भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान सलीमा टेटे को बेल्जियम और नीदरलैंड में होने वाले एफआईएच विश्व कप हॉकी में बेहतर प्रदर्शन का पक्का भरोसा है. पर इतिहास भारत के पक्ष में नहीं है. हालांकि नए कोच शोर्ड मारिन की मौजूदगी टीम की किस्मत बदल सकती है. डच कोच की मौजूदगी में ही भारत ओलंपिक में चौथा स्थान तक पहुंचने वाला प्रदर्शन कर चुका है. अब देखना यह है कि क्या मारिन भारतीय महिला हॉकी टीम को पहली बार पोडियम पर चढ़ा पाएंगे. भारतीय टीम के भरोसे और नई ऊर्जा के पीछे की वजह नेशंस कप को जीतना है. भारत के ग्रुप डी में शामिल चीन और इंग्लैंड दोनों ही रैंकिंग में उससे ऊपर हैं. भारत की नौवीं रैंकिंग के मुकाबले चीन चौथे और इंग्लैंड सातवें स्थान पर है. ग्रुप में सिर्फ़ दक्षिण अफ़्रीका ही है, जो 18वीं रैंकिंग की टीम है. भारतीय टीम यदि ग्रुप की दो टीमों में शामिल भी हो जाती है तो अगले ग्रुप में उसे नीदरलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी दिग्गज टीमों का सामना करना होगा. वैसे कहते हैं कि जब आप पदक की उम्मीद करते हैं तो यह मायने नहीं रखता है कि सामने कौन सी टीम है. भारतीय कप्तान सलीमा टेटे ने जियो स्टार चैनल से बातचीत में कहा, "मुझे अपनी टीम पर पूरा भरोसा है. हम समझदारी के साथ आक्रामक हॉकी खेलेंगे. नेशंस कप को जीतने के बाद हमारा मनोबल बढ़ा है. अब हमारा लक्ष्य विश्व कप जीतना है. हमारे पास यह उपलब्धि हासिल करने की पूरी क्षमता है." उन्होंने कहा, "हमने विश्व कप के लिए कड़ी मेहनत की है. पिछले कुछ समय में टीम की सोच में भी बदलाव आया है. पहले कोच जो बताते थे, खिलाड़ी वही करते थे. पर अब हर खिलाड़ी अपनी फिटनेस और रिकवरी के लिए खुद प्रयास कर रहा है." भारतीय महिला हॉकी टीम कोच हरेंद्र सिंह के समय उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर रही थी. लेकिन इस साल की शुरुआत में डच कोच शोर्ड मारिन को ये ज़िम्मेदारी मिलने से टीम फिर से रंगत में आ गई है. भारतीय टीम ने हाल के सालों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2020 के टोक्यो ओलंपिक में किया था और वह चौथे स्थान पर रही थी, उस समय टीम के कोच शोर्ड मारिन ही थे. शोर्ड मारिन को एक बार फिर कोच की ज़िम्मेदारी मिलने के बाद भारत ने इस साल सबसे पहले हैदराबाद में विश्व कप क्वालिफिकेशन को जीता. इसके बाद जून महीने में नेशंस कप जीतने के बाद टीम में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है. नेशंस कप जीतने से भारत की एफआईएच प्रो लीग में वापसी हो गई है. भारत ने न्यूज़ीलैंड को 2-0 से हराकर नेशंस कप जीता था. भारतीय टीम ने इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया और अर्जेंटीना के ख़िलाफ़ द्विपक्षीय सिरीज में भी अच्छा प्रदर्शन करके किसी भी दिग्गज टीम का मुकाबला करने का जज्बा हासिल किया है. भारत ने 2020 के टोक्यो ओलंपिक में जब चौथा स्थान प्राप्त किया था, तब सविता पूनिया ही टीम की गोलकीपर थीं और उनके शानदार प्रदर्शन ने ही भारत को इस मुकाम तक पहुंचाया था. सविता का यह तीसरा विश्व कप है और वह अब तक 313 मैच खेल चुकी हैं. किसी भी टीम की सफलता में उसकी गोल जमाने की क्षमता के अलावा गोलकीपर के बचाव की क्षमता की अहम भूमिका होती है. सविता काफी समय तक टीम से अलग रहने के बाद अभी कुछ ही समय पहले टीम में लौटी हैं. सविता की अनुपस्थिति में बिचू देवी खारीबम ने भी खासा अनुभव हासिल किया है. वह मात्र 25 साल की उम्र में 65 मैचों का अनुभव हासिल कर चुकी हैं. सविता पूनिया ने जियो स्टार चैनल से बातचीत में कहा, "भारत ने हाल के समय में अर्जेंटीना, नीदरलैंड और जर्मनी जैसी दिग्गज टीमों के ख़िलाफ़ करीबी मैच खेले हैं, इससे विश्व की किसी भी दिग्गज टीम का सामना करने का भरोसा बना है. हम पूरे भरोसे के साथ कहना चाहते हैं कि हमारी टीम विश्व स्तरीय है और वह किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम है." इमेज स्रोत, INSTAGRAM/DIPIKA SEHRAWAT आजकल की हॉकी में पेनल्टी र्कार्नरों की भूमिका अहम रहती है. भारत इस मामले में थोड़ा कमजोर साबित होता रहा है. पर नेशंस कप में ड्रैग फ्लिकर दीपिका सेहरावत ने जिस तरह का प्रदर्शन किया, उससे इस क्षेत्र में बेहतर देखने की उम्मीद जगी है. दीपिका पिछले साल अगस्त महीने में एशिया कप से ठीक पहले हैमस्ट्रिंग का शिकार बन गईं थीं. पर दीपिका लौटते ही अपनी उपस्थिति का अहसास कराने में सफल रहीं हैं. दीपिका की पेनल्टी कॉर्नर लेने की कला को डच पेनल्टी कोच तइके तेकिमा ने और मांज दिया है. इससे वह भारत के लिए ट्रंप कार्ड साबित हो सकती हैं. वापसी के बाद उनकी पहली परीक्षा नेशंस कप में होनी थी. उन्होंने इसमें खेले पांच मैचों में छह गोल जमाकर अपनी क्षमता प्रदर्शित कर दी. वह इस टूर्नामेंट में संयुक्त रूप से टॉप स्कोरर रहीं. भारतीय टीम अनुभव और युवा का अच्छा मिश्रण है. इस टीम में आधी से ज्यादा खिलाड़ियों का यह पहला विश्व कप है. इसलिए कप्तान सलीमा टेटे, मिडफील्डर नवनीत कौर, लालरेमसियामी हमारजोते की ज़िम्मेदारी बनती है कि वह युवाओं को अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए प्रेरित करें. नवनीत और लालरेमसियामी दोनों ही मिडफील्डर हैं, इसलिए भारतीय हमलों में इनकी भूमिका अहम रहने वाली है. नवनीत को तो भारत की गोल मशीन भी कहा जाता है. वह सामने वाले डिफेंस को चकमा देकर गोल जमाने में महारत रखती हैं. साथ ही ज़रूरत पड़ने पर पेनल्टी कॉर्नर भी ले लेती हैं. लालरेमसियमी की जहां तक बात है, तो वह कप्तान सलीमा की तरह तेज फर्राटा लगा लेती हैं और वह गेम का संचालन बहुत होशियारी से करती हैं. इसलिए वह हमलों को बनाने के साथ डिफेंस में जरूरत के समय अहम भूमिका निभा सकती हैं. नीदरलैंड पिछले विश्व कप की चैंपियन है और उसे घर में खेलने का लाभ भी मिलने जा रहा है. नीदरलैंड के साथ ही अर्जेंटीना, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया की चुनौती को कम करके नहीं आंका जा सकता है. नीदरलैंड एफआईएच रैंकिंग में इस समय पहले स्थान पर है. उसने अभी कुछ ही समय पहले एफआईएच प्रो लीग का खिताब जीता है. वह सहज अंदाज में 2028 के ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कर गई है. जर्मनी भले ही रैंकिंग में पांचवें नंबर पर है पर पिछली एफआईएच प्रो लीग के अपने आखिरी आठ मैचों में से सात को जीतकर उन्होंने अपना दम दिखा दिया था. अर्जेंटीना विश्व की दूसरी रैंकिंग की टीम है और उसने एफआईएच प्रो लीग के पिछले संस्करण में दूसरा स्थान प्राप्त किया था. भारतीय महिला हॉकी टीम ने 1974 में महिला विश्व कप के शुरू होने पर जो दम दिखाया, उसे वह कभी दोहरा नहीं सकी है. भारत ने पहले विश्व कप में शानदार प्रदर्शन करके चौथा स्थान प्राप्त किया था. भारतीय टीम विश्व कप में नियमित तौर पर भाग लेने वाली भी नहीं रही है. अब तक 15 विश्व कपों का आयोजन हो चुका है और भारत ने आठ बार ही भाग लिया है. सही मायनों में 2006 के बाद से भारत का हिस्सा लेना थोड़ा नियमित हुआ है. इसके बाद सिर्फ़ 2014 को छोड़कर भारत ने हर बार हिस्सा लिया है. भारतीय टीम 2018 के विश्व कप में टॉप आठ टीमों में स्थान बना सकी है. इसके अलावा कभी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी है. वह दो मौकों पर 11वें और एक बार 12वें स्थान पर भी रही है. बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित. 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स्रोत: BBC Hindi