इमेज स्रोत, FACEBOOK/PRATEEK YADAV "साल 2004 की बात है, कानपुर में समाजवादी पार्टी का अधिवेशन था, उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के साथ वाले सोफ़े पर एक लड़का बैठा था. उम्र कोई 16 -17 साल की थी. जब मुलायम सिंह से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि घर का ही बच्चा है." "उस समय अखिलेश यादव सांसद बन चुके थे. बाद में पता चला कि यही प्रतीक यादव हैं." ये पूरा वाक़या बीबीसी हिन्दी को लखनऊ में रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार राधेकृष्ण ने बताया. राधेकृष्ण ने मुलायम सिंह के भाई राम गोपाल यादव पर किताब लिखी है. मुलायम सिंह यादव के बेटे 38 साल के प्रतीक यादव का निधन बीते बुधवार को हो गया. उनके परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं. प्रतीक यादव क़ारोबारी थे. उनकी पत्नी अपर्णा यादव बीजेपी नेता हैं. लेकिन खुद प्रतीक यादव राजनीति में नहीं उतरे थे. इमेज स्रोत, Sondeep Shankar/Getty Images उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह का जन्म इटावा में 22 नवंबर 1939 को हुआ था. उनके पिता सुघर सिंह यादव किसान थे. माँ का नाम मूर्ति देवी था. वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं. उन्होंने शुरुआती पढ़ाई स्थानीय परिषदीय स्कूल से की. करहल के जैन इंटर कॉलेज से बारहवीं की पढ़ाई करने के बाद मुलायम सिंह इटावा चले गए. इटावा के कॉलेज से मुलायम सिंह ने ग्रेजुएशन की डिग्री ली.उन्होंने छात्र राजनीति से पहचान बनाई. शिकोहाबाद के डिग्री कॉलेज से पढ़ाई करने के बाद मुलायम सिंह यादव ने करहल के जैन इंटर कॉलेज में बतौर शिक्षक पढ़ाया. कुश्ती में दांव-पेच से विरोधियों को पटखनी देने वाले मुलायम सिंह यादव राजनीति में भी सफल रहे. उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) को उत्तर प्रदेश से बाहर भारतीय राजनीति में पहचान दिलाई. देश की राजनीति में मुलायम सिंह का कुनबा आज भी बड़ा माना जाता है. मुलायम सिंह नेताजी कहलाते थे. वह एक बार रक्षा मंत्री और तीन बार 1989, 1993 और 2003 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे. मुलायम सिंह ने राजनीति में परिवार को भी शामिल किया और आगे बढ़ाया. सगे भाई शिवपाल यादव और रिश्ते के भाई राम गोपाल यादव को पार्टी के भीतर ऊँचा स्थान दिया. वरिष्ठ पत्रकार राधेकृष्ण कहते हैं, "मुलायम सिंह ने परिवार वालों को सांसद और विधायक बनाया." हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के परिवार में प्रतीक की आधिकारिक प्रवेश साल 2003 के बाद हुई जब मुलायम सिंह की पहली पत्नी मालती देवी का देहांत हो गया था. मालती देवी समाजवादी पार्टी के वर्तमान अध्यक्ष अखिलेश यादव की माँ थीं. राधे कृष्ण ने कहा, "मुलायम सिंह यादव ने साल 2004 में सार्वजनिक रूप से साधना और प्रतीक यादव के साथ अपने सबंधों को स्वीकार किया था." इमेज स्रोत, FACEBOOK/PRATEEK YADVAV सार्वजनिक तौर पर मुलायम सिंह और साधना गुप्ता का रिश्ता साल 2004 में सामने आया था. इटावा के रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार दिनेश शाक्य के मुताबिक़, "साधना गुप्ता की शादी 1987 में चंद्र प्रकाश गुप्ता के साथ हुई थी. साल 1990 तक दोनों का तलाक हो गया था." लखनऊ स्थित वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान ने कहा, "साधना गुप्ता से मेरी मुलाक़ात अखिलेश यादव की शादी में हुई थी. तब के मुख्य सचिव योगेंद्र नरायण ने स्टेज पर परिचय कराया था." शरत प्रधान कहते हैं, "अखिलेश की शादी में साधना ने अहम रोल निभाया था क्योंकि मुलायम सिंह तैयार नहीं थे. इसके बाद अखिलेश यादव और साधना गुप्ता में रिश्ते अच्छे हो गए थे लेकिन बाद में विरासत की लड़ाई में रिश्ते खराब हो गए थे." दिनेश शाक्य कहते हैं, "इस दौरान परिवार के बीच काफ़ी तनाव रहा लेकिन मुलायम सिंह यादव का क़द इतना बड़ा था कि कोई खुलकर विरोध नहीं कर पाया था." हालाँकि वरिष्ठ पत्रकार राधेकृष्ण इस बात को नहीं मानते. वे कहते हैं, ''परिवार के बीच मतभेद सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आए थे. क्योंकि प्रतीक यादव परिवार वालों ख़ास कर शिवपाल यादव की पत्नी सरला यादव के भी चहेते थे." बाद में हालात बदल गए थे. साल 2011 में प्रतीक यादव की अपर्णा से शादी के दौरान पूरा परिवार एकजुट दिखाई दिया था. दिनेश शाक्य कहते हैं, "इस शादी में पूरे देश के बड़े लोग आए थे. अखिलेश यादव ने बड़े भाई की भूमिका में तो डिंपल यादव ने भाभी की भूमिका में प्रतीक को टीका लगाया था." दिनेश शाक्य बताते हैं, "प्रतीक यादव अपनी शादी का इंतज़ाम देखने जब सैफई गए थे तो वहाँ मट्ठे के आलू बन रहे थे. वो उन्होंने खाए और कहा कि ये पहले कभी नहीं खाया था." प्रतीक यादव की पढ़ाई लखनऊ के सिटी मोंटेसरी स्कूल में हुई थी. इसके बाद लखनऊ विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन और यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स से एमबीए किया था. प्रतीक यादव के सार्वजनिक रूप से सामने आने के बाद मुलायम सिंह यादव के उत्तराधिकार की भी चर्चा होने लगी थी. हालाँकि, साल 2012 में अखिलेश यादव को प्रदेश का मुख्यमंत्री बना कर कुछ हद तक मुलायम सिंह यादव ने तस्वीर साफ़ कर दी थी. राधेकृष्ण कहते हैं, "प्रतीक को राजनीति में रुचि नहीं थी. उन्होंने कभी अखिलेश का रास्ता नहीं काटा." हालाँकि प्रतीक यादव को राजनीति में लाने की एक नई कोशिश 2012 में हुई, जब समाजवादी पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं ने माँग की कि उन्हें 2014 लोकसभा चुनाव में आज़मगढ़ से टिकट दिया जाए. राजनीति में उनकी रुचि न होने की वजह से बात आगे नहीं बढ़ पाई. दूसरी ओर, प्रतीक यादव की पत्नी अपर्णा यादव बिष्ट की राजनीति में रुचि है. इस वक़्त वह राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष हैं. अपर्णा की राजनीतिक पारी की शुरुआत साल 2017 में समाजवादी पार्टी से हुई लेकिन वे चुनाव हार गई थीं. साल 2022 में वो बीजेपी में शामिल हो गईं. हालांकि, इन सबके बीच प्रतीक यादव सिर्फ़ अपने क़ारोबार पर ही फ़ोकस करते रहे. कई बार राजनीति में उतरने की सुगबुगाहट हुई लेकिन प्रतीक ने साफ़ इनकार कर दिया. लखनऊ के पत्रकार नवलकांत सिन्हा ने बताया, "प्रतीक यादव का रियल एस्टेट और जिम का बिज़नेस था." प्रतीक की मौत के बाद अखिलेश यादव ने बिज़नेस में नुक़सान होने का ज़िक्र किया था. राधेकृष्ण कहते हैं, "जब पार्टी के भीतर अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल के बीच खींचतान चल रही थी तो प्रतीक ने किसी का पक्ष नहीं लिया था. दूसरी ओर, प्रतीक यादव की माँ साधना गुप्ता और पत्नी दोनों पर पार्टी के भीतर राजनीतिक दरार बढ़ाने के आरोप लगे." इमेज स्रोत, The India Today Group via Getty Images साल 2012 में जब अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाया गया तब से ही उनकी चाचा शिवपाल से खींचतान शुरू हो गई थी. 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले यह संघर्ष चरम पर पहुँच गया था. इसके बाद शिवपाल ने अलग होकर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) बना ली थी. हालाँकि ये तनाव धीरे-धीरे कम हो गया. अब शिवपाल वापस समाजवादी पार्टी में हैं. अक्टूबर 2022 में 82 वर्ष की आयु में मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद पार्टी की कमान सहज रूप से अखिलेश यादव के हाथों में चली गई. उनके निधन के बाद परिवार के भीतर सुलह हो गई थी. साल 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले शिवपाल और अखिलेश यादव दोनों एक साथ आए और शिवपाल ने अपनी पार्टी का सपा में विलय कर दिया. हालाँकि, दिनेश शाक्य कहते हैं, "अनौपचारिक तौर पर पार्टी की कमान तो मुलायम सिंह यादव ने साल 2012 में ही अखिलेश यादव को सौंप दी थी." इमेज स्रोत, Sonu Mehta/Hindustan Times via Getty Images इसके बाद पारिवारिक मतभेद फिर उस समय सामने आए जब अपर्णा यादव बिष्ट साल 2022 में समाजवादी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गईं. वे समाजवादी पार्टी की मुखर आलोचक बन गईं. उन्होंने कहा कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महिला-केंद्रित नीतियों से प्रेरित हुई हैं. सितंबर 2024 में भाजपा सरकार ने उन्हें उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया. लेकिन उनकी राजनीतिक पारी के बीच प्रतीक यादव ने जनवरी 2026 में सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था. इससे ऐसा आभास हुआ कि दोनों के बीच सब कुछ ठीक नहीं है. राधेकृष्ण कहते हैं, "सोशल मीडिया पोस्ट के अलावा कोई जानकारी प्रतीक ने साझा नहीं की थी." राधेकृष्ण का कहना है, "प्रतीक को महँगी और तेज़ चलने वाली कार का शौक था. इसलिए लैंबोर्गिनी खरीदने पर विवाद में भी आए थे. हालाँकि अपने बचाव में उन्होंने कहा कि ये लोन पर ली गई है. इधर वे हवाई जहाज़ चलाना सीख रहे थे." इन सबके बीच प्रतीक यादव के देहांत पर अखिलेश यादव ग़मगीन दिखाई दिए. इन दो दिनों में वे कई बार अपने आँसू नहीं रोक पाए. बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, 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स्रोत: BBC Hindi