6 बार के विधायक लल्ला भैया के वारिसों में जंग एसडीएम के सामने बेटों में तीखी नोंकझोंक
गोंडा। जिले की करनैलगंज विधानसभा सीट से छह बार विधायक रहे अजय प्रताप सिंह उर्फ लल्ला भैया के परिवार में चल रहा वारिसों का विवाद अब खुलकर जनता और प्रशासन के सामने आ गया है। विधायक की दूसरी पत्नी मीनाक्षी के बेटों द्वारा सरकारी अभिलेख (परिवार रजिस्टर) में नाम दर्ज कराने की मांग को लेकर आयोजित खुली बैठक में दोनों पक्षों के बीच तीखी नोंकझोंक देखने दिखाई पड़ी।
कटरा शाहबाजपुर स्थित सरकारी कंपोजिट विद्यालय में हुई इस बैठक में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। एसडीएम नेहा मिश्रा, एडीओ पंचायत राजेश वर्मा, कानूनगो राम बहादुर पांडे समेत तीन लेखपाल मौके पर मौजूद रहे। कोतवाली सहित कई थानों की पुलिस के करीब 150 जवानों को तैनात किया गया था।
बैठक के दौरान दूसरी पत्नी के बेटे कुंवर कमलेंद्र मोहन सिंह ने अपने दोनों भाइयों के साथ अधिकार की बात रखते हुए कहा कि उनके पास अब कुछ भी शेष नहीं बचा है और वे अपने पिता की संपत्ति में अपना हक चाहते हैं। पहली पत्नी के बेटे कुंवर शारदेन मोहन सिंह और उनकी बुआ शैला सिंह ने बैठक में बाहरी लोगों की मौजूदगी पर आपत्ति जताई, जिस पर माहौल तनावपूर्ण हो गया और दोनों पक्षों में नारेबाजी शुरू हो गई।
करीब साढ़े तीन घंटे तक चली बैठक में पहली पत्नी के बेटों के पक्ष में 49 लोगों ने समर्थन दर्ज कराया, जबकि दूसरी पत्नी के बेटों के समर्थन में 9 लोगों ने अपने नाम लिखवाए। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि दोनों पक्षों को एक सप्ताह के भीतर वारिस होने से जुड़े वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। प्रमाणों की जांच के बाद ही परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
अजय प्रताप सिंह उर्फ लल्ला भैया ने दो शादियां की थीं। पहली पत्नी ममता के बेटों कुंवर वेंकटेश मोहन प्रताप सिंह और कुंवर शारदेन मोहन सिंह के नाम पहले से ही सरकारी कागजातों में वारिस के रूप में दर्ज हैं। जबकि दूसरी पत्नी मीनाक्षी के बेटों कुंवर कमलेंद्र मोहन सिंह और कुंवर अजेंन मोहन सिंह का नाम अभी तक किसी सरकारी अभिलेख में दर्ज नहीं है। मीनाक्षी का निधन बीमारी के चलते हो चुका है।
पूर्व विधायक अजय प्रताप सिंह का निधन 23 जनवरी 2025 को हुआ था। इसी वर्ष 23 जनवरी को उनकी पहली पुण्यतिथि के अवसर पर जब दूसरी पत्नी के बेटे को श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल नहीं होने दिया गया, तभी से यह विवाद खुलकर सामने आ गया। इसके बाद परिवार के भीतर चल रहा मतभेद अब प्रशासनिक प्रक्रिया तक पहुंच गया है।