वकालत की जाली डिग्री देने के आरोपी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली जमानत सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दी है. मजहर खान नाम के आरोपी के मामले को गंभीर बताते हुए कोर्ट ने कहा है कि यह सिर्फ फर्जीवाड़े का नहीं, न्याय व्यवस्था पर गलत असर डालने का भी मामला है. इसके साथ ही कोर्ट ने देश की सभी अदालतों को निर्देश जारी कर बताया है कि उन्हें जमानत के आदेश में किन बातों का उल्लेख जरूर करना चाहिए.
मजहर खान पर खुद भी फर्जी एलएलबी (LL.B.) डिग्री हासिल करने का आरोप है. उसने अपने विजिटिंग कार्ड पर एलएलबी, एलएलएम (LL.M.) और पीएचडी (Ph.D.) जैसी डिग्रियां छपवा रखी थीं. साथ ही वह जाली डिग्रियां सप्लाई करने का एक संगठित गिरोह चला रहा था. मजहर के खिलाफ जेबा खान नाम की वकील ने शिकायत दर्ज करवाई थी.
मजहर को महाराष्ट्र में दर्ज केस के लिए बंगलुरू से गिरफ्तार किया गया था. बाद में पता चला कि उस पर उत्तर प्रदेश के जौनपुर में भी केस दर्ज है. जौनपुर में दर्ज केस में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उसे जमानत दे दी. इसके खिलाफ जेबा खान सुप्रीम कोर्ट पहुंची. उन्होंने मजहर के अपराध की गंभीरता के बारे में कोर्ट को बताया. उनकी तरफ से यह भी बताया गया कि जेल से बाहर आने के बाद मजहर उन्हें धमकी दे रहा है.
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और आर महादेवन की बेंच ने सभी तथ्यों पर संज्ञान लेते हुए आरोपी को फिर से हिरासत में लेने का आदेश दिया. जजों ने कहा कि आरोपी लंबे समय से फर्जी शैक्षणिक डिग्रियां, खासकर कानून की डिग्री, तैयार करने और उनका इस्तेमाल करवाने में शामिल रहा है. यह मामला सिर्फ एक जालसाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कानूनी पेशे की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर विषय है.
इसके साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया कि जमानत मामलों में पारित होने वाले आदेशों में सामान्य रूप से निम्नलिखित विवरण जरूर दर्ज होने चाहिए:
एफआईआर संख्या और उसकी तारीख
संबंधित पुलिस थाने का नाम
जांच एजेंसी की तरफ से लगाई गई कानून की धाराएं
एफआईआर में दर्ज अपराधों के लिए निर्धारित अधिकतम सजा
गिरफ्तारी की तारीख और अब तक हिरासत में बिताई गई कुल अवधि
मुकदमे की वर्तमान स्थिति
कानूनी प्रक्रिया से जुड़ी औपचारिकताओं के पालन का ब्यौरा
आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड
पहले दायर की गई जमानत अर्जियों की जानकारी और उनकी स्थिति
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस तरह का विवरण दर्ज करने से जमानत का आदेश ज्यादा स्पष्ट, पारदर्शी और न्यायसंगत हो सकेगा.
स्रोत: ABP Hindi