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फ़ीफ़ा ने विरोध के बाद प्राइवेट इन्वेस्टमेंट वाला प्लान वापस लिया

✍️ Admin 📅 01 August, 2026 ⏰ 09:01 AM 👁 55 views

इमेज स्रोत, Chris Brunskill/Fantasista/Getty Images फ़ीफ़ा प्रेसिडेंट जियानी इन्फ़ेंटिनो ने फ़ुटबॉल टूर्नामेंटों में निजी निवेशकों को हिस्सेदारी देने वाले विवादित प्लान को वापस ले लिया है. इस प्रस्ताव का कई बड़े फ़ुटबॉल संगठनों ने विरोध किया था. इन्फ़ेंटिनो ने कहा कि इस योजना के कारण फ़ुटबॉल जगत में मतभेद बढ़ रहे थे और अब यह प्लान अपने मूल उद्देश्य को पूरा नहीं कर पा रहा है. उन्होंने साफ़ किया कि फ़ीफ़ा इस प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाएगा. फ़ीफ़ा ने अपने 211 सदस्य देशों को इस प्लान का समर्थन करने के बदले 4 करोड़ डॉलर देने का प्रस्ताव रखा था. यह राशि पुरुष और महिला विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंटों में निजी निवेश को मंज़ूरी देने के समर्थन में दी जानी थी. यूरोपियन फ़ुटबॉल की संस्था यूएफ़ा ने भी इस प्लान का कड़ा विरोध किया था. यूएफ़ा ने चेतावनी दी थी कि अगर यह प्रस्ताव लागू किया गया तो उसके सदस्य देश विश्व कप के बहिष्कार पर विचार कर सकते हैं. फ़ीफ़ा अधिकारी केविन लामोर ने कहा कि इस गवर्निंग बॉडी को योजना से जुड़ी पूरी जानकारी नहीं दी गई थी. वहीं, प्रेसिडेंट इन्फ़ेंटिनो के सलाहकार कार्लोस कोर्डेरो ने भी विवाद के बाद अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया. उन्होंने कहा कि यह योजना फ़ुटबॉल के हित में सही फ़ैसला नहीं थी. अमेरिका, मध्य अमेरिका और कैरेबियाई देशों की फ़ुटबॉल संस्था कॉन्काकैफ़ और एशियाई फ़ुटबॉल कॉन्फ़ेडरेशन (एएफ़सी) ने भी इस प्रस्ताव का विरोध किया था. इन्फ़ेंटिनो इस समय दबाव में हैं, क्योंकि वह मार्च में होने वाले फ़ीफ़ा चुनाव में लगातार चौथी बार प्रेसिडेंट पद के लिए चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. इन्फ़ेंटिनो ने कहा कि अब उनकी कोशिश फ़ुटबॉल से जुड़े सभी पक्षों को फिर से एक साथ लाने की होगी, ताकि सभी मिलकर खेल के भविष्य के लिए आगे बढ़ सकें. इमेज स्रोत, Josh Chadwick/AFL Photos/via Getty Images प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार रात इंस्टाग्राम पर एक रील शेयर की, जिसमें उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर कुछ शरारती बच्चों ने मुझे और मेरी मां को भद्दी-भद्दी गालियां दीं. उन्होंने कहा कि बचपन ग़लतियों को सुधारने का अवसर भी होता है. ये गुमराह बच्चे हैं, इन्हें राह दिखाने का समय है, मैं इन्हें माफ़ करना चाहता हूं. उन्होंने कहा, "जंतर-मंतर पर जो हुआ देश और दुनिया ने देखा. कुछ शरारती बच्चों ने भद्दी और अपशब्दों वाली भाषा का इस्तेमाल किया, ऐसे शब्द जो किसी भी सभ्य समाज के लिए ठीक नहीं हैं. मुझे व्यक्तिगत रूप से अपशब्द कहे गए, और मेरी स्वर्गीय मां को भी गाली दी गई." पीएम मोदी ने कहा, "बचपन में ग़लतियां होती हैं, बचपन ग़लतियों को सुधारने का अवसर भी होता, यही तो बचपना है. मैं समाज के अंदर मौजूद आक्रोश को भली-भांति समझ सकता हूँ. यह एक कल्चरल शॉक जैसा है कि हमारी बेटियां इस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल कैसे कर सकती हैं. मैं उन बच्चों को माफ़ करना चाहता हूं." "समय आ गया है कि हम इन बच्चों को अपनाएं और उन्हें सही रास्ता दिखाएं. वे रास्ता भटक गए हैं, और उन्हें सही रास्ता दिखाना हमारा कर्तव्य है. उन्हें सज़ा देना, अदालती कार्यवाही में उलझाना और समाज में परेशान करना, इनमें से किसी से भी स्थिति नहीं बदलेगी. मैं उन्हें माफ़ करना चाहता हूं. समाज को भी इसे स्वीकार करना चाहिए. मेरे दिल में बस एक ही भावना है." उन्होंने कहा, "ये बच्चे भी हमारे ही हैं. उन्हें सही रास्ता दिखाना हमारा कर्तव्य है. जो भटक गए हैं, उन्हें सही रास्ता दिखाना मुश्किल है, लेकिन यह एक ऐसा काम है जो हमें करना ही होगा. मैं इन बच्चों से कहता हूं, आइए देश के लिए हम सब मिलकर आगे बढ़ें. आइए कुछ नया सीखें और अपनी ग़लतियों से भी सीखें." गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रतिनिधियों और सरकार के मंत्रियों (केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह) के बीच हुई बातचीत में सहमति बनी थी कि प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले छात्रों पर कार्रवाई नहीं होगी. इमेज स्रोत, Marcos Moreno/Anadolu via Getty Images स्पेन के स्यूटा में मोरक्को से बड़े पैमाने पर प्रवासियों के पलायन के दौरान भगदड़ और अव्यवस्था में 57 लोगों की मौत हो गई. स्थानीय मीडिया के मुताबिक़, इस दौरान करीब 60,000 प्रवासियों ने सीमा पार करने की कोशिश की, जिससे हालात बेक़ाबू हो गए. घटना के बाद स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने इसके लिए मानव तस्करी गिरोहों को ज़िम्मेदार ठहराया है. सांचेज़ ने कहा कि यह घटना स्पेन की 'क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन' है. वहीं, स्पेन के अधिकारियों के अनुसार, शुक्रवार शाम तक 48,000 से अधिक प्रवासी स्वेच्छा से मोरक्को लौट चुके थे. यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब स्पेन के सर्वोच्च न्यायालय ने फ़ैसला दिया है कि स्यूटा और मेलिला पहुंचने की कोशिश में समुद्र में पकड़े गए प्रवासियों को बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए सीधे मोरक्को वापस नहीं भेजा जा सकता. वापस लौट रहे एक प्रवासी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, "यह बिल्कुल भी अच्छा नहीं है. यहां लोग मर रहे हैं. मैं हाथ जोड़कर कहता हूँ कि अगर आप अभी तक नहीं आए हैं, तो मत आइए." उल्लेखनीय है कि उत्तर अफ़्रीका के तट पर स्थित स्यूटा स्पेन का एक छोटा इलाका है. यह जगह लंबे समय से उन प्रवासियों के लिए यूरोप पहुंचने का रास्ता रही है, जो बेहतर ज़िंदगी की तलाश में वहां जाना चाहते हैं. गिलगित बाल्टिस्तान में काराकोरम पर्वतमाला स्थित ब्रॉड पीक पर आए हिमस्खलन (एवलांच) के बाद चलाए जा रहे राहत एवं बचाव अभियान में अब तक तीन पर्वतारोहियों की मौत की पुष्टि हुई है. मृतकों की पहचान अमेरिका की मैलोरी गीस, ओमान की नाधिरा अहमद अब्दुल्ला अल हार्थी और नेपाल के पूर बहादुर गुरूंग (युक्ता) के रूप में हुई है. तीनों के शव हेलीकॉप्टर के ज़रिए अस्पताल पहुंचाए गए हैं, जहां अन्य क़ानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं. अधिकारियों के अनुसार, प्रसिद्ध पर्वतारोही निर्मल पुर्जा (निम्स दाई) के नेतृत्व में 10 सदस्यीय दल ब्रॉड पीक पर चढ़ाई कर रहा था. गुरुवार को चढ़ाई के दौरान अचानक हिमस्खलन आने के बाद पूरे दल से संपर्क टूट गया था, जिसके बाद बड़े स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया. पाकिस्तान अल्पाइन क्लब ने शुरुआती जानकारी में चार शव मिलने की बात कही थी. हालांकि, बाद में क्लब ने स्पष्ट किया कि मौक़े से दो शव और एक शव का हिस्सा बरामद हुआ है. क्लब के अनुसार, ड्रोन की मदद से कुछ अन्य पर्वतारोहियों का पता लगाया गया है, लेकिन ख़राब मौसम के कारण उनकी स्थिति की पुष्टि नहीं हो सकी. मौसम अनुकूल होने पर बचाव अभियान शनिवार को फिर से शुरू किया जाएगा. पाकिस्तान अल्पाइन क्लब की कम्यूनिकेशन लीड नैला कियानी ने कहा कि 24 घंटे से अधिक समय तक इतनी कठिन परिस्थितियों में जीवित बचने की संभावना बेहद कम होती है. हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि किसी चमत्कार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. बचाव अभियान के लिए पाकिस्तानी सेना ने दो हेलीकॉप्टर, राहतकर्मियों की टीम और विशेष उपकरण तैनात किए हैं. गौरतलब है कि निर्मल पुर्जा साल2019 में दुनिया की 8,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली सभी 14 चोटियों को महज साढ़े छह महीने में फ़तह कर विश्व रिकॉर्ड बना चुके हैं. ब्रॉड पीक की ऊंचाई 8,047 मीटर है और इसे दुनिया की सबसे कठिन पर्वत चोटियों में गिना जाता है. यह विश्व की 12वीं सबसे ऊंची चोटी है. इस पर पहली सफल चढ़ाई वर्ष 1957 में हुई थी. इसके बाद से यहां कई हादसों में दर्जनों पर्वतारोहियों की जान जा चुकी है. बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लाइव पेज पर आपका स्वागत है. मैं बीबीसी संवाददाता रौनक भैड़ा अब से दोपहर दो बजे तक आप तक अहम ख़बरें पहुंचाऊंगा. कल के लाइव पेज की ख़बरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. बीबीसी न्यूज़ हिन्दी पर मौजूद कुछ अहम ख़बरों को पढ़ने के लिए उनके साथ दिए गए लिंक पर क्लिक करें. ट्रंप ने बताया हमास डालेगा हथियार, लेकिन इसराइल ने रखी ये शर्त इसराइल को हथियार देने से अंतरराष्ट्रीय संगठन ने भारत को किया मना तो विदेश मंत्रालय ने गिनाए तर्क 23 साल पहले लापता हुए बेटे से मिलने जब तमिलनाडु से पंजाब पहुंची एक मां जंतर-मंतर पर पुलिस का फ़ायरिंग से इनकार, फिर नूतन टोप्पो को कैसे लगी 'गोली'? चार नहीं बल्कि आठ राउंड हुई थी एके 47 से फ़ायरिंग, सिवान पुलिस की थ्योरी पर कई सवाल

स्रोत: BBC Hindi

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