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ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने फ्रांस को क्या नसीहत दी?

✍️ Admin 📅 13 August, 2026 ⏰ 09:03 AM 👁 44 views

इमेज स्रोत, Karar Essa/Anadolu via Getty Images ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराग़ची ने फ्रांस पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि फ्रांस जैसे देशों को दुनिया को “मानवाधिकार” और अंतरराष्ट्रीय कानून पर भाषण देना बंद कर देना चाहिए. अब्बास अराग़ची ने ग़ज़ा में इसराइल की कार्रवाई के लिए फ्रांस के समर्थन और ईरान के ख़िलाफ़ कथित आक्रामकता का जिक्र करते हुए कहा कि इन नीतियों ने फ्रांस के उस "ऊंचे नैतिक स्थान" को खत्म कर दिया है, जिसे वह अपने लिए मानता था. अराग़ची ने एक्स पर लिखा कि इस मामले में “पाखंड साफ नजर आता है और यह शर्मनाक है.” अराग़ची का यह बयान फ्रांस की विदेश नीति और मध्य-पूर्व में उसकी भूमिका को लेकर ईरान की कड़ी नाराजगी को दर्शाता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस गेब्रियेसस ने चेतावनी दी है कि अगर डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में फैला इबोला का मौजूदा प्रकोप अगर इसी रफ्तार से बढ़ता रहा, तो यह अब तक का सबसे घातक इबोला प्रकोप बन सकता है. टेड्रोस ने पत्रकारों से कहा कि 2026 का यह प्रकोप मौजूदा रफ्तार पर 2014-2016 के इबोला प्रकोप को भी पीछे छोड़ सकता है. उस दौरान कम से कम 11 हज़ार लोगों की मौत हुई थी. इस साल के इबोला प्रकोप की आधिकारिक घोषणा 15 मई को की गई थी. अब तक कम से कम 4,300 मामले सामने आ चुके हैं और 2,000 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. तीन महीने में फैलाव रोकने की कोशिश डब्ल्यूएचओ ने बुधवार को कहा कि वह अगले तीन महीनों में वायरस के फैलाव को काबू में करने की कोशिश कर रहा है. हालांकि, डब्ल्यूएचओ ने साफ किया कि इसका मतलब तीन महीने में बीमारी को पूरी तरह खत्म करना नहीं है. लक्ष्य फिलहाल संक्रमण को फैलने से रोकना और उसकी रफ्तार कम करना है. स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, इबोला का यह प्रकोप मई में आधिकारिक तौर पर घोषित होने से कम से कम तीन महीने पहले ही शुरू हो गया था. डब्ल्यूएचओ अफ्रीका के निदेशक डॉ. मोहम्मद जनाबी ने बुनिया शहर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, "हम वायरस का पीछा कर रहे हैं, लेकिन वायरस हमसे आगे है." उन्होंने बताया कि रिसर्च से पता चला है कि वायरस फरवरी से ही फैलना शुरू हो गया था. शुरुआत में कई मरीजों में इबोला की पहचान नहीं हो पाई और उनके लक्षणों को मलेरिया या टाइफाइड समझ लिया गया. कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास ने आरोप लगाया है कि उनके परिवार को डराने-धमकाने के लिए पुडुचेरी पुलिस की कार्रवाई केंद्र सरकार के इशारे पर की गई. अब उन्होंने इसे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया पुडुचेरी दौरे से भी जोड़ते हुए सवाल उठाया है. सौरव दास ने एक्स पर लिखा, "सिर्फ दो दिन पहले अमित शाह पुडुचेरी में थे, जहां उन्होंने वहां के गृह मंत्री और उपराज्यपाल से मुलाक़ात की थी. क्या इस बैठक में डराने-धमकाने की यह रणनीति बनाई गई थी?" उन्होंने पुडुचेरी के उपराज्यपाल के बारे में यह भी दावा किया कि वे गुजरात में नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री रहने के दौरान कथित तौर पर "आंख और कान" के नाम से जाने जाते थे. दरअसल सौरव दास ने दावा किया कि उनके घर पर बुधवार को पुडुचेरी पुलिस पहुंची थी. उन्होंने शाम 7.10 बजे किए गए पोस्ट में लिखा है, ‘’दो घंटे पहले पुडुचेरी पुलिस मेरे परिवार के घर पहुंची और उनसे तरह-तरह के सवाल पूछकर उन्हें परेशान किया. यह उत्पीड़न क्यों किया जा रहा है? इसका आदेश किसने दिया और किस मकसद से? क्या यही कानूनी प्रक्रिया है?’’ ''पुडुचेरी की बीजेपी सरकार मेरे परिवार को क्यों डरा-धमका रही है? यह पुडुचेरी सरकार का चरित्र नहीं है. यह सब केंद्र सरकार के इशारे पर किया जा रहा है.'' संबंधित ख़बर- सीजेपी के सौरव दास ने कहा, पुडुचेरी में उनके परिवार के घर पहुँची पुलिस ब्रिटेन और यूरोप के लोगों ने करीब 30 साल बाद इतना शानदार सूर्य ग्रहण देखा. ब्रिटेन में लोगों को आंशिक सूर्य ग्रहण देखने को मिला. यह ग्रहण स्थानीय समय शाम करीब 7 बजे के बाद अपने चरम पर पहुंचा. उस वक्त ज्यादातर इलाकों में चंद्रमा ने सूर्य का 90 फीसदी से ज्यादा हिस्सा ढक लिया था. हालांकि, ग्रीनलैंड, आइसलैंड और स्पेन के कुछ हिस्सों में लोगों को पूर्ण सूर्य ग्रहण देखने का मौका मिला. इन जगहों पर कुछ समय के लिए दिन में ही पूरी तरह अंधेरा छा गया और लोगों ने इस अद्भुत नजारे का अनुभव किया. इमेज स्रोत, Ina Fassbender/AFP/Getty Images इमेज स्रोत, Alex Burstow/Arsenal FC via Getty Images इमेज स्रोत, Anna Moneymaker/Getty Images अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट इस महीने के आखिर में अपने पद से इस्तीफा दे देंगी. ट्रंप ने लेविट को अपने “सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक” बताते हुए कहा कि वह अपने छोटे बच्चों और परिवार के साथ ज्यादा वक्त बिताना चाहती हैं. ट्रंप ने कहा कि वह उनके इस फैसले को पूरी तरह समझते और सम्मान करते हैं. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि लेविट अब उनकी शीर्ष बाहरी सलाहकारों में से एक रहेंगी और रिपब्लिकन पार्टी में भी उनकी प्रभावशाली भूमिका बनी रहेगी. 28 साल की लेविट पिछले साल व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव बनी थीं. इस पद पर पहुंचने वाली वह अब तक की सबसे कम उम्र की व्यक्ति हैं. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि उनकी जगह अगला प्रेस सचिव कौन होगा. लेविट ने मई में एक बेटी को जन्म दिया था. उनका एक दो साल का बेटा भी है. वह पिछले महीने ही मातृत्व अवकाश के बाद काम पर लौटी थीं. उनके पति का नाम निकोलस रिकियो है. ट्रंप के ऐलान के बाद लेविट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव के तौर पर काम करना “उनकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा सम्मान और रोमांच” रहा है. उन्होंने कहा कि एक मां बनना, दूसरी संतान का स्वागत करना और दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण नौकरियों में से एक को साथ-साथ निभाना उनकी ज़िंदगी का सबसे सुखद, लेकिन सबसे मुश्किल दौर रहा है. लेविट ने आगे कहा कि बेटी के जन्म के बाद व्हाइट हाउस लौटने पर उन्हें लगातार यह महसूस हुआ कि वह अपने दो छोटे बच्चों की अच्छी मां बनने के साथ-साथ प्रेस सचिव की नौकरी के लिए जरूरी लगातार समय, ऊर्जा और ध्यान नहीं दे पा रही हैं. इसी वजह से उन्होंने व्हाइट हाउस छोड़ने और जिंदगी के एक नए अध्याय की शुरुआत करने का फैसला लिया है. बीबीसी हिन्दी के लाइव पेज पर आपका स्वागत है. मैं बीबीसी संवाददाता अरशद मिसाल अब से दोपहर दो बजे तक आप तक अहम ख़बरें पहुंचाऊंगा. कल के लाइव पेज की ख़बरें पढ़ने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. बीबीसी न्यूज़ हिन्दी पर मौजूद इन अहम ख़बरों को पढ़ने के लिए इनके साथ दिए गए लिंक पर क्लिक करें. -'जनेऊ पहनते हैं, मांस खाते हैं?' राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ के लिए इंटरव्यू में पूछे गए ऐसे कई सवाल -जस्टिस वर्मा के ख़िलाफ़ आरोप साबित, कैश बरामदगी की जांच करने वाली लोकसभा समिति की रिपोर्ट -ईरान कब तक जारी रख सकता है जंग? 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स्रोत: BBC Hindi

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