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वेनेज़ुएला भूकंप: मलबे में फँसे लोगों की तलाश के बीच जब छा गई दर्दनाक ख़ामोशी

कंक्रीट, लोहे और धूल के बड़े और कभी भी खिसक सकने वाले मलबे के ढेर के ऊपर दर्जनों लोग काम कर रहे हैं. वे मलबा हटा रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि उन्हें कोई जीवित व्यक्ति या किसी का शव मिल जाए. अचानक सब कुछ रुक जाता है. लोग चिल्लाने लगते हैं. कुछ दौड़ पड़ते हैं. कुछ एक-दूसरे को गले लगा लेते हैं. एक बचावकर्मी को लगता है कि उसे मलबे के नीचे से किसी की आवाज़ सुनाई दी है. एक महिला रोते हुए कहती है, "हे भगवान, आपका शुक्रिया." दूसरी महिला हैरानी से पूछती है, "सच में?" उम्मीद भरी यह ख़बर तेज़ी से फैल जाती है. बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें बीते सप्ताह वेनेज़ुएला में आए दो भूकंपों में कई इमारतें ढह गई थीं. कई लोगों के मलबे में फँसे होने की आशंका है और बचाव अभियान जारी है. यह इलाक़ा ला गुआइरा के समुद्र तट के पास स्थित मारियोला और मारिबेल रेजिडेंस का है. बुधवार को आए भूकंपों से पहले यहाँ बड़ी संख्या में लोग समुद्र तट पर धूप का आनंद ले रहे थे. इस आवासीय परिसर की दो इमारतों में से अब सिर्फ़ एक खड़ी है. वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं. हालाँकि वह भी झुकी हुई है. उसे देखकर लगता है कि वह किसी भी समय गिर सकती है. दूसरी इमारत मानो ज़मीन में समा गई हो. इस बीच कई बचावकर्मी सड़क की ओर दौड़ते हैं. वे वाहनों के इंजन बंद करने का इशारा करते हैं. क्रेनों को रोक दिया जाता है. ड्रिल मशीनें भी बंद कर दी जाती हैं. धीरे-धीरे शोर ख़त्म हो जाता है. इसके बाद बचावकर्मी मलबे पर चढ़ जाते हैं. वे घुटनों के बल बैठकर सिर झुका लेते हैं. एक बचावकर्मी ऊपर से आवाज़ लगाता है, "कृपया हमें सुनने दीजिए. शोर मत कीजिए. लगता है यहाँ कोई है." फिर यह संदेश लोगों तक एक के बाद एक पहुँचाया जाता है. "श्श्श... कृपया चुप रहिए." लोग अपनी साँसें तक रोक लेते हैं. उनके पास मदद का यही एक तरीका है. उम्मीद है कि कोई जीवित व्यक्ति बचाया जा सकता है. शनिवार तक 33 लोगों को जीवित निकाला गया था. लेकिन हर बीतते घंटे के साथ उम्मीद कम होती जा रही है. कोई व्यक्ति बेसब्री से चिल्लाता है, "कृपया कुछ बोलिए, ताकि हम आपको सुन सकें." वह नहीं जानता कि मलबे के नीचे कौन है. उसके ऊपर कई टन कंक्रीट का भार पड़ा है. वह फिर कहता है, "हम बचाव दल से हैं." इन शब्दों के अलावा चारों ओर पूरी ख़ामोशी है. यह ख़ामोशी ऐसी थी, मानो सब उसे सम्मान दे रहे हों. करीब 10 मिनट तक ऐसा महसूस होता है जैसे समय ठहर गया हो. लेकिन मलबे के नीचे से कोई आवाज़ नहीं आती. आख़िरकार विशेषज्ञ इसे ग़लत संकेत घोषित कर देते हैं. लोगों के चेहरों पर पल भर में निराशा छा जाती है. स्थानीय लोगों ने पास मौजूद पेशेवर बचाव दलों को ख़बर दी थी. वे कुछ ही मिनटों में वहाँ पहुँच जाते हैं. लेकिन उतनी ही जल्दी वापस भी लौट जाते हैं. हालाँकि रॉनी नवारो हार मानने को तैयार नहीं हैं. वह शनिवार को प्यूर्टो ला क्रूज़ से यहाँ पहुँचे थे. यह शहर ला गुआइरा से लगभग 350 किलोमीटर दूर है. रॉनी अपने चाचा को मलबे से निकालने में मदद करने आए हैं. वह बेहद थके हुए नज़र आते हैं. वह अपने साथियों की ओर देखते हैं, जो अब भी मलबा हटाने में जुटे हैं. रॉनी कहते हैं, "वहाँ मलबे में शव फँसे हुए हैं." वह कहते हैं, "जो लोग यहाँ रहते थे, उनके रिश्तेदार ही मदद कर रहे हैं. क्योंकि सरकार मदद नहीं करना चाहती." उनका आरोप है, "अधिकारी कुछ नहीं कहते. वे आते हैं, एक नज़र देखते हैं और फिर चले जाते हैं. क्योंकि वहाँ उनके अपने रिश्तेदार नहीं दबे हैं." रॉनी को अब तक अपने चाचा के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है. वह कहते हैं, "उन्हें अभी तक बाहर नहीं निकाला गया है." यह कहते हुए उनकी आवाज़ भर्रा जाती है. कुछ मिनट पहले तक जो उम्मीद दिखाई दे रही थी, वह जल्द ही निराशा में बदल जाती है. और यह निराशा यहाँ और पूरे ला गुआइरा में धीरे-धीरे ग़ुस्से का रूप लेने लगती है. 66 वर्षीय जीवविज्ञानी जूली मारीन पिछले एक दशक से ज़्यादा समय से मारियोला और मारिबेल रेज़िडेंस में रह रही थीं. भूकंप आने से पहले वह ख़रीदारी के लिए बाहर गईं. घर लौटने के बजाय उन्होंने अपने पिता से मिलने का फ़ैसला किया. उनका कहना है कि इसी फ़ैसले ने उनकी जान बचा ली. उन्होंने बीबीसी मुंडो से कहा, "मैंने अपनी भतीजी और जेठ को खो दिया. बचाव अभियान शुरू होने में देरी हुई. मेरा मानना है कि अगर अधिकारी पहले पहुँच गए होते, तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी." इमेज स्रोत, Diko Betancourt/Anadolu via Getty Images) पास ही बेल्किस वालेसियो भारी मशीनों को काम करते हुए देख रही हैं. ये मशीनें मुख्य सड़क और आसपास की इमारतों में लगी हुई हैं. वह कहती हैं, "मेरा भाई, मेरा भतीजा और मेरी भाभी उस टॉवर की पहली मंज़िल में दबे हुए हैं." बेल्किस का कहना है कि उन्हें बताया गया है कि भारी मशीनों का इस्तेमाल तभी किया जाना चाहिए, जब तलाश और बचाव अभियान ख़त्म कर दिया जाए. वह कहती हैं, "अभी तो सिर्फ़ चार दिन ही हुए हैं." बेल्किस के भाई जिस इमारत में रहते थे, वह पास के कैरिबे आवासीय परिसर में थी. वह इमारत पूरी तरह तबाह हो चुकी है. फिर भी तीन परिवार अब भी अपने परिजनों को तलाशने के लिए मलबा हटा रहे हैं. वह कहती हैं, "कई शव पहले ही निकाले जा चुके हैं और अभी भी वहाँ और लोग दबे हुए हैं." जैसे-जैसे रात होती है, माहौल में थोड़ी देर के लिए फिर उम्मीद लौट आती है. जहाँ कभी कैरिबे आवासीय परिसर खड़ा था, वहाँ अब मलबे का विशाल ढेर है. उस मलबे पर लोग तेज़ी से इधर-उधर भाग रहे हैं. कुछ लोग सड़क पर दौड़ते हुए सबसे चुप रहने की अपील कर रहे हैं. नर्सों का एक समूह भी वहाँ पहुँचता है. हर कोई मदद करना चाहता है. एक युवा कहता है कि उसे मलबे के भीतर से किसी की आवाज़ सुनाई दी है. कोई चिल्लाता है, "पानी, पानी. बचावकर्मियों के लिए पानी लाओ." इस दौरान लगभग एक दर्जन लोग तेज़ी से काम में जुट जाते हैं. लेकिन कुछ देर बाद इसे भी ग़लत संकेत करार दे दिया जाता है. करीब आधे घंटे बाद मलबे की गहराई में दो बिना हरकत वाले शरीर दिखाई देते हैं. बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित. 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स्रोत: BBC Hindi