयू रैंकिन का कहना है कि यह व्यवस्था सफल साबित नहीं हुई. उनका कहना है कि आज भी बड़ी संख्या में उपचार देने वाले लोग इन स्वैच्छिक व्यवस्थाओं से बाहर हैं. वे कहते हैं, "जिस बात का सही अनुमान नहीं लगाया गया था, वह यह थी कि बहुत से लोग इन मानकों का पालन करने में दिलचस्पी ही नहीं रखते." 2023 के अक्तूबर में एसेक्स की एक क्लिनिक में लिक्विड बीबीएल करवाने के चार दिन बाद बोल्टन की लुइज़ मोलर गंभीर रूप से बीमार पड़ गई थीं. 28 साल की लुइज़ को सेप्सिस हो गया था. इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया. अस्पताल के आपातकालीन विभाग से उन्होंने अपनी माँ जेनेट टेलर को फ़ोन किया था. लुइज़ ने कहा था, "माँ, मुझे लगता है कि मैं मर जाऊँगी." संक्रमण को पूरे शरीर में फैलने से रोकने के लिए सर्जनों को उनके बाएँ नितंब का एक बड़ा हिस्सा हटाना पड़ा. वहाँ की मांसपेशियाँ नष्ट हो चुकी थीं. जेनेट ने इस मामले की शिक़ायत पुलिस से की. उन्होंने यह प्रक्रिया करने वाले रिकी सॉयर के ख़िलाफ़ भी शिक़ायत दर्ज़ कराई. रिकी सॉयर कॉस्मेटिक इंजेक्शन के क्षेत्र में काफ़ी बदनाम नाम था. जोआन को गंभीर रक्त संक्रमण हुआ था. उन्हें बिना सर्ज़री वाली बीबीएल प्रक्रिया भी सॉयर ने ही दी थी. लुइज़ ग्रेटर मैनचेस्टर में रहती थीं और उनका उपचार एसेक्स में हुआ था. जेनेट के अनुसार, उन्हें बताया गया कि मामला एक पुलिस बल से दूसरे पुलिस बल को भेजना होगा. साल 2025 में बीबीसी न्यूज़ ने इस बारे में ग्रेटर मैनचेस्टर पुलिस और एसेक्स पुलिस से संपर्क किया. दोनों का कहना था कि जाँच की ज़िम्मेदारी दूसरे पुलिस बल की है. इस लेख के लिए भी हमने ग्रेटर मैनचेस्टर पुलिस से संपर्क किया. लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला. एसेक्स पुलिस ने कहा, "हम समझते हैं कि इस मामले से लोगों में निराशा पैदा हुई है." हालाँकि पुलिस ने फिर दोहराया कि जाँच की ज़िम्मेदारी ग्रेटर मैनचेस्टर पुलिस की है. एश्टन कॉलिन्स का मानना है कि लुइज़ का मामला क़ानून लागू करने वाली व्यवस्था की व्यापक विफलता को दिखाता है. वे कहते हैं, "लोगों को लगता है कि इन लोगों पर नज़र रखने वाला कोई न कोई ज़रूर होगा." "उन्हें यह भी लगता है कि गड़बड़ी होने पर किसी को जवाबदेह ठहराया जाएगा. लेकिन कई बार ऐसा नहीं होता." इसी दौरान जेनेट अपनी बेटी के लिए इंसाफ़ पाने की कोशिश कर रही थीं. वहीं, मैंने ग्राहक बनकर अपनी पहचान छिपाई. मैंने लंदन के बाहरी इलाक़े में एक दफ़्तर की इमारत में चल रहे अस्थायी क्लिनिक का दौरा किया. रिकी सॉयर वहाँ अब भी उपचार दे रहे थे. मुलाक़ात के दौरान उन्होंने मेरे शरीर में एक लीटर तक फ़िलर इंजेक्ट करने की पेशकश की. उसने ऐसी दवाएँ देने की भी पेशकश की जो केवल डॉक्टर के पर्चे पर मिलनी चाहिए थीं. उस समय वहाँ पर्चा लिखने का अधिकार रखने वाला कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था. इसके बावजूद उसने स्थानीय एनेस्थीसिया देने का सुझाव दिया. इन दृश्यों की समीक्षा प्लास्टिक सर्जन दलवी हुमज़ा ने की. उन्होंने इन गतिविधियों को 'हैरान करने वाला' और 'बेहद ख़तरनाक' बताया. 2025 के फ़रवरी में सॉयर पर बीबीसी की रिपोर्ट प्रसारित होने के बाद उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई हुई. ट्रैफ़र्ड काउंसिल की ओर से लाए गए क़ानूनी आदेश के तहत उनकी प्रैक्टिस करने पर रोक लगा दी गई. हाल ही में वह इस प्रतिबंध के उल्लंघन के आरोप में अदालत पहुँचे. लेकिन अदालत ने उन्हें निर्दोष क़रार दिया. गवाही के दौरान उन्होंने माना था कि इन प्रक्रियाओं के जोखिमों की उन्हें जानकारी थी. अब सॉयर इंग्लैंड और वेल्स में कहीं भी इस तरह का उपचार नहीं दे सकते. हालाँकि उस पर यह प्रतिबंध लगाने में कई साल लग गए. बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित. 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स्रोत: BBC Hindi

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