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फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिन्दी बोलते हुए पीएम मोदी के लिए बनाया ये वीडियो

इमेज स्रोत, Ludovic MARIN / AFP via Getty Images फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए गुरुवार रात एक वीडियो मैसेज शेयर किया है, इसमें वो हिन्दी में बोलते हुए नज़र आ रहे हैं. इमैनुएल मैक्रों ने कहा, "प्रिय मित्र नरेंद्र... नीस, एवियन और पेरिस के दौरे पर आपका स्वागत करते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हुई. फ़्रांस और भारत की दोस्ती अमर रहे." इसके बाद फ़्रांसीसी राष्ट्रपति ने अंग्रेज़ी में कहा, "मुझे उम्मीद है यह संदेश सही होगा. डियर प्राइम मिनिस्टर इस मित्रता के लिए आपका धन्यवाद. मैं अगली फ़रवरी में आपसे मिलूंगा." गौरतलब है कि पीएम मोदी 6 दिन तक फ़्रांस और स्लोवाकिया के दौरे पर रहे. इसके बाद गुरुवार देर रात वो भारत के लिए रवाना हुए. अपनी यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने जी-7 शिखर सम्मेलन में शिरकत की. यहां पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भी मुलाक़ात हुई. इमेज स्रोत, youtube.com/@ParastooAhmadii ईरान की एक अदालत ने गायिका परस्तू अहमदी और 'कारवांसराय कॉन्सर्ट' के आठ अन्य मेंबर्स को को 74 कोड़े मारने की सज़ा दी है. साथ ही इन पर दो साल तक देश से बाहर जाने और दो साल तक कला से जुड़ी एक्टिविटीज़ करने पर रोक लगाई गई है. यह फ़ैसला क़ोम प्रांत की अदालत ने सुनाया. अदालत ने इस्लामी क़ानून की धाराओं का हवाला देते हुए हर सदस्य को यही सज़ा दी है. साथ ही कहा गया है कि यह फ़ैसला देश के मीडिया में भी छापा जाएगा. जिन लोगों को सज़ा सुनाई गई है, उन पर आरोप है कि 'इंटरनेट पर ग़लत और अश्लील चीज़ें डालकर लोगों की शालीनता को नुक़सान पहुंचाया' है. 'कारवांसराय कॉन्सर्ट' का वीडियो दिसंबर 2014 में गायिका परस्तू अहमदी के यूट्यूब चैनल पर डाला गया था. सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहुत चर्चा हुई. इस वीडियो में गायिका ने बिना हिजाब पहने गाना गाया था. यूट्यूब पर यह वीडियो कुछ ही घंटों में 1 लाख से ज़्यादा बार देखा गया. इसे सोशल मीडिया पर भी ख़ूब शेयर किया गया. अब तक इस वीडियो को लगभग 30 लाख बार देखा जा चुका है और इसके क्लिप भी इंटरनेट पर वायरल चुके हैं. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भारत की स्थायी मिशन की प्रथम सचिव अनुपमा सिंह ने कहा है कि जम्मू और कश्मीर भारत का हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा. अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में हो रही हिंसा का ज़िक्र करते हुए पाकिस्तान पर कई आरोप लगाए. अनुपमा सिंह ने कहा, "जम्मू और कश्मीर भारत का हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा. एकमात्र अधूरा मुद्दा पाकिस्तान का भारतीय क्षेत्रों पर अवैध क़ब्ज़ा और उनका वापस आना है. पाकिस्तान का झूठा प्रचार पाकिस्तान अधिकृत जम्मू और कश्मीर में हो रहे अत्याचारों की सच्चाई को नहीं छिपा सकता." उन्होंने आगे कहा, "रावलाकोट में जारी त्रासदी, सैकड़ों नागरिकों की हत्या और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू और कश्मीर में हो रही हिंसक कार्रवाई उस व्यवस्था का नतीजा है जो जबरन क़ब्ज़े पर बनी है और दमन से चल रही है." अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान पर आरोप लगाते हुए कहा कि दशकों से इनकी सेना ज़मीन पर क़ब्ज़ा कर रही है. उन्होंने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर का ज़िक्र करते हुए कहा, "जनसंख्या में ज़बरदस्ती बदलाव और लोगों को बुनियादी आज़ादियों से वंचित करने की वजह से हालात इतने बिगड़ गए हैं कि अब अगर कोई रोटी, बिजली, अपने अधिकार या इज़्ज़त की मांग करता है तो उसे गोलियों और हिंसा से दबा दिया जाता है." गौरतलब है कि पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में हिंसा की घटनाएँ सामने आई हैं. प्रतिबंधित संगठन ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी की मांग है कि यहां की विधानसभा में आरक्षित सीटों की व्यवस्था ख़त्म की जाए. इन सीटों पर ऐसे उम्मीदवार चुनाव लड़ते हैं जो पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में नहीं बल्कि पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों में रहते हैं. इमेज स्रोत, Aaron Schwartz/CNP/Bloomberg via Getty Images अमेरिका की ओर से ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई नौसैनिक नाक़ाबंदी हटा ली गई है. दोनों देशों के बीच समझौते पर हुए हस्ताक्षर के ठीक बाद यह क़दम उठाया गया है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर इसकी पुष्टि करते हुए लिखा है कि राष्ट्रपति के निर्देश के अनुसार नाक़ाबंदी ख़त्म कर दी गई है. सेंटकॉम ने एक्स पर लिखा, "आज अमेरिकी सेनाओं ने राष्ट्रपति के निर्देश पर ईरानी बंदरगाहों और तटीय इलाक़ों में आने-जाने वाले सभी जहाज़ों पर लगी नाक़ाबंदी हटा दी है." सेंटकॉम ने आगे लिखा, "अमेरिकी सेनाएं अब ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाज़ों को नहीं रोक रही हैं. अमेरिकी नौसैनिक नाक़ाबंदी लागू करने की सभी कोशिशें बंद कर दी गई हैं. हमारे बड़े नौसैनिक जहाज़ सामान्य क्षेत्र में रहेंगे ताकि समझौते के सभी पहलुओं का पालन सुनिश्चित हो सके." गौरतलब है कि बतौर मध्यस्थ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने गुरुवार को ही कह दिया था कि यह समझौता तुरंत प्रभाव से लागू होगा. उन्होंने कहा था कि इसके पहले क़दम के तौर पर ईरान होर्मुज़ स्ट्रेट खोलेगा और अमेरिका नौसैनिक नाक़ाबंदी हटाएगा. संबंधित कहानी: ईरान अमेरिका के साथ हुए समझौते को अपनी जीत क्यों मान रहा है? इमेज स्रोत, Morteza Nikoubazl/NurPhoto via Getty Images ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा ख़ामेनेई ने कहा है कि अमेरिका के साथ हुए समझौते पर उनकी अलग राय थी, लेकिन फिर भी उन्होंने इस पर दस्तख़त करने की इजाज़त दे दी. ईरानी मीडिया ने गुरुवार शाम को मोजतबा ख़ामेनेई का बयान प्रकाशित किया. मोजतबा ख़ामेनेई ने अपने लिखित संदेश में कहा, "इस समझौते पर मेरी राय अलग थी. लेकिन राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने मुझे भरोसा दिलाया कि वो ईरानी जनता और विरोधी ताक़तों के ख़िलाफ़ खड़े लोगों के अधिकारों की रक्षा करेंगे. उन्होंने इसकी ज़िम्मेदारी भी ली. इसी वजह से मैंने मंज़ूरी दी." ख़ामेनेई ने कहा कि पेज़ेश्कियान ने उन्हें बताया कि अगर अमेरिकी पक्ष ज़्यादा मांग करेगा तो वे उसे नहीं मानेंगे. ख़ामेनेई ने संदेश में लिखा, "अब से हम सब, मैं और हमारा गर्वित देश, बताए गए शर्तों के पूरे होने का इंतज़ार करेंगे." इस संदेश में ख़ामेनेई ने सीधे तौर पर ईरानी और अमेरिकी अधिकारियों के बीच बातचीत की अनुमति भी दी है. यह पहली बार है जब मोजतबा ख़ामेनेई ने इस समझौते पर प्रतिक्रिया दी है. मार्च में सुप्रीम लीडर का पद संभालने के बाद से वो जनता के सामने नहीं आए हैं. उनके पिता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की 28 फ़रवरी को अमेरिका-इसराइल के हमले में मौत हो गई थी. संबंधित कहानी: क्या टिक पाएगा अमेरिका-ईरान समझौता, ये तीन मुद्दे बिगाड़ सकते हैं बात बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लाइव पेज पर आपका स्वागत है. मैं बीबीसी संवाददाता रौनक भैड़ा अब से दोपहर दो बजे तक आप तक अहम ख़बरें पहुंचाऊंगा. कल के लाइव पेज की ख़बरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. हमारे पेज पर मौजूद कुछ अहम ख़बरों को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें. - क्या टिक पाएगा अमेरिका-ईरान समझौता, ये तीन मुद्दे बिगाड़ सकते हैं बात - टेलीग्राम को केंद्र सरकार ने 'डार्क वेब, अपराधियों और टेररिस्ट' का पसंदीदा प्लेटफ़ॉर्म बताया - ई85, ई100, बीमा, गन्ने का रस? पढ़िए इथेनॉल से जुड़े 10 सवालों के जवाब - सिर पर तलवार के वार से मारी गई थीं रानी लक्ष्मीबाई - ईरान अमेरिका के साथ हुए समझौते को अपनी जीत क्यों मान रहा है?

स्रोत: BBC Hindi