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हाई कोर्ट में 30 साल में 80 हजार, SC में 10 साल में 10 हजार केस पेंडिंग

✍️ Admin 📅 03 August, 2026 ⏰ 11:00 AM 👁 27 views

भारत में कोर्ट के संबंध में एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसके मुताबिक 2011 से अब तक अदालतों के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने और न्याय व्यवस्था में टेक्नोलॉजी को शामिल करने पर 9,800 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए जा चुके हैं. इसके बावजूद कई दशकों से पेंडिंग मामलों के निपटारे पर इसका बहुत ज्यादा असर देखने को नहीं मिला है. सुप्रीम कोर्ट में 10,000 से ज्यादा मामले ऐसे हैं, जो 10 साल से ज्यादा समय से पेंडिंग हैं. इनमें 558 मामले 20 साल से ज्यादा समय से और 26 मामले 30 साल से ज्यादा समय से पेंडिंग पड़े हुए हैं. देश के 25 हाई कोर्ट में 80,000 से ज्यादा मामले ऐसे हैं जो 3 दशक से भी ज्यादा समय से पेंडिंगहैं.

पिछले सप्ताह संसद में पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने मामलों के निपटारे की जिम्मेदारी न्यायपालिका पर डाली. उन्होंने कहा कि न्यायपालिका ने मामलों के निपटारे के लिए कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं की है. उन्होंने कहा कि अदालतों में मामलों का समय पर निपटारा कई बातों पर निर्भर करता है. इनमें पर्याप्त संख्या में जजों और न्यायिक अधिकारियों की उपलब्धता, सहायक स्टाफ, अदालतों का ठोस इंफ्रास्ट्रक्चर, मामलों से जुड़े फैक्टों की जटिलता, सबूतों का रूप, वकीलों, जांच एजेंसियों, गवाहों और पक्षकारों का सहयोग और कानूनी प्रक्रियाओं का सही इस्तेमाल शामिल है.

स्रोत: ABP Hindi

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