पूर्ण संस्करण देखें
⚡ AMP पेज | पूर्ण वेबसाइट देखें
Death

रांची में युवाओं का प्रदर्शन, स्टूटेंड्स क्यों कर रहे सीबीआई जाँच की मांग

✍️ Admin 📅 03 August, 2026 ⏰ 12:34 PM 👁 44 views

इमेज स्रोत, Mohammad Sartaj Alam झारखंड की राजधानी रांची में छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं. यहां पिछले कई दिनों से सिविल सेवा और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों का प्रदर्शन जारी है. स्टूडेंट्स लीडर देवेंद्र नाथ महतो ने कहा, "एक महीने पहले जेपीएससी (झारखंड लोक सेवा आयोग) की 14वीं प्रारंभिक परीक्षा का रिज़ल्ट आया. तब से यह विवाद शुरू हुआ है. इस मामले में कई लोग गिरफ़्तार हुए. अनियमितताओं की वजह से इस पीटी परीक्षा को रद्द किया जाना चाहिए. " 29 जुलाई से ये स्टूडेंट जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जुटकर झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ़ आवाज़ उठा रहे हैं. झारखंड में प्रशासनिक और अन्य सरकारी नौकरियों में भर्ती के लिए जेपीएससी और जेएसएससी प्रमुख संस्थाएं हैं. प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का आरोप है कि इन आयोगों की परीक्षाओं में लंबे समय से अनियमितताएं होती रही हैं और इससे लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है. इमेज स्रोत, Mohammad Sartaj Alam ये प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं जबकि झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा-2025 की प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट जारी होने पर धांधली के आरोप सामने आए हैं. जिसके बाद मुख्य परीक्षा स्थगित कर दी गई है. विवाद बढ़ने पर राज्य सरकार ने मामले की जांच सीआईडी को सौंपी. सीआईडी से चली पूछताछ के बाद बीती 22 जुलाई को जेपीएससी अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने इस्तीफ़ा दे दिया. प्रदर्शन स्थल पर हर शाम को जुट रहे प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि इस मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए. हालांकि इस मांग में आम अभ्यर्थियों के साथ बीजेपी समर्थित, आजसू और जेएलकेएम समर्थित छात्र भी शामिल हो रहे हैं. रविवार को छात्र आंदोलन के बीच पहुंचे नेता देवेंद्र नाथ महतो ने आमरण अनशन पर बैठने की घोषणा की है. वे रांची सीट पर लोकसभा चुनाव, 2024 में जेएलकेएम के उम्मीदवार थे. इमेज स्रोत, Mohammad Sartaj Alam देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां. अभ्यर्थी अपने हाथों में कई मांगों से जुड़े पोस्टर और बैनर थामे दिखाई दे रहे हैं. बीबीसी हिन्दी ने कुछ ग़ैर राजनीतिक प्रदर्शनकारियों से बात की. हजारीबाग के पीयूष कुमार जो पिछले आठ वर्षों से जेपीएससी की तैयारी कर रहे हैं. प्रदर्शन स्थल पर उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य गठन के बाद 26 वर्षों में आयोग ने केवल गिनी-चुनी परीक्षाएं आयोजित कराईं, जबकि इसके साथ ही बने उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ में लगभग नियमित भर्ती परीक्षाएं हुई हैं. पलामू की अर्चना कुमारी ने कहा कि राज्य में भर्ती परीक्षाओं की नियमितता न होने से अभ्यर्थियों को कई साल तक एग्ज़ाम के लिए इंतज़ार करना पड़ता है. अर्चना कुमारी कहती हैं, "कई बार परीक्षाओं को पिछले साल की भर्ती से जोड़ दिया जाता है ताकि नियमितता रहे, इससे उम्मीदवारों की उम्र सीमा पर असर पड़ता है. जैसे- 14वीं जेपीएससी परीक्षा को सरकार ने 11वीं, 12वीं और 13वीं के साथ मिलाकर संयुक्त जेपीएससी का नाम दिया है." छात्र कार्यकर्ता शमीम अली मानते हैं कि राज्य गठन के बाद लंबे समय तक स्थिर सरकार न होने, नीतियां बनने में देरी और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी के कारण ऐसे हालात बने हैं. अभ्यर्थी पीयूष बोले, "जेपीएससी की पहली और दूसरी परीक्षा में जो धांधली सामने आई थी, उस मामले में चार्ज़शीट दाख़िल हो जाने के इतने साल के बाद भी केस लटका हुआ है." इमेज स्रोत, Mohammad Sartaj Alam वहीं, विधायक अरूप चटर्जी का कहना है कि जेपीएससी की पहली और दूसरी परीक्षा से जुड़े मामले अब भी न्यायिक प्रक्रिया में लंबित हैं. चटर्जी कहते हैं, "मैं नाम नहीं लूंगा मगर इस मामले में कई सफेदपोश घरानों के लोग जुड़े हैं, जिन्हें सभी सरकारें बचाने की कोशिश कर रही हैं. ऐसे में जब न्याय नहीं मिलेगा तो छात्र सड़क पर तो आएंगे ही." उल्लेखनीय है कि जेपीएससी की पहली और दूसरी सिविल सेवा परीक्षा में कथित धांधली की जांच के दौरान तत्कालीन अध्यक्ष समेत कई लोगों को अभियुक्त बनाया गया था. मामला अब भी अदालत में विचाराधीन है. इसी साल जनवरी में द्वितीय जेपीएससी परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इन्फोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की थी. इमेज स्रोत, Mohammad Sartaj Alam 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा का विज्ञापन बीती 29 जनवरी को निकला. 19 अप्रैल को राज्य के 564 केंद्रों पर इसकी प्रारंभिक परीक्षा हुई. 21 अप्रैल को माॅडल उत्तर जारी कर अभ्यर्थियों से आपत्तियां मांगी गईं. फिर बीती दो जुलाई को प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट आया और यहीं से विवाद खड़ा हो गया. सोशल मीडिया पर कथित ओएमआर शीट वायरल होने लगीं और दावा किया जाने लगा कि सेलेक्शन पाने वाले कुछ कैंडिडेट्स ने पूरे प्रश्न तक हल नहीं किए थे. विवाद बढ़ा तो 25 से 27 जुलाई को आयोजित होनेवाली मुख्य परीक्षा को स्थगित कर दिया गया. दरअसल इस प्रारंभिक परीक्षा में सौ-सौ सवालों के दो पेपर जनरल स्टडी-एक और झारखंड जनरल स्टडी-दो हुए. प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का आरोप है कि सोशल मीडिया पर एक अभ्यर्थी की ओएमआर शीट वायरल हो गई, जिससे पता लग रहा है कि उसने 100 प्रश्नों में महज़ 48 प्रश्नों को हल किया मगर उसका सेलेक्शन हो गया. प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का आरोप है कि "कई ओएमआर शीटों को देखकर पता लगता है कि धांधली हुई है." यह मामला इतना गंभीर हो गया कि ओएमआर शीट के जरिए गड़बड़ियों का दावा किए जाने के मामले की जांच कर रही सीआईडी ने एक पब्लिक नोटिस जारी किया. उन्होंने परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों से कहा है कि 30 जुलाई से पांच अगस्त के बीच वे अपने दोनों पेपर की ओएमआर सीट की फोटो कॉपी को आयोग को ईमेल के जरिए उपलब्ध करवाएं. इतना ही नहीं, अगर कोई ओएमआर शीट न दे पाने में सक्षम है तो उसे लिखित में कारण बताकर अपना रोल नंबर देना होगा. यानी प्रारंभिक परीक्षा पास करने वाले सभी अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट रेडार पर आ गई है. इस मामले में सीआईडी ने प्रारंभिक परीक्षा में पास हुए एक अभ्यर्थी सुमन सौरभ को गिरफ़्तार किया, जिसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. सिविल सेवा समेत अन्य परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर 21 जुलाई को जेपीएससी मुख्यालय सहित सात ठिकानों पर सीआईडी ने छापा मारा. इसमें उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, अन्य स्टाफ और आउटसोर्सिंग एजेंसी टीडीपीएल के ठिकाने भी शामिल थे. इसी दौरान वर्तमान जेपीएससी अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने 22 जुलाई 2026 को पद से इस्तीफ़ा दे दिया. उनसे सीआईडी ने कई दिनों से पूछताछ की थी. वे झारखंड के मुख्य सचिव रह चुके हैं. प्रदर्शनकारी छात्रों ने परीक्षा संचालन से जुड़े टेंडर आवंटन पर भी सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य टीडीपीएल को सौंपे गए, जबकि उस एजेंसी पर पहले भी अनियमितताओं के आरोप लग चुके थे. छात्रों का कहना है कि आवेदन प्रक्रिया, प्रवेश पत्र निर्माण, प्रश्नपत्र छपाई, ओएमआर स्कैनिंग और परिणाम तैयारी जैसे संवेदनशील कामों के लिए इस एजेंसी का चयन किन आधारों पर हुआ, इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए. जबकि इस मामले में उठ रहे सवालों के बीच आयोग के सचिव ने 26 जुलाई को सूचना प्रकाशित कर कहा कि आयोग ने 20 मई 2025 को इस एजेंसी को परीक्षा संबंधी सभी कार्यों से मुक्त करते हुए गैर सूचीबद्ध कर दिया था. उसके बाद हुई किसी भी परीक्षा में इस एजेंसी से कोई काम नहीं लिया गया. आंदोलन कर रहे छात्रों ने सरकार के समक्ष कई मांगें रखी हैं: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) परीक्षा में हुई गड़बड़ी मामले में सीआईडी की कार्रवाई के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 21 जुलाई को कैबिनेट बैठक के बाद प्रोजेक्ट भवन में मीडियाकर्मियों से बातचीत की थी. सीआईडी जांच और परीक्षाओं के मामले में मीडिया की ओर से पूछे गए एक सवाल पर उन्होंने कहा था, "हमने कई एग्ज़ाम सफलतापूर्वक कराए. चूंकि सिस्टम में कुछ छिपे हुए लोग हैं, ऐसी एक्टिविटीज़ हैं जो समय पर ही सामने आती हैं, ऐसे लोग वर्षों से जगह-जगह पर बैठकर गलत काम में संलिप्त रहे हैं तो आगे आप देखेंगे कि कई चीजें पारदर्शिता के साथ होंगी." गौरतलब है कि झारखंड में स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग का प्रभार वर्तमान में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पास है. बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित. BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.

स्रोत: BBC Hindi

📤 शेयर करें: