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दहेज मामले में महिला की मौत पर SC ने तय की जवाबदेही- चारदीवारी में क्या हुआ ससुरालवालों को देना होगा जवाब

दहेज के लिए पत्नी के साथ क्रूरता और हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बेहद अहम टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि अगर कोई अपराध घर की चारदीवारी में होता है, तो घर में रहने वालों पर यह स्पष्ट करने का दायित्व होगा कि पीड़ित की मृत्यु कैसे हुई. सोमवार (25 मई, 2026) को पत्नी की हत्या के मामले में पति की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखते हुए कोर्ट ने यह बात कही.

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने अपनी पत्नी सोमा आचार्य के साथ क्रूरता करने और उसकी हत्या करने के मामले में गौर आचार्य नाम के व्यक्ति की दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा. बेंच ने कहा कि महिला का पति पीड़िता के शरीर पर लगी चोटों का कोई तर्कसंगत स्पष्टीकरण देकर उसे समझाने में नाकाम रहा.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'यह सर्वविदित है कि अगर कोई अपराध घर की चारदीवारी में होता है, तो हालांकि मामले को साबित करने का प्रारंभिक भार अभियोजन पक्ष पर होगा, लेकिन पीड़ित की मृत्यु कैसे हुई, इसका ठोस स्पष्टीकरण देने की जिम्मेदारी घर में रहने वालों की भी होगी.'

कोर्ट ने इस मामले को कई लोगों के लिए आंखें खोलने वाला बताया है. उन्होंने पूछा, 'क्या सोमा आचार्य की जान बचाई जा सकती थी? क्या सामाजिक बदनामी के डर से सोमा को भेड़ियों (ससुराल वालों) के हवाले कर दिया गया? ये सवाल काल्पनिक ही रहेंगे.'

स्रोत: ABP Hindi