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Death

'वंदे मातरम' को लेकर क्या बोलीं बीएसपी प्रमुख मायावती?

✍️ Admin 📅 21 August, 2026 ⏰ 09:01 AM 👁 47 views

इमेज स्रोत, ARIF ALI/AFP via Getty Images पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को गुरुवार देर रात रावलपिंडी की अडियाला जेल से इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल ले जाया गया. हालांकि, इस मामले में अभी तक अधिकारियों और अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. बीबीसी न्यूज़ उर्दू के मुताबिक, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के एक प्रवक्ता और इस्लामाबाद पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इमरान खान को अस्पताल ले जाने की पुष्टि की है. हालांकि, इस्लामाबाद प्रशासन या पाकिस्तान सरकार ने अभी तक आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की है. गौरतलब है कि 18 अगस्त को पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान को दो दिनों के भीतर अडियाला जेल से शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल में शिफ्ट करने का आदेश दिया था. कोर्ट ने एक मेडिकल बोर्ड बनाने का भी निर्देश दिया था, जिसमें इमरान खान के निजी डॉक्टर डॉ. फैसल और उनकी बहन डॉ. उजमा खान को शामिल किया जाना है. इमेज स्रोत, Deepak Gupta/Hindustan Times via Getty Images बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) प्रमुख मायावती ने ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर चल रही राजनीतिक बहस पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि देश में इस बात को लेकर राजनीति करना ठीक नहीं है कि वंदे मातरम पूरा गाया जाए, इसके शुरुआती दो छंद गाए जाएं या इसे न गाया जाए. मायावती ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि वंदे मातरम् के गायन को लेकर हाल ही में संसद में जो कानून पास किया गया है, ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है. उन्होंने कहा, "केंद्र और राज्यों में सत्ता परिवर्तन के दौरान राजनीतिक दल अक्सर अपने राजनीतिक स्वार्थ या फायदे के हिसाब से पहले की सरकारों द्वारा बनाए गए कानूनों में बदलाव करते रहते हैं." बीएसपी प्रमुख ने कहा, "इस समय सरकारों और सभी राजनीतिक दलों को देश और जनता से जुड़े अहम मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए." उन्होंने खास तौर पर बेरोजगार युवाओं, छात्रों, ‘जेन-जी’ और स्कूली बच्चों की समस्याओं का जिक्र किया. मायावती ने देश के कुछ हिस्सों में आई भयंकर बाढ़ से हो रही जान-माल की भारी क्षति का भी मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा, "ऐसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, जिन पर केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ सभी राजनीतिक दलों को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए." उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देश और जनहित में यही सबसे जरूरी मांग है. पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित जादवपुर यूनिवर्सिटी में बुधवार देर रात हंगामा हुआ. इस दौरान लेफ़्ट छात्र संगठन और एबीवीपी के बीच झड़प की ख़बरें सामने आईं. इस घटना पर पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने प्रतिक्रिया दी है. पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने कहा, “जादवपुर यूनिवर्सिटी में कुछ ऐसे ग्रुप सक्रिय हैं, जो हमेशा राष्ट्रविरोधी नारे लगाते रहते हैं. इससे पहले राज्यपाल के साथ भी बदसलूकी की जा चुकी है. यूनिवर्सिटी में किसी भी तरह की राष्ट्रविरोधी या असामाजिक गतिविधियां नहीं होनी चाहिए. यूनिवर्सिटी का माहौल शांतिपूर्ण होना चाहिए.” आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बंगाल दौरे पर उन्होंने कहा, “बंगाल की सीमा सबसे संवेदनशील है. केंद्रीय गृह मंत्री हमेशा इस बात पर ध्यान देते रहे हैं कि बंगाल की सीमा को कैसे सुरक्षित बनाया जाए.” इस घटना के बाद सीपीआई(एम) ने गुरुवार को एक्स पर एबीवीपी के कार्यकर्ताओं पर हिंसा फैलाने का आरोप लगाया. सीपीआई(एम) ने लिखा, "आधी रात को एबीवीपी-बीजेपी-आरएसएस के गुंडे बाइक पर सवार होकर जाधवपुर यूनिवर्सिटी कैंपस पहुंचे और वहां हिंसा फैलाई; उन्होंने हथियारों से छात्रों पर हमला किया, यूनियन रूम में तोड़-फोड़ की, पत्थर और ईंटें फेंकीं और छात्रों का सामान जला दिया." इमेज स्रोत, AFP via Getty Images इसराइल ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक के रणनीतिक रूप से एक महत्वपूर्ण इलाक़े में करीब 12 सौ नए सेटलमेंट घर बनाने के लिए टेंडर जारी करने की योजना बनाई है. इस फैसले की अमेरिका के कुछ प्रमुख सहयोगी देशों ने भी कड़ी आलोचना की है. ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी, इटली और कनाडा ने एक संयुक्त बयान में इस फैसले को “अस्वीकार्य” बताया और इसराइल से इन योजनाओं को तुरंत वापस लेने की अपील की. अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सभी इसराइली सेटलमेंट को अवैध माना जाता है. अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण इसराइल ने यरूशलम के पूर्व में स्थित ई1 इलाक़े में निर्माण की योजनाओं को कई दशकों तक रोक रखा था. कई देशों और फ़लस्तीनियों का कहना है कि अगर यहां निर्माण होता है तो टू-नेशन समाधान की उम्मीदों को बड़ा झटका लगेगा. उनका मानना है कि इससे वेस्ट बैंक प्रभावी तौर पर दो हिस्सों में बंट जाएगा और पूर्वी यरूशलम अलग-थलग पड़ जाएगा. यूरोपीय देशों और कनाडा ने गुरुवार को जारी अपने बयान में कहा, “वेस्ट बैंक में इस समय गंभीर अस्थिरता है. आम लोगों के ख़िलाफ़ इसराइलियों की हिंसा अप्रत्याशित स्तर पर है और फ़लस्तीनी अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर पाबंदियां हैं. ऐसे समय में यह फैसला और भी चिंताजनक है.” अमेरिकी जांच एजेंसी एफ़बीआई ने न्यूयॉर्क की एक महिला को गिरफ़्तार किया है. उस पर आरोप है कि वह ऑल्बनी में राज्य की कैपिटल बिल्डिंग को बम से उड़ाकर वहां मौजूद सांसदों को मारने की योजना बना रही थी. अभियोजकों के मुताबिक, 35 साल की जेसिका बोवी ने पहले ही इस्लामिक स्टेट के प्रति अपनी वफादारी जताई थी. उस पर एक ऐसे विदेशी आतंकी संगठन को मदद या संसाधन देने का आरोप लगाया गया है, जिसे अमेरिका ने आतंकी संगठन घोषित कर रखा है. अभियोजकों का कहना है कि बोवी ने इस इमारत की कई बार निगरानी की थी. गिरफ़्तारी के समय उसके पास एक नकली बम और एक ख़राब बंदूक थी. ये दोनों चीजें कथित तौर पर अंडरकवर एजेंटों ने उसे दी थीं, क्योंकि उन्हें उस पर शक था. क्रिमिनल शिकायत के मुताबिक, बोवी ने कथित तौर पर अंडरकवर एजेंटों से कहा था, “मैं इमारत का जितना हो सके उतना हिस्सा नष्ट करना चाहती हूं और सीनेटरों को मारना चाहती हूं." अभी यह साफ नहीं है कि बोवी अपने ऊपर लगे आरोपों के ख़िलाफ़ अदालत में मुकदमा लड़ेंगी या नहीं. ऑल्बनी की रहने वाली बोवी ने कथित तौर पर एफ़बीआई के मुखबिरों के साथ अपनी योजना पर चर्चा की थी. वह कई हफ्तों तक ऐसे एजेंटों के संपर्क में भी रही, जो खुद को आईएस के सदस्य बताकर उससे मिले थे. अभियोजकों के मुताबिक, बोवी ने न्यूयॉर्क की स्टेट कैपिटल बिल्डिंग को इसलिए चुना क्योंकि उसे लगा कि यह व्हाइट हाउस की तुलना में आसान निशाना होगा. इमेज स्रोत, Finn Gomez/Getty Images अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए ज़रूरत पड़ती, तो वह ईरान पर 100 बार और हमला करने से भी पीछे नहीं हटते. एक रेडियो इंटरव्यू में ट्रंप ने दावा किया कि अगर वो ईरान पर कार्रवाई नहीं करते, तो आज इसराइल और पूरा मध्य-पूर्व तबाह हो चुका होता. ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले का आदेश उस समय दिया था, जब उनके मुताबिक ईरान परमाणु हथियार बनाने से सिर्फ दो हफ्ते दूर था. होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर भी ट्रंप ने दावा किया कि इसका नियंत्रण अमेरिका के हाथ में है. उन्होंने एक बार फिर कहा कि अमेरिकी कार्रवाई ने ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता को काफी कमज़ोर कर दिया है और उसकी अर्थव्यवस्था ढहने की कगार पर है. ट्रंप ने ईरान परमाणु समझौते (बराक ओबामा के दौर का परमाणु समझौता) को “एक आपदा” बताया. उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए अमेरिका का इस समझौते से बाहर निकलना ज़रूरी था. ट्रंप ने ईरान को “मध्य-पूर्व का दबंग” बताते हुए कहा कि ईरान ने क़तर, बहरीन, कुवैत और यूएई जैसे देशों पर भी हमला किया, जो कुछ हद तक ईरान का समर्थन कर रहे थे. उन्होंने दावा किया कि अगर अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई नहीं की होती, तो ईरान इन सभी देशों को तबाह कर देता और इसके बाद अमेरिकी ज़मीनी हमला करने की तैयारी करता. अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने अमेरिकी सहयोगी देशों से ईरान की अर्थव्यवस्था को “तहस-नहस” करने की अमेरिका की कोशिश में साथ देने की अपील की है. बेसेंट ने न्यूज चैनल सीएनबीसी से बातचीत में कहा, “हम इस शासन को गिराने जा रहे हैं. अब वक्त आ गया है कि हमारे सहयोगी और दुनिया के बाकी देश फैसला करें.” उन्होंने आगे कहा, “या तो आप हमारे साथ हैं या हमारे ख़िलाफ़.” बेसेंट का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस चेतावनी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि जो भी देश ईरान के शासन को “किसी भी तरह की मदद या सहारा” देगा, उसे “भयंकर आर्थिक नतीजे” भुगतने पड़ेंगे. बीबीसी हिन्दी के लाइव पेज पर आपका स्वागत है. मैं बीबीसी संवाददाता अरशद मिसाल अब से दोपहर दो बजे तक आप तक अहम ख़बरें पहुंचाऊंगा. कल के लाइव पेज की ख़बरें पढ़ने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. बीबीसी न्यूज़ हिन्दी पर मौजूद इन अहम ख़बरों को पढ़ने के लिए इनके साथ दिए गए लिंक पर क्लिक करें. - 'वंदे मातरम्' पर कांग्रेस का नौ दशक पुराना प्रस्ताव क्या है और बीजेपी ने क्यों उठाए सवाल? - बैंक ऑफ़ अमेरिका के सर्वे में इंडोनेशिया से पिछड़ा भारत - ग़ज़ा में अब भी हज़ारों लापता, जवाब तलाशने में परिजन तय कर रहे एक दर्दनाक यात्रा - राजीव गांधी को कितनी मिलती थी तनख़्वाह और सोनिया गांधी से कैसे हुई मुलाक़ात

स्रोत: BBC Hindi

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