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Death

स्कूल जाने के बाद 6 साल के बच्चे की क्लास में मौत, सीसीटीवी फ़ुटेज से क्या पता चला?

✍️ Admin 📅 23 August, 2026 ⏰ 02:50 PM 👁 36 views

(इस ख़बर के कुछ हिस्से परेशान कर सकते हैं.) आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम के एक निजी स्कूल में पढ़ने वाले 6 साल के बच्चे की स्कूल में ही मौत का मामला सामने आया है. परिवार ने आरोप लगाया है कि बच्चे को शिक्षिका ने पीटा था. सीसीटीवी फ़ुटेज में बच्चा कक्षा के भीतर अचानक गिरता हुआ दिखाई देता है. उस दिन कक्षा में आख़िर क्या हुआ था? बच्चा क्यों गिर पड़ा? स्कूल कर्मचारियों ने तुरंत क्या किया? पुलिस इस मामले में क्या कह रही है? आइए जानते हैं. छह साल का प्रणय तेजा गुरुवार, 20 अगस्त की सुबह रोज़ की तरह स्कूल गया था. कक्षा की शिक्षिका, जिनका नाम स्कूल प्रशासन ने सार्वजनिक नहीं किया है, सुबह लगभग 11:30 बजे से 12 बजे के बीच बच्चों का होमवर्क जाँच रही थीं. इसके बाद प्रणय तेजा की बारी आई. होमवर्क पूरा नहीं करने पर शिक्षिका उसे डाँट रही थीं. इसी दौरान प्रणय तेजा अचानक शिक्षिका के ऊपर ही गिर पड़ा. सीसीटीवी फ़ुटेज में यह दृश्य दिखाई देता है. स्कूल कर्मचारियों ने बच्चे को तुरंत अस्पताल पहुँचाया. लेकिन डॉक्टरों ने बताया कि उसकी पहले ही मौत हो चुकी थी. बच्चे के परिजनों ने आरोप लगाया कि शिक्षिका की कार्रवाई की वजह से ही उसकी मौत हुई. इसी आरोप को लेकर परिवार के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया. विशाखा वन टाउन पुलिस ने बीबीसी से कहा, "हमने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है और जाँच कर रहे हैं." पुलिस का कहना है, "लेकिन बच्चे की मौत की असली वजह क्या थी, यह पोस्टमार्टम और मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही साफ़ हो पाएगा." परिजनों का आरोप है कि होमवर्क पूरा नहीं करने पर शिक्षिका ने बच्चे को डाँटा और उसके साथ मारपीट की. इसी आरोप को लेकर उन्होंने दोपहर करीब तीन बजे केजीएच अस्पताल में प्रदर्शन किया. इस मामले में आरोपों का सामना कर रही शिक्षिका का पक्ष जानने के लिए बीबीसी ने संपर्क करने की कोशिश की. हालाँकि, स्कूल प्रबंधन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने शिक्षिका के बारे में कोई जानकारी नहीं दी. इस वजह से बीबीसी शिक्षिका या उनके परिवार से संपर्क नहीं कर सका. देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां. गुरुवार को केजीएच अस्पताल के शवगृह के बाहर बच्चे के पिता ने बीबीसी से बात की. वह कैटरिंग का काम करते हैं. वहीं बच्चे की माँ गृहिणी हैं. कृष्णप्रसाद ने बीबीसी से कहा, "हम तीन दिन के लिए धार्मिक दर्शन करने बाहर गए थे." उन्होंने कहा, "इसी वजह से हमारा बेटा तीन दिन स्कूल नहीं जा पाया. इस कारण उसका होमवर्क पूरा नहीं हो सका. गुरुवार को कक्षा की शिक्षिका ने उससे होमवर्क के बारे में पूछा." कृष्णप्रसाद का आरोप है, "सीसीटीवी फ़ुटेज में दिखाई देता है कि होमवर्क पूरा नहीं करने पर शिक्षिका ने उसे डाँटा और मारा था." उन्होंने कहा, "हमारे बाहर जाने की वजह से उसका होमवर्क अधूरा रह गया था और इसी कारण शिक्षिका ने उसे मारा." विशाखापट्टनम के आरडीओ दिलीप चक्रवर्ती ने बीबीसी से कहा, "शिक्षिका जब बच्चे को डाँट रही थीं, तभी वह वहीं बेहोश होकर गिर पड़ा." उन्होंने कहा, "अस्पताल पहुँचने तक उसकी मौत हो चुकी थी. डॉक्टरों ने हमें यही जानकारी दी है." चक्रवर्ती ने कहा, "अब हम पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहे हैं." उन्होंने कहा, "आगे की कार्रवाई उसी रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी." घटना के बाद स्कूल प्रशासन बच्चे को पास के केजीएच अस्पताल लेकर गया लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. इसके बाद बच्चे के माता-पिता ने अस्पताल के बाहर ही विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. कुछ समय बाद मीडिया कर्मी भी वहाँ पहुँच गए. इसके बाद विरोध प्रदर्शन और तेज़ हो गया. धीरे-धीरे कई अधिकारी भी केजीएच अस्पताल के शवगृह पहुँचने लगे. इसी दौरान स्कूल प्रशासन के कुछ प्रतिनिधि भी वहाँ आए. उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाने की कोशिश की. शाम करीब पाँच बजे वहाँ मौजूद पुलिस अधिकारियों ने माता-पिता से संपर्क किया. पुलिस ने उनसे मामले में शिकायत दर्ज कराने के बारे में बात की. लेकिन माता-पिता ने कहा, "हम कोई मामला दर्ज नहीं कराना चाहते." उन्होंने कहा, "हमें सिर्फ़ अपने बेटे का शव सौंप दिया जाए. हमारे लिए इतना ही काफ़ी है." इसके बाद पुलिस ने कोई मामला दर्ज नहीं किया. माता-पिता ने मीडिया से बात करने से भी इनकार कर दिया. शाम 6:31 बजे आंध्र प्रदेश के शिक्षा मंत्री नारा लोकेश ने एक्स पर पोस्ट कर बच्चे की मौत की घटना पर प्रतिक्रिया दी. लोकेश ने अपनी पोस्ट में लिखा, "विशाखापट्टनम के एक स्कूल में बच्चे की मौत बेहद दुखद घटना है." उन्होंने कहा, "इस घटना के लिए ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी." लोकेश ने आगे लिखा, "इस दुख की घड़ी में परिवार को हिम्मत बनाए रखनी चाहिए." उन्होंने कहा, "उन्होंने अपना बेटा खो दिया है और उसे कोई वापस नहीं ला सकता. परिवार को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई नहीं की जा सकती. सरकार उनके साथ मज़बूती से खड़ी रहेगी और हर संभव मदद करेगी." इसके बाद माता-पिता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया. बीबीसी ने शुक्रवार, 21 अगस्त की सुबह विशाखापट्टनम के महारानीपेट वन टाउन पुलिस थाने से पूछा कि क्या इस मामले में केस दर्ज किया गया है. पुलिस ने बताया कि घटना के बाद बच्चे के माता-पिता केजीएच अस्पताल पहुँचे थे. उन्होंने स्कूल और उसके कर्मचारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया. पुलिस ने कहा, "हमने घटना का सीसीटीवी फ़ुटेज देखा है." "फ़ुटेज में दिखाई देने वाले दृश्यों और माता-पिता की शिकायत के आधार पर संदिग्ध मौत का मामला दर्ज किया गया है." "यह मामला भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 194 के तहत दर्ज किया गया है. फ़िलहाल पैथोलॉजी रिपोर्ट मंगाई गई है." वन टाउन के पुलिस निरीक्षक वरप्रसाद ने बीबीसी से कहा, "पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की जाँच की जाएगी." उन्होंने कहा, "घटना के तुरंत बाद माता-पिता ने केस दर्ज करने की मांग की थी. लेकिन शाम तक उन्होंने कहा कि मामला दर्ज न किया जाए." वरप्रसाद ने कहा, "फिर भी ऐसी घटना में वास्तव में क्या हुआ, यह पता लगाने के लिए पुलिस को क़ानून के मुताबिक़ मामला दर्ज करना पड़ता है." उन्होंने कहा, "फ़िलहाल माता-पिता की शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया है." इस घटना को लेकर डीईओ प्रेम कुमार ने बीबीसी से बात की. उन्होंने कहा, "हमने स्कूल का सीसीटीवी फ़ुटेज देखा है." "फ़ुटेज में शिक्षिका बच्चे से ग़ुस्से में बात करती हुई दिखाई दे रही हैं." "यह भी दिखाई देता है कि उन्होंने बच्चे के गाल पर एक बार थप्पड़ मारा था." उन्होंने कहा कि बच्चे की मौत डर या मारपीट की वजह से हुई या फिर इसके पीछे कोई दूसरी स्वास्थ्य संबंधी वजह थी, यह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा. उन्होंने कहा, "हम फ़िलहाल उस रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहे हैं." प्रेम कुमार ने कहा, "रिपोर्ट मिलने के बाद हम अधिकारियों को पूरी जानकारी देंगे." उन्होंने कहा, "इसके बाद उसी के आधार पर शिक्षिका और स्कूल प्रबंधन के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी." वन टाउन पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही इस घटना की असली वजह साफ़ हो सकेगी. इसके लिए पैथोलॉजी रिपोर्ट भी मंगाई गई है. आमतौर पर संदिग्ध मौत के मामलों में पुलिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 194 के तहत जाँच शुरू करती है. इसके बाद पुलिस के अनुरोध पर डॉक्टर, फ़ॉरेंसिक विशेषज्ञ और पैथोलॉजी विशेषज्ञ शव की जाँच करते हैं. वे ज़रूरी नमूने भी इकट्ठा करते हैं. इन नमूनों को पुलिस संबंधित फ़ॉरेंसिक या पैथोलॉजी लैब में भेजती है. रिपोर्ट मिलने के बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार की जाती है. पुलिस के मुताबिक़, यह पूरी प्रक्रिया आमतौर पर एक से 10 दिन के भीतर पूरी हो सकती है. हालाँकि, मामले की गंभीरता के आधार पर यह समय कम या ज़्यादा भी हो सकता है. पुलिस निरीक्षक वरप्रसाद ने बीबीसी से कहा, "इन रिपोर्टों के आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बच्चे की मौत किस वजह से हुई." उन्होंने कहा, "यह जाँचा जाएगा कि क्या डर की वजह से उसका दिल काम करना बंद कर गया था. क्या किसी मारपीट से उसे चोट पहुँची थी. या फिर इसके पीछे कोई दूसरी वजह थी." वरप्रसाद ने कहा, "यह पता लगाने के लिए भी पैथोलॉजी रिपोर्ट मंगाई गई है कि बच्चे के शरीर पर कोई चोट थी या अचानक कोई स्वास्थ्य समस्या पैदा हुई थी." उन्होंने कहा, "रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की जाँच उसी के आधार पर की जाएगी." बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित. 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स्रोत: BBC Hindi

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