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Death

बांग्लादेश छोड़ने के बाद पहली बार शेख़ हसीना की प्रेस कॉन्फ़्रेंस, वापस लौटने पर क्या बोलीं?

✍️ Admin 📅 05 August, 2026 ⏰ 08:25 PM 👁 59 views

सत्ता से बेदख़ल किए जाने के दो साल बाद बुधवार को बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने पहली बार नई दिल्ली में वर्चुअल प्रेस कॉन्फ़्रेंस की. साल 2024 में स्टूडेंट्स के आंदोलन के बाद शेख़ हसीना को बांग्लादेश छोड़कर भारत आना पड़ा था. शेख़ हसीना ने इस प्रेस कॉन्फ़्रेंस में अपनी पार्टी अवामी लीग से लेकर बांग्लादेश वापस लौटने के मुद्दों पर बात की है. उन्होंने एक बार फिर इस बात को दोहराया है कि वो दिसंबर में बांग्लादेश वापस लौटेंगी. उन्होंने कहा कि "मैं अपने लोगों के पास वापस लौटूंगी." साथ ही उन्होंने कहा कि वो सही समय पर अपनी वापसी की तारीख़ और दूसरी जानकारियां साझा करेंगी. नई दिल्ली में बुधवार को फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया द्वारा होस्ट किए गए एक मीडिया इंटरेक्शन में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री भी शामिल हुईं. ऐसा माना जा रहा था कि वह इस इवेंट को वीडियो के ज़रिए वर्चुअली संबोधित करेंगी, लेकिन उन्होंने सिर्फ़ ऑडियो के ज़रिए अपनी बात रखी और पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक यह तुरंत साफ़ नहीं हुआ कि शेख़ हसीना वीडियो पर क्यों नहीं आईं, जबकि इस दौरान उनकी पार्टी के साथी और उनके बेटे वीडियो पर दिखाई दिए थे. देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां. शेख़ हसीना ने कहा, "वे मुझे मनगढ़ंत केस में फंसाने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन डर लोगों के प्रति मेरे फ़र्ज़, मेरी ज़िंदगी या उससे आगे के बारे में फ़ैसला नहीं कर सकता." उन्होंने कहा कि उन्होंने पिछले दो सालों में अपने "प्यारे बांग्लादेश को तकलीफ़ झेलते हुए देखा है." उन्होंने कहा, "यह वह बांग्लादेश नहीं है जिसे हमने बनाया था. यह वह बांग्लादेश नहीं है, जिसके लिए 1971 में 30 लाख लोगों ने बलिदान दिया था." जुलाई-अगस्त 2024 के आंदोलन को लेकर शेख़ हसीना ने कहा, "सचाई यह है कि यह कोई शांतिपूर्ण स्टूडेंट्स आंदोलन नहीं था. शुरुआत से ही मेरी सरकार ने बातचीत, कानूनी प्रक्रिया और धैर्य के ज़रिए इस मुद्दे को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की कोशिश की." उन्होंने आरोप लगाया कि सुधारों की मांग के पीछे कुछ संगठित समूह काम कर रहे थे, जो स्टूडेंट्स की मांगों को एक हिंसक राजनीतिक हथियार में बदलना चाहते थे. पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने कहा, "मैं एक ऐसी व्यक्ति के तौर पर बोल रही हूं जिसने अपनी ज़िंदगी बांग्लादेश के लोगों के साथ बिताई है और जिसे अपने देश से दूर जाने पर मजबूर होना पड़ा, लेकिन मैं कभी भी अपने लोगों से अलग नहीं हुई." पत्रकारों के सवालों का जवाब देने से पहले शेख़ हसीना एक बयान पढ़कर सुनाया. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में डर लोगों के घरों, दफ़्तरों और हर तरफ़ फैल गया है. छात्र-छात्राओं के आंदोलन के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, "मैंने खुद छात्रों से बातचीत की पहल की और उन्हें प्रधानमंत्री आवास गणभवन आने का निमंत्रण दिया. तीन मंत्रियों ने भी उनसे बातचीत की." "योजनाबद्ध तरीके से झूठा प्रचार फैलाया गया. वास्तविक छात्रों की भावनाओं का इस्तेमाल किया गया, जबकि संगठित समूहों ने उनके आंदोलन को हिंसा और सत्ता परिवर्तन के लिए एक आड़ के रूप में इस्तेमाल किया." शेख हसीना ने कहा कि यह केवल अचानक शुरू हुआ छात्र आंदोलन नहीं था. इसका कोई दिखाई देने वाला या जवाबदेह नेतृत्व नहीं था. निर्देश पर्दे के पीछे से दिए जा रहे थे. उन्होंने कहा 15 जुलाई के बाद से स्टूडेंट के आंदोलन का स्वरूप बदल गया. हत्याएं, आगजनी, हमले और लूटपाट शुरू हो गई. सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया. बांग्लादेश टेलीविजन पर हमला किया गया और उसमें आग लगा दी गई. शेख़ हसीना ने दावा किया, "कानून लागू करने वाली एजेंसियों पर भी संगठित हमले हुए. पुलिसकर्मियों और दूसरे अधिकारियों की हत्या कर दी गई और उनके शव फ्लाईओवर से लटका दिए गए. करीब 460 पुलिस थानों पर हमला किया गया. चौकियों में आग लगा दी गई और कुछ जगहों पर सुरक्षाकर्मी इमारतों के भीतर फंस गए और जिंदा जल गए. हथियार लूट लिए गए. अधिकारियों को पीट-पीटकर मार डाला गया." उन्होंने कहा, "उत्पीड़ित पुलिसकर्मियों के अनुसार, कम से कम 3,000 पुलिसकर्मी मारे गए, उन पर हमला हुआ, उन्हें प्रताड़ित किया गया या उनके साथ गंभीर हिंसा की गई." 78 वर्षीय शेख़ हसीना ने पिछले महीने रॉयटर्स को एक इंटरव्यू में बताया था कि वह साल के आख़िर तक अपने देश लौटने और वहां अधिकारियों के सामने सरेंडर करने का प्लान बना रही हैं. साल 2024 में हुए स्टूडेंट्स मूवमेंट के बाद देश की युद्ध अपराध अदालत में उनके ख़िलाफ़ मामला चला था. उन पर आरोप था कि उन्होंने स्टूडेंट्स विद्रोह के दौरान जानलेवा कार्रवाई का आदेश दिया था. उन्होंने इन आरोपों से इनकार किया था. हालांकि, युद्ध अपराध अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए नवंबर 2025 में मौत की सज़ा सुनाई थी. इस साल फ़रवरी में चुनावों के बाद बीएनपी नेता तारिक़ रहमान ने प्रधानमंत्री का पद संभाला था. उन्होंने मंगलवार को देश के मीडिया को शेख़ हसीना के बयान पब्लिश न करने की चेतावनी दी थी, और कहा था कि ऐसा करना 2024 के कोर्ट के आदेश का उल्लंघन होगा जो उनके भाषणों और बयानों को पब्लिश या ब्रॉडकास्ट करने पर रोक लगाता है. हसीना की नई बातों पर बांग्लादेश सरकार की तरफ से तुरंत कोई बयान नहीं आया है. बांग्लादेश ने कई बार भारत से हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की है. भारत ने कहा है कि उसे निवेदन मिल गया है और उसकी जांच की जा रही है. बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित. BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.

स्रोत: BBC Hindi

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