पूर्ण संस्करण देखें
⚡ AMP पेज | पूर्ण वेबसाइट देखें
Death

घी क्या तेल से बेहतर है? ख़ाली पेट घी खाने से क्या चर्बी घटती है? जानिए 8 अहम सवालों के जवाब

✍️ Admin 📅 07 August, 2026 ⏰ 08:02 AM 👁 45 views

"ख़ाली पेट घी खाने से चर्बी कम होती है." "घी पेट के अल्सर को ठीक करता है." "घी से दिल का दौरा पड़ सकता है." घी के बारे में हम अक्सर ऐसी कई विरोधाभासी बातें सुनते हैं. हम न केवल इन्हें सुनते हैं बल्कि कुछ लोग वास्तव में इन पर अमल भी करते हैं. घी में 60 से 65 फ़ीसदी सैचुरेटेड फ़ैट, 20 से 25 फ़ीसदी मोनोअनसैचुरेटेड फ़ैट, 3 से 4 फ़ीसदी पॉलीअनसैचुरेटेड वसा और कुछ विटामिन होते हैं. इसमें शरीर के लिए ज़रूरी अच्छे फैट के साथ ही ऐसा सेचुरेटेड फैट भी होता है जो शरीर में कोलेस्ट्रॉल, विशेषकर नुक़सान करने वाले बैड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ा सकता है. घी खाने के नुक़सान के बारे में तो चर्चा होती रही है, लेकिन अब इसके फ़ायदों के बारे में भी ख़ूब बातें हो रही हैं. इनमें से कौन सी बात सच है और कौन सी झूठ? घी के बारे में फैली ग़लत धारणाओं और सही जानकारी के बारे में हमने डॉक्टरों से बात की. कई डॉक्टरों का कहना है कि सिर्फ़ घी खाने से वज़न नहीं बढ़ता. बीबीसी से बात करते हुए हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. रिफ़ाई शौक़त अली ने कहा, "कोई भी भोजन अमृत या ज़हर नहीं होता. यह इस बात पर निर्भर करता है कि उसे कितनी मात्रा में खाया जाता है." उन्होंने कहा, "अगर पूछा जाए कि घी खाने से वज़न बढ़ता है या नहीं, तो सीधा जवाब है- 'नहीं'. लेकिन घी ज़्यादा मात्रा में खाने से शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की आशंका रहती है." डॉ. रिफ़ाई का कहना है कि घी के सेवन से बढ़ने वाली शरीर की चर्बी हार्ट की सेहत को प्रभावित कर सकती है. डॉ रिफ़ाई बताते हैं, "घी सीधे जाकर हृदय की रक्त नलियों में नहीं जमता. यह सीधे हृदय रोग भी पैदा नहीं करता. हम जो भी भोजन खाते हैं, वह इस तरह सीधे रक्त नलियों में नहीं पहुंचता. लेकिन अगर घी का सेवन ज़्यादा मात्रा में किया जाए, तो शरीर में चर्बी बढ़ सकती है. यह साबित हो चुका है कि शरीर में चर्बी बढ़ने से हृदय संबंधी समस्याओं और हृदय को नुक़सान पहुंचने का ख़तरा बढ़ जाता है." देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां. बीबीसी से बात करते हुए पोषण विशेषज्ञ मीनाक्षी बजाज ने बताया कि "आईसीएमआर 2024 की गाइडलाइन्स के हिसाब से एक स्वस्थ वयस्क, एक दिन में कुल मिलाकर 27 से 30 ग्राम तक वसा या तेल का सेवन कर सकता है." अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की सिफ़ारिश के अनुसार, सैचुरेटेड फ़ैट से मिलने वाली कैलरी, शरीर की कुल दैनिक कैलरी का 6 प्रतिशत से कम होनी चाहिए. घी, मक्खन, पनीर, लाल मांस और अन्य पशु -आधारित खाद्य पदार्थों में सैचुरेटेड वसा ज़्यादा मात्रा में होता है. पिछले कई दशकों में हुए वैज्ञानिक अध्ययनों से यह साबित हुआ है कि सैचुरेटेड वसा शरीर में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ा सकता है. एलडीएल को आमतौर पर बैड कोलेस्ट्रॉल माना जाता है. इसका स्तर बढ़ने से हृदय रोगों का ख़तरा भी बढ़ सकता है. वे उदाहरण देते हुए बताते हैं कि अगर किसी व्यक्ति को एक दिन में 2,000 कैलरी की ज़रूरत है, तो उसमें से 120 कैलरी से ज़्यादा सैचुरेटेड फ़ैट से नहीं आनी चाहिए. उन्होंने कहा कि घी में लगभग 60 से 65 फ़ीसदी तक सैचुरेटेड वसा होता है इसलिए घी का ज़्यादा सेवन करने से शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ सकता है. एक सरकारी अस्पताल में कार्यरत जनरल फ़िजीशियन और प्रोफ़ेसर चंद्रशेखर का कहना है कि घी में मौजूद मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड फ़ैट शरीर के लिए ज़रूरी होते हैं. वह कहते हैं, "घी में लिनोलिक एसिड, ब्यूट्रिक एसिड और कुछ दूसरे फ़ायदेमंद एसिड या अम्ल पाए जाते हैं. ये पाचन में मदद कर सकते हैं." हालांकि, हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. रिफ़ाई शौक़त अली चेतावनी देते हैं कि घी को दवा की तरह नहीं लेना चाहिए. वे कहते हैं, "हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि घी में सैचुरेटेड फ़ैट या वसा की मात्रा ज़्यादा होती है. इसलिए भले ही इसमें कुछ लाभकारी एसिड मौजूद हों, फिर भी घी का सेवन आधे चम्मच से ज़्यादा नहीं करना चाहिए." जहाँ तक यह दावा है कि घी पेट के अल्सर को ठीक कर देता है, इसे साबित करने वाले पुख़्ता मेडिकल या वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं. डॉ. रिफ़ाई का कहना है कि यह धारणा पूरी तरह ग़लत है. वे कहते हैं, "घी खाने से शरीर की चर्बी कम नहीं होती. घी में 60% से 65% तक सैचुरेटेड फ़ैट होता है, जो शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ा सकता है. डॉ रिफ़ाई कहते हैं कि ऐसे में यह मानने का कोई आधार नहीं है कि घी खाने से शरीर की चर्बी कम हो जाएगी. डॉक्टरों का मानना है कि बच्चों को घी देना उनके विकास में मदद कर सकता है. डॉ. चंद्रशेखर कहते हैं, "घी बच्चों के तंत्रिका तंत्र के विकास, त्वचा के स्वास्थ्य और पाचन के लिए फ़ायदेमंद हो सकता है." डॉ. रिफ़ाई के अनुसार, "बच्चों का मेटाबॉलिज़्म वयस्कों से अलग होता है. घी में मौजूद कुछ लाभकारी एसिड बच्चों के पेट के स्वास्थ्य के लिए मददगार हो सकते हैं." वे कहते हैं, "घी में वसा में घुलने वाले विटामिन, जैसे विटामिन-ई और विटामिन-के पाए जाते हैं. ये भी बच्चों की वृद्धि और विकास में सहायक होते हैं." इमेज स्रोत, Nasir Kachroo/NurPhoto via Getty Images डॉ. रिफ़ाई का कहना है कि घी को तेल से बेहतर नहीं कहा जा सकता. वे कहते हैं, "तेल की जगह घी में खाना पकाकर नियमित रूप से खाना स्वास्थ्य के लिए काफ़ी नुक़सानदायक हो सकता है. घी वाला डोसा या घी के साथ इडली जैसी चीज़ें कभी-कभार स्वाद के लिए खाई जा सकती हैं. लेकिन इन्हें बार-बार खाना शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है." उन्होंने कहा, "ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है जो यह साबित करता हो कि घी, तेल से बेहतर है. हालांकि, जैसे घी का सेवन सीमित रखना ज़रूरी है, वैसे ही तेल का इस्तेमाल भी नियंत्रित मात्रा में होना चाहिए." डॉ. रिफ़ाई का कहना है कि मधुमेह के मरीज़ों, शरीर में अधिक चर्बी वाले लोगों और हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित लोगों को घी से बचना चाहिए. वे कहते हैं, "ऐसे लोगों के लिए घी को पूरी तरह छोड़ देना ही बेहतर है. घी में कुछ लाभकारी अम्ल ज़रूर होते हैं, लेकिन किसी भी भोजन का मूल्यांकन उसके फ़ायदे और जोखिम दोनों को देखकर करना चाहिए." उन्होंने कहा, "अगर इस आधार पर देखा जाए, तो मधुमेह के मरीज़ों और उच्च रक्तचाप वाले लोगों को घी का सेवन नहीं करना चाहिए." बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित. BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.

स्रोत: BBC Hindi

📤 शेयर करें: