राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा के दौरान कांग्रेस पर तंज और हमला दोनों किया. उन्होंने कहा, "मैं कांग्रेस के मित्रों का आभार व्यक्त करता हूं. वो अब मुझे अच्छे से जानते हैं. पिछले 10 सालों में 5-6 बार मुझे बोलने से रोका गया. क्योंकि उन्हें मालूम है कि मैं एक बार शुरू होता हूं तो रुकता नहीं. तो वो अनुभव से सीख गए हैं कि इस बार दाल गलने वाली नहीं है. उन्होंने समझदारी से काम लिया और ऐसी समझ उन्हें निरंतर मिलती रहे." कल यानी बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सदन में भाषण होना था, लेकिन विपक्ष के लगातार विरोध प्रदर्शन के बाद उनका भाषण नहीं हुआ. राज्यसभा में भाषण के दौरान उसी मामले को लेकर पीएम ने कांग्रेस पर ये तंज किया. इस दौरान उन्होंने अपनी सरकार की तारीफ़ करते हुए कहा कि दुनिया का वर्ल्ड ऑर्डर बदल रहा है और झुकाव भारत की तरफ़ है. उन्होंने कहा "आज दुनिया संभल नहीं पा रही है. ऐसे में साफ़-साफ़ नज़र आ रहा है कि दुनिया एक नए वर्ल्ड ऑर्डर की ओर बढ़ रही है. दूसरे विश्व युद्ध के बाद जो वर्ल्ड ऑर्डर बना, वह अब बदल रहा है. सारी घटनाओं का ग़ैर राजनीतिक और निष्पक्ष भाव से विश्लेषण करें तो झुकाव भारत की तरफ़ है." इससे पहले लोकसभा में हंगामे के मद्देनज़र कार्यवाही कल 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है. सदन की कार्यवाही स्थगित करने की घोषणा करते समय स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि उनके आग्रह पर प्रधानमंत्री मोदी सदन में उपस्थित नहीं हुए. उन्होंने कहा, "प्रतिपक्ष के सदस्यों ने जो व्यवहार अध्यक्ष के कार्यालय में किया, वह हमारी संसदीय परंपराओं के लिए अनुचित था. मैं कहूंगा कि वह एक ब्लैक स्पॉट की तरह था." "मेरे पास ऐसी पुख़्ता जानकारी आई कि कांग्रेस पार्टी के कई सदस्य प्रधानमंत्री के आसन पर पहुंचकर कोई भी अप्रत्याशित घटना कर सकते थे. अगर यह घटना हो जाती तो यह अत्यंत अप्रिय होता, जो देश की लोकतांत्रिक परंपराओं को तार-तार कर देती." ओम बिरला ने कहा कि इसको टालने के लिए मैंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि उन्हें सदन में नहीं आना चाहिए. सदन के नेता ने सदन में उपस्थित न होकर, मेरे आग्रह को मानकर सदन को अप्रिय दृश्य से बचाया. मैं प्रधानमंत्री का इसके लिए आभार व्यक्त करता हूं." प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कल लोकसभा में भाषण होना था, लेकिन विपक्ष के भारी विरोध के बाद नहीं हुआ था. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के जवाब में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि यह पूरी तरह झूठ है, पीएम को चोट पहुंचाने का सवाल ही नहीं था. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, "प्रधानमंत्री अब स्पीकर के पीछे छिप रहे हैं, उनमें कल सदन में आने की हिम्मत नहीं हुई." "आप सरकार से क्यों नहीं पूछते कि सदन में नेता प्रतिपक्ष को क्यों नहीं बोलने दिया जाता. क्या उनके पास कोई भी आधार है कि वे एक सोर्स का उद्धरण देने से रोक दें, उनके पास ये अधिकार नहीं है. तथ्य यह है कि चर्चा इसलिए नहीं हुई, क्योंकि सरकार चर्चा के लिए तैयार नहीं थी." शिवसेना की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी भारत में सबसे सुरक्षित व्यक्ति हैं, उनके लिए यह कहना कि उन्हें महिला सांसदों से ख़तरा था, यह महिला सांसदों पर दी गई दुर्भाग्यपूर्ण टिप्पणी है. इमेज स्रोत, Sonu Mehta/Hindustan Times via Getty Images) मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ. लोकसभा में पिछले कुछ दिनों से जारी गतिरोध गुरुवार को भी बरकरार रहा और कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही देर के अंदर दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को सदन में कई विपक्षी सदस्यों के सत्तापक्ष की दीर्घा की तरफ पहुंचकर विरोध दर्ज कराने की घटना पर नाराज़गी जताई. उन्होंने कहा, "सदन में जो कल घटना हुई, जिस तरीके से प्रतिपक्ष के सदस्य सत्तापक्ष की बेल तक पहुंचे. ये सदन की मर्यादा के अनकूल नहीं है." लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को ध्वनि मत से पारित किया गया, हालांकि इस दौरान भी विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी जारी रही. इसके बाद सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी गई. हंगामे की शुरुआत लोकसभा में सोमवार और मंगलवार को हुई जब कांग्रेस के सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कारवां मैगज़ीन में एक अप्रकाशित किताब (फ़ॉर स्टार्स ऑफ़ डेस्टिनी) पर छपे लेख के अंश पढ़ने की कोशिश की थी. यह किताब पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद (एमएम) नरवणे ने लिखी है. राहुल ने जैसे ही इस किताब के बारे में बोलना शुरू किया तो स्पीकर ओम बिरला ने किताब के 'अप्रकाशित' होने का हवाला देकर उन्हें बोलने से रोका. राहुल गांधी ने सत्ता पक्ष की ओर इशारा करते हुए कहा, "यह कहते हैं कि आतंकवाद से लड़ते हैं, लेकिन ये एक उद्धरण से डरते हैं. इसमें क्या लिखा है जिससे वो घबरा रहे हैं और मैं बोल नहीं पा रहा हूं. अगर ये डर नहीं रहे हैं तो मुझे पढ़ने की इजाज़त दें." राहुल गांधी जिस अप्रकाशित किताब के कुछ अंश पढ़ रहे थे, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ वह किताब जनवरी 2024 में बाज़ार में आने वाली थी लेकिन भारतीय सेना इस किताब की जांच कर रही है. (
स्रोत: BBC Hindi