पूर्ण संस्करण देखें
⚡ AMP पेज | पूर्ण वेबसाइट देखें
Religious

गुरु शिष्य परंपरा का हज़ारों साल पुराना गौरवशाली इतिहास समेटे है ग्रामदास बाबा कुट्टी

✍️ Admin 📅 23 December, 2025 ⏰ 10:36 AM 👁 65 views
इस सम्प्रदाय के साधु संतों ने उठाया इसके उद्धार का बीड़ा बनाया बड़ा गेट बालपुर गोंडा। ठकुरापुर ग्रामदास बाबा कुट्टी गुरु शिष्य परंपरा का 18वीं शताब्दी से सैकड़ों साल पहले का गौरवशाली इतिहास अपने में समेटे हुए। इसके देश के विभिन्न प्रदेशों के अनेक शहरों में 120 से ज्यादा विशाल मठ मन्दिर हज़ारों एकड़ भूमि में बने हुए हैं। गोंडा के लिए गौरवान्वित करने वाली बात यह है इन सभी मठ मंदिरों का मुख्यालय ज़िले के परसपुर विकास क्षेत्र की ग्रामपंचायत ठकुरापुर में है। जैसे स्वामीनारायन घनश्याम जी की जन्म स्थाली ज़िले के छापिया में स्थित है। जिले के परसपुर विकास क्षेत्र की ग्रामपंचायत ठकुरापुर में स्थित ग्रामदास बाबा कुट्टी परिसर में पुराने कमरे की खुदाई के दौरान मिले 509 चांदी के सिक्के के चलते इन दिनों सुर्खियों में बनी रही। बाद में कुछ लोगों ने फर्जी एसटीएफ बनकर साजिश करके चांदी के सिक्के लूटने की घटना को अंजाम दिया जिससे यह मीडिया और सोशल मीडिया में छाया रहा। बाबा कुट्टी के जानकारों ने बताया कि ठकुरापुर ग्रामदास बाबा कुट्टी कोई साधारण मठ मन्दिर नहीं है। यह 18वीं शताब्दी के सैकड़ों साल पहले का इतिहास अपने में संजोए हुए है। इसके तहत देश के विभिन्न प्रदेशों के अनेक शहरों में हज़ारों एकड़ भूमि में 120 से ज्यादा विशाल मठ मन्दिर बने हुए हैं। सूचना के मुताबिक ज़िले में ग्रामदास बाबा कुट्टी ठकुरापुर के पास 60 बीघा से ज्यादा भूमि है। इसके तहत फलाहारी बाबा कुट्टी केरवाघाट के पास 650 बीघा भूमि है। रानी बाजार बड़गांव में दो बीघा भूमि में बना हुआ है। बहराइच और श्रावस्ती में इसका एक एक मठ मन्दिर बना हुआ है। राम की नगरी अयोध्या में पयहारी बाबा आश्रम के नाम से दो मठ मन्दिर बने हुए हैं। इनमे से एक मन्दिर राम मन्दिर निर्माण क्षेत्र में होने के नाते ट्रस्ट ने अपने परिसर में शामिल कर लिया। इसके बदले दूसरे जगह पर नए मठ मन्दिर बनवाकर इस संस्था को राम मंदिर ट्रस्ट ने दिया। देश में इस संप्रदाय के सर्वाधिक 76 मठ मन्दिर बिहार प्रदेश के विभिन्न स्थानों में हज़ारों एकड़ भूमि में विशाल और भव्य रूप में स्थापित हैं। इसके तहत दूसरे नंबर पर गुजरात प्रदेश का नाम आता है। यहां के विभिन्न शहरों में इसके 21 मठ मन्दिर बने हुए हैं। इस मठ के पास इसी प्रदेश के कच्छ भुज में सर्वाधिक 9000 एकड़ भूमि है। इसी तरह से हरियाणा में तीन मठ मन्दिर 20 बीघे में बने हुए हैं।राजस्थान प्रदेश में केवल एक मठ मन्दिर बना हुआ है। महाराष्ट्र में इसके पांच मठ मन्दिर बने हुए हैं। मध्यप्रदेश में दो और जनकपुर नेपाल में एक बड़ा मठ मन्दिर बना हुआ है। बाबा कुट्टी के महंत धर्मदास ने बताया कि इस संप्रदाय के पहले गुरु रंगराज स्वामी, दूसरे सत्यभोला स्वामी,तीसरे जगुदेव स्वामी,चौथे धनीदेव स्वामी, पांचवे संतदेव स्वामी,छठा डोमादेव स्वामी,सातवें भजन देव स्वामी,आठवें श्रवण देव स्वामी,नौंवे बनवारी देव स्वामी,दशवें परामदेव स्वामी,ग्यारहवें रामनाथ देव स्वामी,बारहवें हनुमान देव स्वामी और तेरहवें मणीराम स्वामी रह चुके हैं। इन्हीं सभी गुरुजनों की इस संप्रदाय के लोग पूजा करते हैं और हज़ारों वर्षों से लाखों श्रद्धालु इनके अनुयायी बने हुए हैं। यहां गुरुओं की लंबी एवं समृद्ध परंपरा चली आ रही है। इस सम्प्रदाय के दूसरे गुरु सत्यभोला स्वामी के कार्यकाल में इसका सर्वाधिक विस्तार हुआ। सत्यभोला स्वामी समेत अनेक गुरुओं की यहां समाधि बनी हुई है। इसीलिए इस सम्प्रदाय से जुड़े साधु संतों अनुयायियों के लिए ग्रामपंचायत ठकुरापुर की भूमि सर्वाधिक पूज्यनीय और वंदनीय बनी हुई है और इस सम्प्रदाय का मुख्यालय बना हुआ है। हज़ारों साल बाद इस संप्रदाय साधुओं एवं संतों ने इस स्थल के जीर्णोद्धार का बीड़ा उठाया है। इसी के तहत सबसे पहले एक विशाल गेट बनवाया जा चुका है और अन्य निर्माण कराया जा रहा है।
📤 शेयर करें: